Janmashtami 2026: जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 4 सितंबर शुक्रवार को है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर भक्त व्रत रखते हैं और बाल गोपाल की पूजा करते हैं। भोग और पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
साथ ही कुछ चीजें न चढ़ाने की सलाह भी धार्मिक मान्यताओं में दी जाती है। मुरझाए फूल टूटे चावल कटे या खराब फल तांबे के बर्तन में दूध तथा लहसुन प्याज वाला पकवान इनमें प्रमुख हैं। ये बातें परंपरा पर आधारित हैं वैज्ञानिक प्रमाण नहीं। घर की रीति और पंडित की सलाह के अनुसार पूजा पूरी करें।
Janmashtami 2026: मुरझाए या गिरे फूल क्यों न दें
मान्यता है कि सूखे मुरझाए या जमीन पर गिरे फूल अर्पित न करें। पूजा में साफ ताजे फूल इस्तेमाल करने को कहा जाता है। गंदे या कुचले फूल श्रद्धा के प्रतीक नहीं माने जाते। बाजार से फूल लाएं तो धोकर और चुनकर ही चढ़ाएं। रात की पूजा के लिए दिन में ताजा फूल रखना बेहतर रहता है।
अक्षत यानी चावल कैसे चुनें
अक्षत का अर्थ साबुत चावल होता है। टूटे चावल चढ़ाने से बचने की सलाह है। साफ धुले साबुत चावल ही अक्षत माने जाते हैं। पीले या दाग वाले दाने अलग कर दें। अक्षत तिलक और अर्पण दोनों में एक जैसी सावधानी रखें। मात्रा कम हो तो भी साबुत दाने ही रखें।
Janmashtami 2026: फल भोग में क्या न रखें
कटे सड़े या लंबे समय से रखे फल भोग में न शामिल करने को कहा जाता है। ताजे धुले पूरे फल ही अर्पित करें। काटकर रखने से रस और सुगंध बदल जाती है ऐसी मान्यता है। मौसमी फल चुनें। बच्चे और बुजुर्ग बाद में प्रसाद के रूप में वही फल खा सकें इसलिए स्वच्छता जरूरी है।
तांबे के बर्तन और दूध
लड्डू गोपाल का अभिषेक दूध दही घी शहद और गंगाजल से होता है। कुछ परंपराओं में दूध या पंचामृत के लिए तांबे के बर्तन से बचने की सलाह दी जाती है। चांदी कांच या मिट्टी के पात्र का चलन अलग-अलग घरों में है। परिवार की पुरानी रीति देखें। बर्तन अच्छी तरह धोकर सुखाएं।
Janmashtami 2026: लहसुन प्याज वाला भोग
सात्विक भोजन का भोग लगाने की बात कही जाती है। लहसुन प्याज और तामसिक मानी जाने वाली सामग्री से बचें। रसोई साफ रखें और अलग बर्तन से भोग बनाएं। व्रत वाले दिन अनाज की जगह फलाहार परंपरा कई घरों में है। स्वाद के लिए मेवे और मिश्री का सहारा लिया जाता है।
चार सितंबर 2026 को जन्माष्टमी पर ताजे फूल साबुत अक्षत साफ फल और सात्विक भोग अर्पित करने की परंपरा है। मुरझाए फूल टूटे चावल कटे खराब फल तांबे में दूध तथा प्याज लहसुन वाले पकवान से बचने की सलाह मान्यताओं में मिलती है।
ये नियम श्रद्धा और स्वच्छता से जुड़े हैं बाध्यकारी कानून नहीं। हर परिवार की रीति अलग हो सकती है। पूजा के बाद प्रसाद बांटते समय भी सफाई रखें। स्थानीय पंचांग और घर के बड़े सदस्यों से विधि मिलाकर उत्सव मनाएं।
News Desk Declaration / Disclaimer
घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में शहर और स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी किसी भी विशेष जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
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