West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने डायमंड हार्बर के सांसद और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की जान को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। बैरकपुर से दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर मुख्यमंत्री की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक बड़ा व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। यह आरोप ऐसे समय आया है जब राज्य में भाजपा सरकार काम कर रही है और राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है।
अर्जुन सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने दावा किया कि यह साजिश केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि जानलेवा हमले की तैयारी भी इसमें शामिल हो सकती है। उनके अनुसार, अभिषेक बनर्जी के बाहर रहने से मुख्यमंत्री की जान को खतरा है, इसलिए उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
अर्जुन सिंह ने क्या दावा किया है?
अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी के इशारे पर करीब 180 लोगों का एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप का मकसद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के हर मूवमेंट पर नजर रखना बताया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रुप के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कहां जा रहे हैं, कब निकल रहे हैं और किस रास्ते से यात्रा कर रहे हैं।
मंत्री का दावा है कि यह निगरानी महज राजनीतिक जानकारी जुटाने के लिए नहीं है। उनके अनुसार, इसका मकसद मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में खामी निकालना और किसी बड़े हमले की योजना बनाना है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। यह सब अभिषेक बनर्जी के कहने पर हो रहा है।” अर्जुन सिंह ने आगे कहा कि राज्य में डबल इंजन की सरकार है, इसलिए अभिषेक बनर्जी ज्यादा दिनों तक बाहर नहीं घूम पाएंगे और उन्हें जल्द जेल में डाल दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर अभिषेक बनर्जी बाहर रहते हैं तो मुख्यमंत्री की जान को खतरा बना रहेगा। इसलिए तुरंत कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
व्हाट्सएप ग्रुप का दावा क्या है?
अर्जुन सिंह के अनुसार, यह ग्रुप तृणमूल कांग्रेस से जुड़े लोगों का है और इसमें शामिल लोगों को अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर रखा गया है। ग्रुप का इस्तेमाल रियल टाइम में जानकारी साझा करने के लिए किया जा रहा है। मंत्री का कहना है कि मुख्यमंत्री की दैनिक गतिविधियों, कार्यक्रमों और यात्राओं की जानकारी लगातार इस ग्रुप में डाली जा रही है।
ऐसे दावे राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं। हालांकि, अभी तक किसी स्वतंत्र स्रोत या पुलिस रिपोर्ट से इस ग्रुप के अस्तित्व की पुष्टि नहीं हुई है। अर्जुन सिंह ने कोई स्क्रीनशॉट या दस्तावेजी सबूत सार्वजनिक नहीं किया है। उनका जोर इस बात पर है कि यह निगरानी सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस ने कैसे खारिज किया आरोप?
इन आरोपों को तृणमूल कांग्रेस ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। तृणमूल नेता वैश्वानर चटर्जी ने अर्जुन सिंह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बार-बार दल बदलते रहे हैं। कभी तृणमूल में रहे, कभी भाजपा में। इसलिए उनकी बातों का कोई ठोस आधार नहीं है।
चटर्जी ने कहा, “अभिषेक बनर्जी के पास ऐसा कोई फालतू काम नहीं है कि वे व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर किसी की जान लेने की कोशिश करें। यह केवल तृणमूल को बदनाम करने की एक झूठी साजिश है।” उन्होंने आरोपों को आधारहीन और राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया। तृणमूल पक्ष का कहना है कि अभिषेक बनर्जी राज्य की विपक्षी राजनीति में सक्रिय हैं और ऐसे आरोप उन्हें कमजोर करने की कोशिश हैं।
इस आरोप का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
यह आरोप ऐसे माहौल में आया है जब पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनी है और शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक तनाव कम नहीं हुआ है। पहले भी मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी की हत्या को लेकर गंभीर आरोप लगे थे। उस मामले में भी अर्जुन सिंह ने अभिषेक बनर्जी का नाम लिया था।
अर्जुन सिंह खुद पहले तृणमूल में रहे हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए। उनकी पार्टी बदलने की पृष्ठभूमि को तृणमूल पक्ष बार-बार उठाता रहा है। वहीं, भाजपा की तरफ से तृणमूल पर राज्य में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में यह नया आरोप दोनों पक्षों के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव को और तीखा बना सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल यह आरोप बयानबाजी के स्तर पर है। न तो पुलिस ने इसकी जांच शुरू करने की कोई आधिकारिक घोषणा की है, न ही अभिषेक बनर्जी की तरफ से सीधा जवाब आया है। तृणमूल ने इसे खारिज कर दिया है। अर्जुन सिंह के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे सुरक्षा संबंधी चिंता मान रहे हैं, जबकि दूसरे पक्ष इसे सत्ता पक्ष द्वारा विपक्ष को घेरने की कोशिश बता रहे हैं।
अगर आरोपों की जांच होती है तो डिजिटल सबूतों की जरूरत पड़ेगी। व्हाट्सएप ग्रुप जैसी बातों की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच जरूरी होती है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने बयानों पर अड़े हुए हैं। राज्य में राजनीतिक तनाव पहले से है। ऐसे गंभीर आरोपों से माहौल और गर्म हो सकता है।
इस मामले में सावधानी बरतना जरूरी है। आरोप गंभीर हैं, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए ठोस सबूत चाहिए। अभी तक दोनों पक्षों के बयान ही उपलब्ध हैं। आगे पुलिस या अन्य जांच एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं, यह देखना बाकी है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐसे आरोप-प्रत्यारोप नए नहीं हैं, लेकिन जब मुख्यमंत्री की सुरक्षा का मुद्दा जुड़ जाता है तो मामला ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।
अर्जुन सिंह के बयान और तृणमूल की प्रतिक्रिया से साफ है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला बोलने के मूड में हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी हो सकती है। राज्य सरकार की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है। नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं दोनों को शांति बनाए रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि ऐसे आरोपों से सड़कों पर तनाव पैदा होने की आशंका रहती है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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