PM Modi: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अब युद्ध के बाद के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सत्ता संभालने वाली नेता बन गई हैं। शुक्रवार को उन्होंने सिल्वियो बर्लुस्कोनी के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक्स पर बधाई दी और भारत-इटली दोस्ती का जिक्र किया। जून 2026 में खुद मोदी ने भी भारत में नेहरू का लगातार निर्वाचित कार्यकाल का रिकॉर्ड तोड़ा था। दोनों नेताओं की यह समानता अब चर्चा में है। आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
PM Modi: पीएम मोदी का बधाई संदेश और दोस्ती का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि इटली में युद्ध बाद के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर मेरी मित्र प्रधानमंत्री मेलोनी को बधाई। यह उपलब्धि उनके नेतृत्व में इटली की जनता के भरोसे और विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि उनकी दोस्ती ने भारत-इटली स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। मैं हमारे देशों के लोगों के लिए समृद्ध भविष्य बनाने के लिए करीबी सहयोग जारी रखने को उत्सुक हूं। आने वाले वर्षों में उनकी निरंतर सफलता की शुभकामनाएं। मोदी ने मेलोनी को टैग भी किया।
देखने पर लगता है कि दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध काफी अच्छे हैं। मई 2026 में मोदी की इटली यात्रा के दौरान दोनों ने कोलोसियम घूमा था और मेलोडी टॉफी का उपहार भी चर्चा में रहा था।
मेलोनी का सफर और इटली की अस्थिर राजनीति
इटली में 1946 के बाद से करीब 68 सरकारें आईं। औसत कार्यकाल 14-18 महीने का रहा। गठबंधन टूटते रहे, विश्वास मत गिरते रहे। मेलोनी की सरकार इस चक्र को तोड़ती दिख रही है। वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी की अगुवाई में राइट विंग गठबंधन चला रही हैं। लेगा और फोर्जा इटालिया साथ हैं।
मामला कुछ इस तरह से है कि उन्होंने सत्ता में आने के बाद अपनी पुरानी तेज छवि को कुछ नरम किया। आप्रवासन पर सख्त रुख रखा, आर्थिक मामलों में रूढ़िवादी नीति अपनाई। जानकार बताते हैं कि स्थिरता ही उनका बड़ा संदेश बन गया है। बारी में शुक्रवार को पार्टी की बड़ी रैली भी हुई, जहां इस रिकॉर्ड का जश्न मनाया गया।
जून में मोदी ने भी तोड़ा था नेहरू का रिकॉर्ड
कुछ महीने पहले भारत में भी ऐसा ही दृश्य देखा गया था। जून 2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के लगातार निर्वाचित कार्यकाल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नेहरू 1952 से 1964 तक 4398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे। मोदी 10 जून को 4399 दिन पूरे कर सबसे लंबे समय तक लगातार चुने गए प्रधानमंत्री बन गए। तीन बार लगातार लोकसभा चुनाव जीतने वाले वे नेहरू के बाद दूसरे नेता हैं।
हालांकि दोनों रिकॉर्ड अलग-अलग हैं। मेलोनी का एक ही सरकार का लगातार कार्यकाल है। मोदी का निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार कार्यकाल। कार्यकाल की लंबाई में भी बड़ा अंतर है। फिर भी दोनों घटनाएं एक ही साल में हुईं, इसलिए तुलना स्वाभाविक लगती है।
भारत-इटली रिश्ते और साझेदारी का नया अध्याय
मेलोनी और मोदी की दोस्ती सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रह गई। मई 2026 की रोम यात्रा में दोनों देशों ने संबंधों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया। व्यापार, रक्षा, नवाचार, मैन्युफैक्चरिंग और समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात हुई। दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को 2029 तक 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य रख रहे हैं। आईएमईसी जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है।
मेलोनी ने उस समय कहा था कि भारत-इटली रिश्ते निर्णायक चरण में पहुंच गए हैं। मोदी ने सभ्यताओं के मिलन की बात कही। रोम और काशी दोनों शाश्वत शहर हैं, यह तुलना भी याद रह गई।
PM Modi: स्थिरता का संदेश और आगे की चुनौतियां
इटली जैसे देश में इतने लंबे समय तक एक सरकार टिकना अपने आप में उपलब्धि है। मेलोनी इसे राजनीतिक संदेश के रूप में पेश कर रही हैं। वे प्रीमिएराटो जैसे संवैधानिक सुधार और चुनावी कानून में बदलाव भी ला रही हैं ताकि भविष्य में स्थिरता बनी रहे। 2027 के चुनाव तक पूरा कार्यकाल पूरा करने का लक्ष्य है। अगर ऐसा हुआ तो और एक रिकॉर्ड बनेगा।
भारत में भी मोदी सरकार लंबे समय से सत्ता में है। दोनों देशों के नेता अपने-अपने यहां स्थिरता का दावा करते हैं। आम आदमी के लिए इसका मतलब बेहतर नीतियां, व्यापार बढ़ना और रोजगार के मौके हो सकते हैं। भारत-इटली सहयोग बढ़ने से भारतीय कंपनियों को यूरोप में अवसर मिल सकते हैं।
एक अप्रत्याशित बात यह भी है कि बर्लुस्कोनी कुल मिलाकर सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे, अलग-अलग कार्यकाल जोड़कर। मेलोनी का रिकॉर्ड सिर्फ लगातार एक सरकार का है। यह फर्क कई लोग भूल जाते हैं।
दोनों नेताओं की यह उपलब्धि दिखाती है कि लोकतंत्र में जनता का भरोसा कितना मायने रखता है। मेलोनी पर बधाई देते हुए मोदी ने ठीक यही बात कही। अब सबकी नजर इस पर है कि यह स्थिरता कितनी देर चलती है और दोनों देशों के रिश्ते और कितने गहरे होते हैं। मामले की आगे की जानकारी आती रहेगी।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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