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Odisha News: राज्यसभा क्रॉस वोटिंग मामले में ओडिशा हाई कोर्ट ने बीजद के 5 विधायकों को नोटिस जारी किया, सदस्यता पर सवाल

Odisha News: ओडिशा हाई कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग के मामले में बीजू जनता दल (बीजद) के पांच विधायकों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इन विधायकों को अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 11 जनवरी 2027 को होगी। नोटिस पाने वाले विधायकों में अरविंद महापात्र, सुभासिनी जेना, सनातन महाकुड़, सौविक बिस्वाल और चक्रमणि कंहार शामिल हैं।

बीजद विधायक प्रमिला मलिक ने राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस वोटिंग के आरोप में पार्टी के आठ विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष ने जून में बीजद की ओर से दायर अयोग्यता याचिका को विस्तृत आदेश के साथ खारिज कर दिया था। इसके बाद पार्टी ने अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में आठ रिट याचिकाएं दायर की थीं। गुरुवार को इनमें से पांच याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

क्रॉस वोटिंग का मामला क्या है और अध्यक्ष ने क्या फैसला किया?

राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजद के कुछ विधायकों पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगा था। प्रमिला मलिक ने आठ विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर की थी। अध्यक्ष ने जून में विस्तृत आदेश के साथ इस याचिका को खारिज कर दिया था।

पार्टी ने अध्यक्ष के इस फैसले से असहमति जताते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आठ रिट याचिकाएं दायर की गईं। इनमें से पांच पर गुरुवार को सुनवाई हुई। अदालत ने संबंधित विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

हाई कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

सुनवाई के दौरान विधानसभा अध्यक्ष की ओर से ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता प्रमिला मलिक ने रिट याचिका वापस लेकर नए सिरे से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष जाने की अनुमति मांगी थी। हालांकि अध्यक्ष की ओर से इस मांग का विरोध किया गया।

महाधिवक्ता ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत विधायकों की अयोग्यता पर फैसला करते समय विधानसभा अध्यक्ष अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी के रूप में कार्य करते हैं। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ के फैसले के अनुसार अध्यक्ष का आदेश न्यायिक प्रकृति का होता है। हाई कोर्ट इसकी वैधता की समीक्षा कर सकता है लेकिन अध्यक्ष अपने आदेश को मनमाने ढंग से वापस लेकर उसी मामले में नए सिरे से विचार नहीं कर सकते।

प्रमिला मलिक ने अपनी मांग क्यों वापस ली?

महाधिवक्ता के अनुसार अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया। इसके बाद प्रमिला मलिक ने अपनी पिछली मांग वापस लेते हुए मामले का गुण-दोष के आधार पर निर्णय कराने पर सहमति जताई। याचिकाकर्ता अपनी रिट याचिका स्वेच्छा से वापस ले सकता है लेकिन संबंधित पक्षों को सुने बिना हाई कोर्ट उसे अध्यक्ष के समक्ष नई याचिका दायर करने का निर्देश नहीं दे सकता।

अब मामला गुण-दोष पर आगे बढ़ेगा। अदालत ने पांच विधायकों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी।

दसवीं अनुसूची और अध्यक्ष की भूमिका क्या है?

संविधान की दसवीं अनुसूची दल-बदल विरोधी कानून से जुड़ी है। इसके तहत विधायकों की अयोग्यता का फैसला विधानसभा अध्यक्ष करते हैं। अध्यक्ष अर्ध-न्यायिक भूमिका में काम करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अध्यक्ष का आदेश न्यायिक प्रकृति का होता है।

हाई कोर्ट इसकी समीक्षा कर सकता है लेकिन अध्यक्ष को मनमाने ढंग से आदेश वापस लेने और दोबारा सुनवाई करने की इजाजत नहीं है। इस मामले में भी यही दलील दी गई। अदालत ने याचिकाकर्ता की नई याचिका दायर करने की मांग को स्वीकार नहीं किया और मामले को गुण-दोष पर सुनने का फैसला किया।

आगे की सुनवाई और संभावित असर क्या हो सकता है?

मामले की अगली सुनवाई 11 जनवरी 2027 को होगी। पांच विधायकों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। बाकी तीन याचिकाओं पर भी आगे सुनवाई हो सकती है। अगर हाई कोर्ट अध्यक्ष के फैसले को बरकरार रखता है तो विधायकों की सदस्यता बनी रहेगी। अगर याचिकाएं स्वीकार होती हैं तो अयोग्यता की प्रक्रिया फिर शुरू हो सकती है।

यह मामला ओडिशा की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप और अध्यक्ष के फैसले पर हाई कोर्ट की समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिलेगा।

कुल मिलाकर ओडिशा हाई कोर्ट ने राज्यसभा क्रॉस वोटिंग मामले में बीजद के पांच विधायकों को नोटिस जारी किया है। अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने मामले को गुण-दोष पर सुनने का फैसला किया है। अगली सुनवाई 11 जनवरी 2027 को होगी। विधायकों की सदस्यता पर अंतिम फैसला आगे की सुनवाई पर निर्भर करेगा।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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