Jharkhand News: झारखंड सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों की शारीरिक और मानसिक सेहत को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने ‘हेल्थ केयर मैनेजमेंट एंड मेंटल वेलबीइंग’ परिनियम को मंजूरी दे दी है। इसके तहत राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में हेल्थ सेंटर की स्थापना अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही हर छात्र का डिजिटल हेल्थ आईडी बनाया जाएगा, ताकि उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एक क्लिक में उपलब्ध हो सके।
यह कदम छात्रों में बढ़ते तनाव, परीक्षा का दबाव और मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों को देखते हुए उठाया गया है। सरकार का मानना है कि पढ़ाई के साथ सेहत का ख्याल रखना जरूरी है, ताकि युवा बेहतर तरीके से अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। इस व्यवस्था के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपने वार्षिक बजट का दो प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण पर खर्च करना होगा।
डिजिटल हेल्थ आईडी कैसे काम करेगी?
नए नियमों के मुताबिक, राज्य के हर सरकारी विश्वविद्यालय और कॉलेज के विद्यार्थियों का डिजिटल हेल्थ आईडी बनाया जाएगा। इसे ई-समर्थ पोर्टल के हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम पर रजिस्टर किया जाएगा। इससे छात्र का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) सुरक्षित रहेगा। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर एक क्लिक में छात्र की पूरी स्वास्थ्य जानकारी देख सकेंगे।
इस डिजिटल व्यवस्था में ऑनलाइन काउंसलिंग, वीडियो-ऑडियो परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां भी उपलब्ध होंगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि छात्र की स्वास्थ्य और काउंसलिंग संबंधी जानकारी की पूरी गोपनीयता बरती जाए। कोई भी जानकारी बिना अनुमति के साझा नहीं की जाएगी।
हेल्थ सेंटर कैसे बनेगा और क्या सुविधाएं मिलेंगी?
परिनियम के तहत विश्वविद्यालय परिसर में कम से कम 1500 वर्गफीट का हेल्थ सेंटर बनाना अनिवार्य है। इसमें ओपीडी, आपातकालीन कक्ष, काउंसलिंग रूम, नर्स के बैठने की जगह और वेटिंग रूम की व्यवस्था होगी। यहां दो ऑब्जर्वेशन बेड, प्राथमिक जांच के उपकरण, ऑक्सीजन सिलेंडर, ईसीजी मशीन, ग्लूकोमीटर, नेबुलाइजर और फर्स्ट एड किट उपलब्ध रहेंगे। फुल-टाइम डॉक्टर, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और योग्य काउंसलर की नियुक्ति होगी।
अंगीभूत कॉलेजों में कम से कम 300 वर्गफीट का हेल्थ सेंटर बनेगा। यहां एक ऑब्जर्वेशन बेड और जरूरी जांच उपकरण होंगे। डॉक्टर और काउंसलर हर कॉलेज में सप्ताह में कम से कम दो दिन सेवाएं देंगे। जिन संस्थानों में हॉस्टल है, वहां अलग से सिक रूम बनाना होगा, जिसमें दो बेड और 24 घंटे स्टाफ नर्स की तैनाती रहेगी। आवासीय परिसरों में 24 घंटे एंबुलेंस की सुविधा भी अनिवार्य की गई है।
बजट का 2% कैसे खर्च होगा?
नए परिनियम के लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अपने वार्षिक बजट का दो प्रतिशत हिस्सा छात्रों के स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण पर खर्च करना होगा। राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का कुल वार्षिक बजट करीब 2564.45 करोड़ रुपये है। इसमें से लगभग 51.29 करोड़ रुपये केवल विद्यार्थियों की सेहत पर खर्च किए जाएंगे।
जरूरत पड़ने पर छात्रों से न्यूनतम शुल्क लिया जा सकता है। इसके अलावा सीएसआर फंड और पूर्व छात्रों (एलुमनी) से भी सहयोग राशि जुटाई जा सकेगी। यह राशि हेल्थ सेंटर के संचालन, दवाओं, उपकरण और काउंसलिंग सेवाओं पर खर्च होगी।
मानसिक स्वास्थ्य पर क्या खास ध्यान दिया जाएगा?
नए नियमों में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया है। विश्वविद्यालय स्तर पर कुलपति की अध्यक्षता में ‘यूनिवर्सिटी हेल्थ एंड वेलनेस काउंसिल’ बनेगी। कॉलेज स्तर पर प्राचार्य की अध्यक्षता में विशेष समिति होगी, जो स्वास्थ्य शिविरों, जागरूकता अभियानों और काउंसलिंग सेवाओं की निगरानी करेगी।
हर सेमेस्टर में योग, ध्यान, कला, संगीत और नृत्य से जुड़ी कम से कम दो कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। मानसिक स्वास्थ्य पर सालाना तीन कार्यशालाएं अनिवार्य होंगी। इनका मकसद छात्रों में तनाव कम करना और सकारात्मक माहौल बनाना है। काउंसलिंग रिकॉर्ड की गोपनीयता पूरी तरह सुनिश्चित की जाएगी।
इस फैसले से छात्रों को क्या फायदा होगा?
यह पहल छात्रों को प्राथमिक चिकित्सा, इमरजेंसी सेवाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग की सुविधा देगी। डिजिटल हेल्थ आईडी से आपात स्थिति में इलाज आसान हो जाएगा। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं से परीक्षा का तनाव और अन्य दबावों से निपटने में मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों को स्वस्थ और तनावमुक्त माहौल में पढ़ाई करने का अवसर देगी। आने वाले दिनों में इस परिनियम के क्रियान्वयन पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर और सुधार किए जा सकते हैं। झारखंड के उच्च शिक्षा संस्थानों में यह कदम छात्रों की समग्र भलाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
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Sanjana Gupta
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