Odisha Politics: ओडिशा सरकार ने उच्च शिक्षा परिसरों में छात्र संघ चुनाव आठ साल के अंतराल के बाद कराने का ऐलान किया है। सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सामने आया। चुनाव अगले 10 दिनों में पूरे करने का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चुनाव कराने की मंजूरी दी है। परिसरों पर हिंसा की आशंका को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यवस्था की बात कही गई है।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद समयरेखा बताई। कॉलेज 7 अक्टूबर 2026 को अपनी अधिसूचना जारी करेंगे। नामांकन 9 अक्टूबर को दाखिल होंगे। मतदान 15 अक्टूबर को होगा और शपथ ग्रहण 16 अक्टूबर की सुबह होगा। दशहरा छुट्टियों से पहले चुनाव पूरा करने का अंतिम निर्णय लिया गया है।
मंत्री ने कहा कि विस्तृत समयरेखा और पूरी जानकारी विभाग जल्द देगा। चुनाव 2017 से रुके हुए थे। सरकार के घोषणापत्र में इन्हें कराने का वादा था। 2024 में सरकार बनने के बाद 2025 परिसरों के मुद्दे संभालने में गया और 2026 में चुनाव की तरफ बढ़ा जा रहा है।
Odisha Politics: छात्र संघ चुनाव का कार्यक्रम क्या है?
चुनाव की रूपरेखा छोटे अंतराल में सिमटी है। 7 अक्टूबर को कॉलेज अपनी अधिसूचना निकालेंगे। 9 अक्टूबर को नामांकन दाखिल होंगे। 15 अक्टूबर को मतदान होगा और 16 अक्टूबर की सुबह शपथ ग्रहण होगा। मंत्री के अनुसार दशहरा छुट्टियों से पहले चुनाव कराने का अंतिम फैसला हो चुका है। विभाग विस्तृत समयरेखा जल्द जारी करेगा।
पूरी प्रक्रिया अगले 10 दिनों में पूरी करने की बात है। कॉलेजों को विभाग की अधिसूचना मिलेगी। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुसार फैसला कॉलेजों पर होगा। यदि माहौल अनुकूल न हो, छात्र संख्या कम हो या ऐसी ही स्थिति हो, तो पहले अपनाई गई प्रक्रिया ही अपनाई जाएगी। यानी हर परिसर में एक जैसे हालात मानकर चुनाव नहीं थोपे जा रहे। अधिसूचना आम होगी, लेकिन स्थानीय स्थिति देखकर पुरानी प्रक्रिया का रास्ता खुला रखा गया है।
आठ साल बाद चुनाव क्यों कराए जा रहे हैं?
मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने कहा कि छात्र संघ चुनाव 2017 से स्थगित थे। चुनाव घोषणापत्र में इन्हें कराने का वादा किया गया था। 2024 में सरकार बनने के बाद 2025 में परिसरों के विभिन्न मुद्दों को संबोधित किया गया। 2026 में अब छात्र संघ चुनाव की तरफ बढ़ा जा रहा है।
मंत्री ने इसे महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना था कि आज के छात्र और छात्र नेता ओडिशा के भावी नेता हैं। यह प्रक्रिया उन्हें लोकतांत्रिक जिम्मेदारी, लोकतंत्र का महत्व और संवैधानिक मूल्य समझने में मदद करेगी, ताकि आगे नेतृत्व की भूमिका संभाल सकें। चुनाव को इसलिए केवल पद का मुकाबला नहीं, जिम्मेदारी की तैयारी के रूप में रखा गया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चुनाव कराने की मंजूरी दी। संभावित हिंसा को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत भी मानी गई है। यानी फैसला राजनीतिक वादे और परिसर की सुरक्षा दोनों को साथ लेकर आया है।
लिंगदोह समिति और सुप्रीम कोर्ट के नियम कैसे लागू होंगे?
शांतिपूर्ण और व्यवस्थित चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के 2005 के फैसले तथा जे एम लिंगदोह समिति की सिफारिशें पहले की तरह लागू रहेंगी। मंत्री ने कहा कि ये सिफारिशें पहले भी अपनाई जाती रही हैं और अब भी जारी रहेंगी।
सभी कॉलेजों को विभाग की अधिसूचना मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुसार निर्णय कॉलेजों का होगा। माहौल अनुकूल न होने, छात्र संख्या कम होने या ऐसी ही परिस्थितियों में पहले वाली प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसका अर्थ है कि जहां चुनाव संभव नहीं, वहां पुराना विकल्प खुला है। विभाग नोटिफिकेशन भेजेगा, लेकिन हर कॉलेज अपनी स्थिति के आधार पर दिशा निर्देशों के भीतर फैसला करेगा।
इतने कम समय में चुनाव क्यों रखे गए हैं?
छोटी समयसीमा पर सफाई देते हुए मंत्री ने कहा कि जब चुनाव बहुत पहले घोषित कर दिए जाते हैं, तो कानून व्यवस्था के सवाल खड़े होने लगते हैं। कॉलेज चुनाव 10 दिनों में पूरे करने का फैसला है, इसलिए उनका मानना है कि परिसर हिंसा न्यूनतम रहेगी।
यह तर्क कार्यक्रम की जल्दबाजी की वजह बताता है। लंबी प्रचार अवधि को तनाव बढ़ाने वाला माना गया है। नामांकन, मतदान और शपथ को अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में समेटना इसी सोच का हिस्सा है। साथ ही मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से जिम्मेदारी से पेश आने की अपील की, ताकि कॉलेज चुनाव सुचारु रहें।
सुरक्षा की चिंता अलग से दर्ज है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के साथ संभावित हिंसा को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यवस्था की बात कही गई है। कम समय और सुरक्षा दोनों को मिलकर हिंसा रोकने का रास्ता बताया गया है। यह मंत्री का आकलन है, कोई आंकड़ा नहीं कि हिंसा कितनी घटेगी।
कॉलेजों और छात्रों के लिए अब अगला कदम क्या है?
कॉलेज 7 अक्टूबर को अपनी अधिसूचना जारी करेंगे। छात्र 9 अक्टूबर को नामांकन दाखिल कर सकेंगे। मतदान 15 अक्टूबर और शपथ 16 अक्टूबर की सुबह है। विभाग की विस्तृत जानकारी जल्द आने की बात मंत्री ने कही है।
जिन परिसरों में माहौल ठीक नहीं या छात्र संख्या कम है, वहां पहले वाली प्रक्रिया लागू हो सकती है। बाकी जगहों पर सुप्रीम कोर्ट के 2005 के फैसले और लिंगदोह समिति की सिफारिशें आधार रहेंगी। राजनीतिक दलों से शांतिपूर्ण मतदान में सहयोग की अपील हो चुकी है।
ओडिशा के उच्च शिक्षा परिसरों के लिए यह 2017 के बाद पहला छात्र संघ चुनाव होगा, यदि कॉलेज अधिसूचना और स्थानीय स्थिति के आधार पर इसे कराते हैं। दशहरा से पहले प्रक्रिया पूरी करने का निर्णय अंतिम बताया गया है। असली शुरुआत 7 अक्टूबर की कॉलेज अधिसूचना से होगी।
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