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PhD Degree Reform: पीएचडी डिग्री में बड़े बदलाव की तैयारी, पीएम मोदी ने मंत्रालयों को दिए निर्देश, रिसर्च सिस्टम को नया रूप

PhD Degree Reform: पीएचडी डिग्री के चयन प्रक्रिया में बड़े बदलाव आने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सभी मंत्रालयों और केंद्रीय विभागों के सचिवों से बात की। उन्होंने पीएचडी गाइड चुनने के तरीके और छात्रों को मदद देने के नियमों की फिर से जांच करने को कहा है। कैबिनेट सचिव ने सभी सचिवों को पत्र लिखकर यह निर्देश दिए हैं। इसका मकसद पीएचडी को देश की जरूरतों और नई तकनीक से जोड़ना है। रिसर्च के विषय ऐसे हों जो देश के भविष्य के लिए उपयोगी हों। यह कदम भारत को वैश्विक रिसर्च में आगे ले जाएगा। पीएम मोदी की यह पहल शिक्षा और रोजगार को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

पीएचडी चयन प्रक्रिया की कमियों को दूर करने का प्लान

पीएम मोदी ने सचिवों के साथ बैठक में पीएचडी सिस्टम पर चर्चा की। एक सचिव ने कहा कि मौजूदा तरीके में कई कमियां हैं। गाइड चुनने के मानक साफ नहीं हैं। छात्रों को सही दिशा नहीं मिल पाती। इसलिए अब तय मानकों पर गाइड चुने जाएंगे। रिसर्च के टॉपिक देश की उभरती जरूरतों से जुड़ेंगे। जैसे कि नई तकनीक, इनोवेशन और समस्या हल करने वाले आइडिया। अमेरिका जैसे देशों से सीख लेते हुए क्वालिटेटिव, क्वांटिटेटिव और मिक्स्ड मेथड अपनाए जाएंगे। एक अधिकारी ने बताया, डॉक्टरेट डिग्री देने से पहले टीचिंग की जरूरतें पूरी करना और कॉम्पिटिटिव ग्रांट हासिल करना जरूरी होगा। यह बदलाव पीएचडी को ज्यादा प्रभावी बनाएंगे।

संयुक्त रिसर्च और आईटीआई कोर्स पर भी फोकस

पीएचडी में अब संयुक्त प्रोजेक्ट सिस्टम लाया जाएगा। कई संस्थानों के छात्र और गाइड मिलकर रिसर्च करेंगे। इससे नेटवर्क प्रोजेक्ट बनेगा। डिग्री मिलने से पहले छात्रों को पढ़ाने का अनुभव और ग्रांट लेना अनिवार्य होगा। एक अधिकारी ने कहा, जो देश मिलकर रिसर्च को बढ़ावा देते हैं, वे हमेशा आगे रहते हैं। उनके पास मजबूत इकोसिस्टम होता है। वे बड़े पुरस्कार जीतते हैं।” इसके अलावा आईटीआई जैसे कोर्स भी जांच के दायरे में हैं। देखा जाएगा कि ये कोर्स नौकरी दिलाने में कितने मददगार हैं। तकनीक बदल रही है, इसलिए कोर्स को इंडस्ट्री से जोड़ा जाएगा। मंत्रालयों को जल्द रिपोर्ट देनी होगी।

मंत्रालयों पर असर, शिक्षा को रोजगार से जोड़ना

यह निर्देश सभी मंत्रालयों पर लागू होंगे। केंद्रीय विभागों को पीएचडी प्रक्रिया की पूरी समीक्षा करनी है। रिपोर्ट भेजनी होगी। इससे शिक्षा प्रणाली मजबूत बनेगी। छात्रों को ऐसी स्किल मिलेंगी जो नौकरी में काम आएं। पीएम मोदी का यह फैसला युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत रिसर्च में लीडर बनेगा। बदलाव से पीएचडी ज्यादा प्रैक्टिकल और उपयोगी होंगी। देश की प्रगति के लिए यह जरूरी है। शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी भी इसमें शामिल होंगे। जल्द ही नए नियम बन सकते हैं। युवा अब उत्साहित हैं कि उनकी डिग्री असली काम की होगी।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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