Odisha News: ओडिशा सरकार ने शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब, बेघर और भूमिहीन परिवारों को अपना पक्का घर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। किफायती आवास भागीदारी (एएचपी) योजना के तहत राज्य के नौ शहरी क्षेत्रों में 10 हजार परिवारों को आवास देने का निर्णय लिया गया है। इनमें बस्तियों में रह रहे बेघर, भूमिहीन और बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी। गृह निर्माण एवं नगर विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी की अध्यक्षता में हुई ओडिशा लिवेबल हैबिटेट मिशन (ओएलएचएम) की तीसरी कार्यकारी समिति बैठक में यह फैसला सामने आया। बैठक में योजना की प्रगति, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा की गई तथा समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
ओडिशा में किफायती आवास योजना के तहत कितने परिवारों को घर मिलेगा?
राज्य सरकार ने साफ किया है कि नौ शहरी क्षेत्रों में कुल 10 हजार गरीब परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराया जाएगा। यह आवास एएचपी योजना के अंतर्गत दिया जाएगा, जो ओडिशा लिवेबल हैबिटेट मिशन का हिस्सा है। योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले, बेघर और भूमिहीन परिवारों को स्थायी आश्रय देना है। बैठक में बताया गया कि केवल मकान बनाना काफी नहीं है, बल्कि इन परिवारों के जीवन स्तर में सुधार भी लक्ष्य है। इसके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि योजनाएं कागज पर न रहें बल्कि जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचें।
किन लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी?
योजना में बेघर, भूमिहीन परिवारों और बुजुर्गों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। शहरी बस्तियों में रहने वाले असहाय और वंचित वर्गों की आवास संबंधी जरूरतों को सबसे पहले ध्यान में रखा जाएगा। बैठक में उषा पाढ़ी ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के असहाय लोगों की स्थिति को देखते हुए लक्षित योजनाएं तैयार की जानी चाहिए। बुजुर्गों और विकलांगों जैसी कमजोर श्रेणियों को भी ध्यान में रखने का निर्देश दिया गया। सरकार का प्रयास है कि इन वर्गों को न सिर्फ मकान मिले बल्कि वे सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसके लिए मुख्यमंत्री स्मार्ट सिटी मिशन के तहत प्रस्तावित योजनाओं के दिशा-निर्देशों को जल्द अंतिम रूप देने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में क्या-क्या फैसले और समीक्षा हुई?
उन्नति भवन में हुई बैठक में ओएलएचएम की तीसरी कार्यकारी समिति ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिट की विस्तार से समीक्षा की गई। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना और मसौदा बजट को मंजूरी दे दी गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवास योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से हो ताकि पात्र परिवारों को निर्धारित अवधि के भीतर लाभ मिल सके। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में बेघर, भूमिहीन और बुजुर्गों की जरूरतों को प्राथमिकता देने का सुझाव भी दिया गया। बैठक में मिशन निदेशक, वित्तीय सलाहकार, नगर नियोजन निदेशक, माध्यमिक शिक्षा निदेशक, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी के मुख्य अभियंता तथा ऊर्जा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, महिला एवं बाल विकास विभाग और टाटा ट्रस्ट के अधिकारी मौजूद रहे।
योजना के क्रियान्वयन में किन बातों पर जोर दिया गया?
बैठक में साफ संदेश दिया गया कि योजनाएं सिर्फ घोषणा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए नियमित निगरानी जरूरी है। समयबद्ध समीक्षा का प्रावधान किया गया है ताकि देरी न हो। वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे जमीनी स्तर पर जाकर पात्र परिवारों की पहचान करें और पारदर्शी तरीके से चयन प्रक्रिया पूरी करें। इससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी और सही लोगों को फायदा मिलेगा।
इस फैसले से शहरी गरीबों को क्या फायदा होगा?
ओडिशा के शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार अभी भी झुग्गियों और अस्थायी आवासों में रहते हैं। इस योजना से 10 हजार परिवारों को पक्का मकान मिलने की उम्मीद है। बेघर और भूमिहीन लोगों को अपना पता और पहचान मिलने से सरकारी योजनाओं का लाभ लेना आसान होगा। बुजुर्गों को सुरक्षित आवास मिलने से उनकी सुरक्षा बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में और अधिक परिवारों को इस दायरे में लाया जाए। फिलहाल नौ शहरों पर ध्यान केंद्रित है और योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा होती रहेगी।
यह कदम ओडिशा सरकार की उस दिशा में प्रयास का हिस्सा है जिसमें शहरी गरीबी को कम करने और सबको आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। आगे के दिनों में जब योजना जमीन पर उतरेगी तो पात्र परिवारों को वास्तविक लाभ मिलने की संभावना है।
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