Odisha News: ओडिशा में शनिवार को लोग अपने पूर्वजों को याद करने पहुंचे। महालया का दिन पितृ पक्ष के अंत का संकेत देता है। राज्य भर में लोग नदी, तालाब और समुद्र किनारे जुटे। उन्होंने तिला तर्पण और पिंडदान की रस्म निभाई।
कई जगहों पर भीड़ इतनी थी कि देखकर लग रहा था जैसे पूरा शहर निकल आया हो। भुवनेश्वर के बिंदु सागर तालाब पर लिगराज मंदिर के पास लोग काफी संख्या में पहुंचे। पुरी में जगन्नाथ मंदिर के उत्तरी द्वार के पास नरेंद्र तालाब पर भी बड़ी भीड़ दिखी। जाजपुर में मां बिराजा मंदिर के पास बैतरणी नदी किनारे भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
Odisha News: संबलपुर के समलेश्वरी मंदिर पर क्या खास था?
संबलपुर में समलेश्वरी मंदिर पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे। यहां देवी का दर्शन करने के लिए लोग सुबह से ही जुटे। महालया के दिन देवी धबलमुखी बेश में रहती हैं। यानी सफेद वस्त्र धारण करती हैं। यह रूप गंगा माता का प्रतीक माना जाता है। साल भर देवी लाल वस्त्र में रहती हैं, लेकिन महालया को छोड़कर।
मंदिर के दरवाजे सुबह 5 बजे ही खोल दिए गए। वजह साफ थी। बड़ी भीड़ की उम्मीद थी। लोग देवी के इस विशेष रूप को देखने के लिए काफी दूर से आए थे।
महालया का क्या महत्व है?
महालया पितृ पक्ष के समापन का दिन होता है। इसी दिन से देवी पक्ष शुरू होता है। नवरात्रि का त्योहार महालया के ठीक अगले दिन से शुरू होता है। लोग इस दिन अपने पूर्वजों को याद करते हैं। पानी में तर्पण और पिंडदान की परंपरा निभाई जाती है।
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में यह रस्म अलग-अलग तरीके से मनाई गई। लेकिन सबका मकसद एक ही था। पूर्वजों को श्रद्धांजलि देना।
गवर्नर और मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने महालया पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि पवित्र महालया पर सभी को शुभकामनाएं। मां दुर्गा के आशीर्वाद से सबकी जिंदगी खुशी और समृद्धि से भरी रहे।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी शुभकामनाएं भेजीं। उन्होंने कहा कि पवित्र महालया अमावस्या पर सभी को हार्दिक बधाई। यह दिन पूर्वजों को याद करने का है। मां दुर्गा के आगमन के इस पवित्र समय में सबकी जिंदगी खुशी, शांति और समृद्धि से भरी रहे।
विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भी इस अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं।
लोगों ने कहां-कहां जुटकर तर्पण किया?
भुवनेश्वर में बिंदु सागर तालाब प्रमुख जगह रही। लिगराज मंदिर के आसपास पूरा इलाका भक्तों से भर गया। पुरी में नरेंद्र तालाब पर भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जगन्नाथ मंदिर के उत्तरी द्वार के पास यह तालाब स्थित है।
जाजपुर में बैतरणी नदी किनारे मां बिराजा मंदिर के पास भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। लोग नदी के पानी में खड़े होकर तर्पण कर रहे थे। समुद्र किनारे भी कुछ जगहों पर लोग पहुंचे। राज्य के अलग-अलग तालाबों और नदियों पर यह दृश्य देखा गया।
देवी पक्ष की शुरुआत कैसे मानी जाती है?
महालया के साथ ही देवी पक्ष शुरू हो जाता है। इसके अगले दिन से नवरात्रि का त्योहार शुरू होता है। लोग अब दुर्गा पूजा की तैयारी में जुटने लगते हैं। महालया का दिन पूर्वजों को याद करने के साथ-साथ देवी की आराधना की शुरुआत का भी संकेत देता है।
संबलपुर के समलेश्वरी मंदिर में देवी का सफेद रूप इस बात की याद दिलाता है कि यह दिन अलग है। साल के बाकी दिनों में देवी लाल वस्त्र में रहती हैं। महालया पर उनका यह रूप श्रद्धालुओं को खास लगता है।
ओडिशा में महालया का यह दिन हर साल इसी तरह मनाया जाता है। लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और देवी पक्ष की शुरुआत करते हैं। इस बार भी भुवनेश्वर, पुरी, जाजपुर और संबलपुर समेत कई जगहों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
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