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मोकामा विधायक अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत, दुलारचंद यादव हत्याकांड में 4 महीने बाद मिली राहत

Anant Singh Bail News: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। मोकामा के जेडीयू विधायक अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत दे दी है। वे पिछले चार महीनों से बेऊर जेल में बंद थे। अब कागजी काम पूरा होने के बाद वे 20 या 21 मार्च तक जेल से बाहर आ सकते हैं। उनकी रिहाई की खबर से मोकामा और आसपास के इलाकों में उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

यह मामला पिछले साल के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुआ था। अनंत सिंह पर आरोप था कि चुनाव प्रचार के समय दुलारचंद यादव की हत्या में उनकी भूमिका थी। दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के समर्थक थे और प्रचार कर रहे थे। इस घटना में गोलीबारी हुई थी, जिसमें दुलारचंद यादव की मौत हो गई। पुलिस ने अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बताते हुए गिरफ्तार किया था।

जमानत मिलने का सफर

अनंत सिंह को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। तब से वे बेऊर जेल में थे। निचली अदालत ने उनकी जमानत याचिका कई बार खारिज कर दी थी। दिसंबर 2025 में पटना सिविल कोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद अनंत सिंह ने पटना हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद आज आज जमानत मिल गई।

कोर्ट ने कहा कि जांच में अब तक जो सबूत सामने आए हैं, उनमें जमानत देने में कोई बड़ी समस्या नहीं है। हालांकि, कुछ शर्तें लगाई गई हैं, जैसे वे जांच में सहयोग करेंगे और गवाहों पर दबाव नहीं डालेंगे। जमानत मिलने के बाद अनंत सिंह की कानूनी टीम ने राहत की सांस ली है।

जेल से बाहर आने की तैयारी

Anant Singh Bail News

सूत्रों के अनुसार, जमानत आदेश की कॉपी मिलने के बाद जेल प्रशासन औपचारिकताएं पूरी करेगा। इसमें जमानत राशि जमा करना और अन्य कागजात शामिल हैं। सब कुछ ठीक रहा तो अनंत सिंह कल या परसों तक घर पहुंच सकते हैं। उनकी रिहाई को लेकर मोकामा में पहले से ही तैयारी शुरू हो गई है। समर्थक पोस्टर लगाकर और मीटिंग करके उनका स्वागत करने की योजना बना रहे हैं।

चुनाव जीतने की अनोखी कहानी

अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए ही 2025 के विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट से जीत हासिल की थी। वे जेडीयू के टिकट पर लड़े थे और अच्छे अंतर से जीते। चुनाव के दौरान वे जेल से वोट देने भी पहुंचे थे। फरवरी 2026 में पटना सिविल कोर्ट ने उन्हें विधायक की शपथ लेने की इजाजत दी थी। शपथ लेने के लिए उन्हें जेल से पैरोल पर बाहर लाया गया था। शपथ के बाद वे फिर जेल लौट गए थे।

यह उनकी राजनीतिक ताकत को दिखाता है कि जेल में रहते हुए भी लोग उन्हें वोट देते हैं। अनंत सिंह मोकामा में कई बार विधायक रह चुके हैं। उनकी छवि बाहुबली की रही है, लेकिन वे कहते हैं कि वे अब विकास और लोगों की सेवा पर फोकस करना चाहते हैं।

समर्थकों में उत्साह, विरोधियों में चर्चा

जमानत की खबर फैलते ही मोकामा में जश्न का माहौल बन गया। लोग घरों से बाहर निकलकर मिठाई बांट रहे हैं। उनके समर्थक कहते हैं कि अब अनंत सिंह फिर से सक्रिय होंगे और इलाके के विकास कार्यों को गति मिलेगी। कई लोग कह रहे हैं कि “हमारा शेर अब बाहर आ रहा है।

दूसरी तरफ, विपक्षी दल इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। वे कहते हैं कि ऐसे गंभीर मामले में जल्दी जमानत मिलना सही नहीं है। हालांकि, अनंत सिंह के वकील का कहना है कि कोर्ट ने सबूतों और कानून के आधार पर फैसला दिया है।

राजनीति में क्या असर पड़ेगा?

विश्लेषकों का मानना है कि अनंत सिंह की रिहाई से बिहार की राजनीति में नई हलचल आएगी। खासकर मोकामा और पटना के आसपास के इलाकों में उनकी मौजूदगी मजबूत हो सकती है। जेडीयू के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि अनंत सिंह पार्टी के मजबूत नेता हैं। आने वाले लोकसभा या अन्य चुनावों में उनका रोल अहम हो सकता है।

अनंत सिंह ने राज्यसभा चुनाव के दौरान भी जेल से वोट दिया था। उस समय उन्होंने कहा था कि उनका परिवार भी अब राजनीति में आगे आएगा। उनकी पत्नी और अन्य रिश्तेदार पहले भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। रिहाई के बाद वे विधानसभा में अपनी जिम्मेदारी निभा सकेंगे और लोगों से मिलना-जुलना शुरू कर सकेंगे।

मामला कैसे शुरू हुआ?

दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी। वे चुनाव प्रचार कर रहे थे। गोलीबारी में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने जांच में अनंत सिंह और उनके साथियों को आरोपी बनाया। अनंत सिंह पर हत्या का मुख्य आरोप लगा। पुलिस ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार किया था। जांच में कई गवाहों के बयान आए, लेकिन कोर्ट ने अब जमानत दे दी है।

अदालती कार्यवाही और ट्रायल

ट्रायल अभी चल रहा है। जमानत मिलने के बावजूद केस में सुनवाई जारी रहेगी। अगर कोर्ट में साबित हो गया कि आरोप गलत हैं, तो अनंत सिंह पूरी तरह बरी हो सकते हैं।

जेल से राजनीति की नई शुरुआत

अनंत सिंह की जमानत सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं है। यह बिहार की सियासत में बड़ा मोड़ है। जेल से बाहर आने के बाद वे अपनी पुरानी ताकत के साथ वापसी करेंगे। मोकामा के लोग लंबे समय से उनका इंतजार कर रहे थे। अब देखना यह है कि वे राजनीति में क्या नया करते हैं और आने वाले दिनों में क्या बदलाव लाते हैं।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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