एक परिवार से केवल एक सदस्य रजिस्ट्रेशन और लाभ ले सकता है। परिवार में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे गिने जाते हैं। सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार पात्र नहीं हैं। पिछले पांच वर्षों में केंद्र या राज्य की समान क्रेडिट योजना से लोन न लिया हो, यह भी शर्त है। चुकाए जा चुके मुद्रा और स्वनिधि लोन पर छूट लागू हो सकती है। आवेदन कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए होता है और आधार से बायोमेट्रिक पुष्टि जरूरी है। सिडबी पोर्टल पर बैंक को फाइल भेजने से पहले सरकारी एजेंसियां शर्तों की जांच करती हैं।
यह लोन किन लोगों के लिए है और कौन आवेदन नहीं कर सकता?
योजना का दायरा उन कारीगरों तक है जो हाथों और औजारों से उत्पादन या मरम्मत करते हैं और पीढ़ीगत हुनर पर निर्भर हैं। बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, मूर्तिकार, नाई, मालाकार, राजमिस्त्री जैसी पारंपरिक श्रेणियां आमतौर पर इसी ढांचे में आती हैं, बशर्ते गतिविधि अधिसूचित सूची में हो। आवेदक असंगठित क्षेत्र में स्वरोजगार कर रहा हो। रजिस्ट्रेशन के दिन उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। लोन किसी भी निजी खर्च के लिए नहीं, केवल योजना में तय काम के लिए है। सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति और उसका परिवार बाहर है। एक घर से एक ही सदस्य लाभ ले सकता है, ताकि सहायता ज्यादा परिवारों तक पहुंचे। पिछले पांच साल में समान सरकारी क्रेडिट स्कीम का लाभ लिया हो तो नया आवेदन रुक सकता है। अपवाद केवल उन मुद्रा या स्वनिधि ऋणों पर है जो पूरी तरह चुका दिए गए हों। ये शर्तें आवेदक के स्वयं के दावे पर नहीं, पोर्टल और एजेंसी की जांच पर टिकती हैं।
तीन लाख रुपये दो किस्तों में कैसे मिलते हैं?
कुल सीमा तीन लाख रुपये है, लेकिन रकम एक साथ नहीं मिलती। पहली किस्त एक लाख रुपये तक है। इसके लिए स्किल वेरिफिकेशन और पांच दिन की बेसिक स्किल ट्रेनिंग पूरी करनी होती है। सत्यापन के बाद कारीगर को डिजिटल आईडी, पीएम विश्वकर्मा डिजिटल सर्टिफिकेट और आईडी कार्ड दिया जाता है। पहली किस्त की अवधि 18 महीने तक है। पहली किस्त का उपयोग और प्रशिक्षण के बाद पात्र लाभार्थी दूसरे चरण में दो लाख रुपये तक का अतिरिक्त लोन मांग सकता है। दूसरी किस्त की अवधि 30 महीने तक है। दोनों चरणों में कोलेटरल नहीं मांगा जाता। 5 प्रतिशत की दर सब्सिडी के बाद की प्रभावी दर है, यानी बैंक की सामान्य दर पर मंत्रालय ब्याज का अंतर वहन करता है। खाता स्टैंडर्ड श्रेणी में रहना इस रियायत की शर्त है। किस्त समय पर न चुकाने पर सब्सिडी और आगे की सहायता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
ब्याज 5 प्रतिशत कैसे रहता है और गारंटी क्यों नहीं लगती?
