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Parenting Tips: बच्चे के दिल की बात जानने के 7 सवाल, पेरेंटिंग कोच रिद्धि देवराह ने बताए

6 अक्टूबर 2026
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Parenting Tips: स्कूल से लौटकर बच्चा बैग कोने में रख दे और पूछने पर कह दे कि कुछ नहीं हुआ, तो कई घरों में इसे सामान्य मान लिया जाता है। सात साल के रोहन के साथ भी ऐसा ही हुआ। खेलते समय हाथ हल्का चोटिल हो गया था, लेकिन उसने मां को सच नहीं बताया। डर यह था कि ध्यान से न खेलने पर डांट पड़ेगी।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में कुछ साल पहले 14 साल के एक लड़के की रेबीज से दर्दनाक मौत हो गई थी। कुत्ते ने काट लिया था, पर डांट के भय से बात माता पिता तक नहीं पहुंची। समय पर इलाज नहीं मिला और जान चली गई। पेरेंटिंग कोच रिद्धि देवराह का कहना है कि बच्चे के दिल की बात जानने के सवाल ऐसे माहौल में काम आते हैं, जहां बच्चा बिना झिझक परेशानी बता सके।

बच्चे घर पर बात क्यों छिपा लेते हैं?

बच्चे अक्सर इसलिए चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि परेशानी बताने का नतीजा समझ से ज्यादा फटकार होगा। रोहन की चोट छोटी थी, फिर भी उसने बात अपने पास रख ली। गाजियाबाद वाली घटना इससे कहीं गंभीर थी। काटने के बाद भी बच्चा माता पिता के पास नहीं गया, क्योंकि डांट का डर इलाज की जरूरत से बड़ा हो गया।

जब हर छोटी बात पर तुरंत फैसला सुना दिया जाता है, तो बच्चा अगली बार सच छिपाना सीखता है। रिद्धि देवराह इसी वजह से ऐसे सवाल सुझाती हैं जो जांच की तरह न लगें। मकसद यह महसूस कराना है कि बात सुनी जाएगी, उसी वक्त सुधारा नहीं जाएगा। कई डर और जरूरतें बच्चे खुद शब्दों में नहीं रख पाते। सुरक्षित माहौल हो तो चोट, स्कूल का तनाव या कोई और चिंता समय पर सामने आ सकती है।

पेरेंटिंग कोच ने कौन से 7 सवाल बताए हैं?

रिद्धि देवराह ने सात सवाल बताए हैं। पहला, तुम खुद को सबसे ज्यादा बहादुर कब मानते हो। दूसरा, जब तुम परेशान होते हो तो किससे बात करते हो। तीसरा, ऐसी कौन सी बात है जो तुम चाहते हो कि बड़े लोग तुम्हारे बारे में समझें। चौथा, तुम्हें सबसे ज्यादा प्यार कब महसूस होता है।

पांचवां सवाल है, ऐसी कौन सी बात है जो तुम्हें परेशान करती है लेकिन तुमने नहीं बताई। छठा, ऐसी कौन सी बात है जिससे तुम खुद पर गर्व महसूस करते हो। सातवां, अगर तुम घर का एक नियम बदल सकते तो कौन सा नियम बदलते। इनका मकसद भावनाओं, डर और चिंताओं को समझना तथा बच्चे के साथ बेहतर बॉन्ड बनाना है।

हर सवाल बच्चे के मन के बारे में क्या बताता है?

पहले सवाल से बच्चा सोचता है कि किन हालात में उसे खुद पर भरोसा होता है। माता पिता उसके कॉन्फिडेंस और ताकत को समझ सकते हैं। दूसरा सवाल बताता है कि दुखी होने पर वह किसके पास जाता है। यह इमोशनल सेफ्टी की तस्वीर देता है और यह भी कि वह किसके साथ सहज है।

तीसरा सवाल उन जरूरतों के लिए है जिन्हें बच्चे अक्सर जाहिर नहीं कर पाते। चौथे से पता चल सकता है कि उसे अपनापन वास्तव में कब महसूस होता है। माता पिता जिस तरह प्यार देते हैं, जरूरी नहीं कि बच्चा उसी तरह उसे महसूस करे। पांचवां सवाल छिपी चिंता और डर सामने लाने का मौका देता है। छठा उपलब्धियों और खूबियों पर सोचने का अवसर है। सातवें के जवाब से यह समझ में आ सकता है कि घर की कौन सी बात भारी लगती है या वह किस बदलाव की इच्छा रखता है।

सिर्फ सवाल पूछना काफी क्यों नहीं है?

रिद्धि देवराह कहती हैं कि सवाल पूछना पूरा काम नहीं है। जवाब सुनना उतना ही जरूरी है। बच्चा कुछ बताए और उसी वक्त डांट, तुलना या तैयार नसीहत आ जाए, तो अगली बार वह फिर चुप हो सकता है। रोहन ने चोट इसलिए छिपाई क्योंकि डांट का अंदाजा था। गाजियाबाद में कुत्ते के काटने की बात भी इसी डर से नहीं पहुंची।

सुनने का मतलब हर बात मान लेना नहीं है। पहले बच्चे को बात पूरी करने दी जाए। कोच के मुताबिक तुरंत जज न करने और राय न थोपने से भरोसा बनता है। ये सवाल एक बार की चेकलिस्ट नहीं हैं। असर तब पड़ता है जब बातचीत नियमित हो और पिछली बार बच्चे को सुना गया हो।

जवाब सुनते समय माता पिता को क्या ध्यान रखना चाहिए?

जवाब के दौरान रुकावट न डालना सबसे जरूरी है। बहादुरी, प्यार, गर्व या नियम बदलने की बात बीच में सुधारने की जल्दी न करें। ध्यान से सुनने पर बच्चे को लगता है कि भावनाएं शेयर करना सुरक्षित है। अगर वह कहे कि परेशान होने पर किसी और से बात करता है, तो इसे शिकायत न मानें। यह जानकारी है कि उसे सहजता कहां मिलती है।

पांचवें सवाल पर खास सावधानी चाहिए। जो बात अभी तक नहीं बताई गई, वह डर हो सकता है। सुनकर तुरंत दोष न दें। गाजियाबाद वाली घटना याद दिलाती है कि डांट का भय कितना महंगा पड़ सकता है। जब माता पिता बिना डांटे सुनते हैं, तब बच्चे के दिल की बात जानने के सवाल भरोसे का हिस्सा बन जाते हैं और चोट या चिंता समय पर घर तक पहुंचती है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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कवरेज: Netsha Singh, News Media Kiran

Netsha Singh

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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