Lauki Ka Halwa Recipe: लौकी को ज्यादातर रसोई सब्जी समझती है, पर उसी गूदे से हल्की मीठी और मलाईदार मिठाई बन जाती है। लौकी का हलवा घर पर तैयार होता है। स्वाद खुशबूदार रहता है और सही भूनने पर कच्चापन नहीं छूटता। शेफ रणवीर बरार रेसिपी में आंच, समय और सामग्री का क्रम तीन बातों पर टिकाते हैं। क्रम बिगड़े तो दूध फट सकता है और हलवा बेस्वाद रह जाता है।
एक किलो लौकी के लिए एक लीटर फुल क्रीम दूध, तीन से चार बड़े चम्मच घी, स्वादानुसार 150 से 200 ग्राम चीनी, दो-दो बड़े चम्मच काजू और बादाम, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और एक छोटा चम्मच गुलाब जल या केवड़ा जल काफी है। मेवे पहले भूनकर रख लें। तैयारी करीब 20 मिनट और पकाने में करीब 30 मिनट लगते हैं।
कद्दूकस लौकी तुरंत कड़ाही में क्यों जाए?
लौकी धोकर छीलें और जरूरत भर कद्दूकस कर लें। कटा गूदा खुला पड़ा रहे तो जल्दी रंग बदलता है। कद्दूकस होते ही भारी तली वाली कड़ाही में डाल दें। देर हुई तो हलवा भूरा और फीका पड़ सकता है। रेसिपी का पहला नियम यही है कि अगला कदम समय पर शुरू हो।
घी में लौकी कब तक भूनें कि दूध न फटे?
कड़ाही में घी गर्म करें। कद्दूकस लौकी डालकर मध्यम आंच पर भूनें। तब तक पकाएं, जब कच्चापन खत्म हो और रंग हल्का पारदर्शी लगे। जल्दबाजी न करें। आगे दूध डाला जाएगा। अच्छी पकी लौकी दूध को फटने से बचाने में मदद करती है। चलाते रहें, वरना तले चिपक जाएगी।
दूध घटाने और चीनी डालने का सही क्रम क्या है?
लौकी पक जाए, तब फुल क्रीम दूध डालें। आंच मध्यम रखें। मिश्रण को धीरे पकने दें और बीच-बीच में चलाएं, ताकि तले न जमे। दूध तब तक घटाएं, जब वह लौकी में अच्छी तरह मिल जाए। यहीं से मलाईदार स्वाद आता है। समय लगता है। आंच तेज कर जल्दी निपटाना स्वाद गिरा देता है।
चीनी शुरुआत में न डालें। दूध काफी कम हो जाए, तब 150 से 200 ग्राम चीनी मिलाएं। आखिर में चीनी डालने से बनावट बेहतर रहती है। कुछ देर और पकाएं। हलवा न बहुत पतला रहे, न जरूरत से ज्यादा सूखे। चम्मच से गिरे और थाली में बैठे, यही गाढ़ापन सही है।
मेवे और केवड़ा आखिर में कैसे मिलाएं?
भुने काजू और बादाम डालें। इलायची पाउडर मिलाएं। खुशबू के लिए एक छोटा चम्मच गुलाब जल या केवड़ा जल काफी है। ज्यादा केवड़ा मिठाई पर हावी हो जाता है। सब कुछ मिलाकर कुछ मिनट पकाएं और गैस बंद कर दें।
गर्मागर्म परोसें या ठंडा रखकर खाएं?
हलवा दोनों तरह चलता है। गर्मागर्म परोसें या ठंडा करके खाएं। ठंडा होने पर वह और गाढ़ा बैठता है। शेफ रणवीर बरार के अनुसार सामग्री से ज्यादा आंच, समय और धैर्य स्वाद तय करते हैं। कच्चा स्वाद बचे तो लौकी और देर भूनें। दूध फटे तो समझें लौकी पूरी नहीं पकी थी। अगली बार रंग बदलने तक इंतजार करें, फिर दूध डालें। एक किलो लौकी से परिवार भर की कटोरी बन जाती है।
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