कार्ड पर लिखी दर और कारीगर द्वारा चुकाई जाने वाली दर में फर्क है। बैंक सामान्य ब्याज लगाता है और केंद्र की ब्याज सब्सिडी के बाद लाभार्थी पर भार 5 प्रतिशत रह जाता है। यह छूट स्टैंडर्ड खाते पर लागू होती है। नॉन-परफॉर्मिंग अकाउंट पर रियायत नहीं मिलती। संपत्ति गिरवी न रखने का मतलब है कि छोटे कारीगर, जिनके पास दुकान या जमीन के कागज नहीं हैं, वे भी क्रेडिट के दायरे में आ सकते हैं। जोखिम बैंक और योजना के गारंटी ढांचे पर रहता है, आवेदक की निजी संपत्ति पर नहीं। इसलिए वेरिफिकेशन सख्त रखा गया है। फर्जी श्रेणी या दोहरा लाभ रोकने के लिए आधार बायोमेट्रिक और परिवार की एक-व्यक्ति सीमा लगाई गई है। लोन की रकम सीधे काम से जुड़ी होनी चाहिए। उपकरण, कच्चा माल या कार्यस्थल सुधार जैसी मदें आमतौर पर स्वीकार्य होती हैं, जबकि निजी उपभोग नहीं।
रजिस्ट्रेशन कहां और किस प्रक्रिया से होता है?
कारीगर खुद पोर्टल पर नहीं चढ़ता। कॉमन सर्विस सेंटर का एजेंट रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर आवेदन भरता है। सरकार ने प्रक्रिया ऐसे तय की है कि हर विश्वकर्मा का पंजीकरण आधार के बायोमेट्रिक प्रमाणन से हो। इससे एक व्यक्ति के कई नाम या गलत उम्र की आशंका घटती है। आवेदन के बाद सरकारी एजेंसी सिडबी पोर्टल के रास्ते बैंक को फाइल भेजने से पहले पात्रता जांचती है। उम्र, परिवार में एक सदस्य, पुरानी क्रेडिट स्कीम, सरकारी नौकरी और गतिविधि की श्रेणी यही जांच में देखी जाती है। स्किल वेरिफिकेशन और पांच दिन का प्रशिक्षण पहली किस्त से पहले अनिवार्य है। प्रशिक्षण पूरा होने पर डिजिटल आईडी और प्रमाणपत्र जारी होते हैं। ये दस्तावेज पहचान के साथ योजना के लाभ का आधार भी बनते हैं। सीएससी पर आवेदन का मतलब स्वीकृति नहीं है। बैंक और नोडल एजेंसी के सत्यापन के बाद ही किस्त जारी होती है।
आवेदन से पहले कौन सी बातें ध्यान में रखें?
आवेदक को अपनी गतिविधि अधिसूचित सूची से मिलानी चाहिए। परिवार में कोई और सदस्य पहले रजिस्टर न हो, यह पक्का करें। पिछले पांच वर्षों का मुद्रा या स्वनिधि रिकॉर्ड साफ रखें। यदि पुराना लोन बकाया है तो नई फाइल रुक सकती है। आधार में नाम, उम्र और पता काम के पते से मेल खाने चाहिए, क्योंकि बायोमेट्रिक पुष्टि अनिवार्य है। पहली किस्त से पहले पांच दिन का प्रशिक्षण छोड़ने पर एक लाख की सहायता नहीं मिलेगी। 18 और 30 महीने की अवधि के अंदर किस्त चुकानी होगी, तभी 5 प्रतिशत की प्रभावी दर बनी रहेगी। सरकारी कर्मचारी या उसका आश्रित फॉर्म भरवाए तो बाद में लाभ रद्द हो सकता है। योजना बिजनेस शुरू करने का प्रोत्साहन है, अनुदान नहीं। जो कारीगर उपकरण और कच्चे माल की जरूरत बताकर समय पर पुनर्भुगतान की योजना बना लेते हैं, उन्हें दोनों चरणों का लाभ मिलने की संभावना अधिक रहती है। आंकड़े और शर्तें आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार बदल सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले सीएससी या योजना पोर्टल पर ताजा नियम देखना उचित है।
यह विवरण केंद्र की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की सार्वजनिक शर्तों पर आधारित है। ब्याज सब्सिडी, किस्त सीमा और पात्रता अंतिम स्वीकृति के समय बैंक तथा नोडल एजेंसी के सत्यापन पर निर्भर करेगी।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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