Jamia Student Protest 2026: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 20 साल से नहीं हो रहे छात्र संघ चुनाव को लेकर पांच छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय में 2006 के बाद से कोई छात्र संघ चुनाव नहीं हुआ। इसके चलते छात्रों की ओर से मांग जोर पकड़ने लगी है। उनका कहना है कि लगभग दो दशक से यह मांग अधूरी पड़ी है। छात्र संघ न होने से उनकी आवाज दबाई जा रही है। प्रशासन के सामने समस्याएं उठाने के लिए कोई चुना हुआ प्रतिनिधि नहीं है। चाहे हॉस्टल, पीने का पानी, शौचालय, क्लासरूम, लाइब्रेरी और लिफ्ट जैसी बुनियादी सुविधाएं हों या पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी बड़ी समस्याएं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार छात्रों ने बुधवार को जारी बयान में ये बातें कही हैं। जामिया के प्रॉक्टर ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन तय जगह गेट नंबर 18 पर नहीं हो रहा। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों की पहचान पर सवाल उठाए और दावा किया कि वे बाहरी लोग हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि हर विभाग में सब्जेक्ट एसोसिएशन के चुनाव कराए जाते हैं। अगर छात्र संघ के चुनाव हुए तो कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है।
भूख हड़ताल की शुरुआत और छात्रों की मांग
Delhi: Students continue to protest at Jamia Millia Islamia University, demanding that student union elections be held. Some students are on a hunger strike to press for their demands. https://t.co/LEHYgfVeev
— IANS (@ians_india) October 13, 2026
पांच छात्रों ने जामिया में छात्र संघ को बहाल करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि 2006 के बाद से चुनाव नहीं हुए। इस वजह से छात्रों की समस्याएं उठाने का कोई रास्ता नहीं बचा। छात्र संघ न होने से उनकी आवाज दबाई जा रही है। प्रशासन के सामने बुनियादी मुद्दे रखने के लिए कोई चुना हुआ प्रतिनिधि नहीं है। हॉस्टल, पानी, शौचालय, क्लासरूम, लाइब्रेरी और लिफ्ट जैसी सुविधाओं के साथ पढ़ाई से जुड़ी बड़ी समस्याएं भी शामिल हैं। छात्रों का बयान बुधवार को जारी हुआ। इसमें साफ कहा गया कि दो दशक से यह मांग अधूरी है। फिलहाल भूख हड़ताल जारी है।
प्रशासन का रुख और पहचान पर सवाल
जामिया के प्रॉक्टर ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शन की जगह पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि विरोध गेट नंबर 18 पर तय जगह नहीं हो रहा। प्रदर्शन में शामिल छात्रों की पहचान पर भी सवाल किए गए। अधिकारियों ने दावा किया कि ये बाहरी लोग हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कदम को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। एक अधिकारी ने कहा कि वे हर विभाग में सब्जेक्ट एसोसिएशन के चुनाव कराते हैं। छात्र संघ के चुनाव कराने से कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब होने का खतरा है। प्रशासन का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था से काम चल रहा है।
छात्र संघ चुनाव न होने का लंबा इतिहास
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 2006 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए। लगभग 20 साल हो चुके हैं। इस लंबे अंतराल के बाद छात्रों ने फिर से मांग उठाई है। उनका कहना है कि चुने हुए प्रतिनिधि के बिना समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। बुनियादी सुविधाओं से लेकर पढ़ाई-लिखाई तक के मुद्दे सामने आते रहते हैं। छात्र संघ न होने से आवाज दबने की बात बयान में कही गई है। इस बीच भूख हड़ताल से मांग को और बल मिला है। हालांकि प्रशासन ने अभी तक चुनाव कराने का कोई संकेत नहीं दिया।
कानून व्यवस्था और सब्जेक्ट एसोसिएशन का हवाला
विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारी ने साफ कहा कि हर विभाग में सब्जेक्ट एसोसिएशन के चुनाव होते हैं। ये व्यवस्था पहले से चल रही है। अगर छात्र संघ के चुनाव कराए गए तो कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। प्रशासन का यह रुख छात्रों की मांग के सामने आया है। प्रॉक्टर ऑफिस ने प्रदर्शन की जगह और छात्रों की पहचान पर सवाल खड़े किए। गेट नंबर 18 पर तय जगह न होने की बात कही गई। बाहरी लोगों के शामिल होने का दावा भी किया गया। इस स्थिति में दोनों पक्षों के बयान सामने हैं।
वर्तमान स्थिति और आगे की संभावना
फिलहाल पांच छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मांग जामिया में छात्र संघ चुनाव कराने की है। 2006 के बाद से कोई चुनाव नहीं हुआ। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला दिया है। साथ ही सब्जेक्ट एसोसिएशन के चुनावों का जिक्र किया है। प्रॉक्टर ऑफिस ने प्रदर्शन स्थल और पहचान पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का कहना है कि बिना चुने हुए प्रतिनिधि के उनकी समस्याएं नहीं उठ पातीं। हॉस्टल, पानी, शौचालय, क्लासरूम, लाइब्रेरी और लिफ्ट जैसी सुविधाओं के साथ शैक्षणिक मुद्दे शामिल हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से चुनाव कराने का कोई आधिकारिक संकेत नहीं आया। भूख हड़ताल जारी रहने से स्थिति पर नजर बनी हुई है।
जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग लंबे समय से अधूरी है। 2006 के बाद से कोई चुनाव नहीं हुआ। पांच छात्रों की भूख हड़ताल से यह मुद्दा फिर चर्चा में आया है। छात्रों का कहना है कि चुने हुए प्रतिनिधि के बिना उनकी आवाज दबती है और बुनियादी समस्याएं नहीं उठ पातीं। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की स्थिति और सब्जेक्ट एसोसिएशन के चुनावों का हवाला दिया है। प्रॉक्टर ऑफिस ने प्रदर्शन की जगह और छात्रों की पहचान पर सवाल खड़े किए। दोनों पक्षों के बयान सामने हैं। फिलहाल भूख हड़ताल जारी है और आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है।
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Sanjana Gupta
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