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Ravi Nair Arrest: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने पत्रकार रवि नायर की गिरफ्तारी पर जताई चिंता, गुजरात हाईकोर्ट ने अंतरिम रिहाई की मांग की खारिज

24 सितंबर 2026
Ravi Nair Arrest
Ravi Nair Arrest

Ravi Nair Arrest: स्वतंत्र पत्रकार रवि नायर की गुजरात में जारी हिरासत को लेकर देशभर के मीडिया संगठनों में गहरी चिंता व्याप्त है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इस मामले में स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए गुजरात प्रशासन से नायर को रिहा करने की अपील की है। नायर को 17 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया था, जब गांधीनगर सत्र न्यायालय ने व्यक्तिगत पेशी से छूट की उनकी अर्जी खारिज कर दी और उसी दिन गैर-जमानती वारंट के आधार पर उन्हें हिरासत में लेने का आदेश जारी कर दिया। इसके बाद 23 सितंबर को गुजरात उच्च न्यायालय ने भी उनकी अंतरिम रिहाई की मांग को खारिज करते हुए वारंट की वैधता पर फैसला 30 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया। यह पूरा मामला अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ओर से दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत से जुड़ा है, जिसे लेकर अब पत्रकारिता जगत में व्यापक बहस छिड़ गई है।

17 सितंबर को हुई थी रवि नायर की गिरफ्तारी

गांधीनगर की एक अदालत ने रवि नायर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करते हुए 17 सितंबर 2026 को उन्हें हिरासत में लेने का आदेश दिया था। दरअसल 3 सितंबर की सुनवाई में नायर स्वास्थ्य कारणों और केरल से यात्रा की दिक्कतों का हवाला देते हुए व्यक्तिगत पेशी से छूट चाहते थे, लेकिन अदालत ने उनकी यह अर्जी खारिज कर गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया था। जब 17 सितंबर को नायर न्यायालय पहुंचे और वारंट रद्द कराने की अर्जी दी, तो उसे भी खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल नायर अहमदाबाद सेंट्रल जेल में बंद हैं।

गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज की अंतरिम रिहाई की अर्जी

रवि नायर ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन 23 सितंबर को न्यायमूर्ति एम.के. ठक्कर की पीठ ने उनकी अंतरिम रिहाई की मांग को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि मामला पूरी तरह सुन लिया गया है और आदेश के लिए सुरक्षित है, इसलिए अंतरिम राहत की कोई जरूरत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वारंट निष्पादित हो जाने के बाद उसे उसी रूप में चुनौती देना उचित नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने वारंट की वैधता से जुड़े इस मामले पर अपना विस्तृत आदेश 30 सितंबर तक सुरक्षित रखा है।

अदानी एंटरप्राइजेज की शिकायत से जुड़ा है पूरा विवाद

यह पूरा मामला अदानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ओर से दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत से जुड़ा हुआ है। यह शिकायत अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच रवि नायर के सोशल मीडिया पोस्ट और लेखों पर आधारित है। फरवरी 2026 में मांसा के मजिस्ट्रेट न्यायालय ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास के साथ 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि अपील लंबित रहने तक उनकी सजा निलंबित कर उन्हें जमानत दी गई थी, बशर्ते वे हर सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।

अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें आईं सामने

गुजरात हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदानी पक्ष की ओर से रवि नायर के आचरण का हवाला दिया गया। वहीं नायर के अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि अपील लंबित होने के बावजूद अपने मुवक्किल को एक दिन भी जेल में रखना पूरी तरह अनुचित है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए मामले पर अपना पूरा फैसला अगली सुनवाई तक के लिए सुरक्षित रख लिया।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने की रिहाई की मांग

Ravi Nair Arrest
Ravi Nair Arrest

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इस पूरे प्रकरण पर गंभीर चिंता जताते हुए गुजरात के अधिकारियों से अपील की है कि अदालतों का अंतिम फैसला आने तक रवि नायर को रिहा किया जाए। संगठन ने यह भी कहा कि आपराधिक मानहानि कानून का इस्तेमाल पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय पहले ही आपराधिक मानहानि को अपराधमुक्त करने पर विचार करने की बात कह चुका है, और इस तरह के मामलों का शक्तिशाली कारोबारी समूहों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर ठंडा असर पड़ सकता है।

अन्य मीडिया संगठनों ने भी उठाए सवाल

रवि नायर की हिरासत को लेकर सिर्फ प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ही नहीं, बल्कि डिजिपब न्यूज इंडिया फाउंडेशन, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों ने भी इस मामले पर सवाल उठाए हैं। इन संगठनों का कहना है कि अपील का अंतिम फैसला आने से पहले किसी पत्रकार को जेल में रखा जाना गंभीर चिंता का विषय है। बताया गया है कि नायर के जिन पोस्ट को आधार बनाया गया, उनमें से कई सार्वजनिक रिपोर्टों और समाचार लेखों के लिंक थे, जिनमें हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट के निजीकरण के विरोध जैसे मुद्दे शामिल थे, हालांकि ट्रायल कोर्ट ने इन्हें घोषणात्मक और आरोपात्मक माना था।

कौन हैं रवि नायर और क्या है उनका काम

रवि नायर स्वतंत्र पत्रकार हैं और अदानी वॉच समेत विभिन्न प्लेटफॉर्म पर कॉरपोरेट जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर लगातार लिखते रहे हैं। उनका यह मामला रणनीतिक मुकदमों यानी Slapp की चर्चा को एक बार फिर सामने लाता है, जिनमें अक्सर शक्तिशाली पक्ष आलोचना को दबाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेते हैं। भारत में आपराधिक मानहानि भारतीय दंड संहिता की धारा 499-500 के तहत आती है, जिसमें दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में नागरिक मुकदमा ही पर्याप्त हो सकता है।

पत्रकारिता संगठनों की चिंता और अदानी समूह का पक्ष

पत्रकारिता संगठनों का साफ तर्क है कि इस तरह के मामलों से स्वतंत्र रिपोर्टिंग सीधे तौर पर प्रभावित होती है और पत्रकारों में डर का माहौल बनता है। वहीं दूसरी ओर अदानी समूह का पक्ष है कि रवि नायर के सोशल मीडिया पोस्ट कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के इरादे से लिखे गए थे। अब यह न्यायालय पर निर्भर करता है कि वह दोनों पक्षों के तर्कों को सुनकर किस तरह संतुलित फैसला देता है। सत्र न्यायालय में नायर की नियमित जमानत से जुड़ी अर्जी भी अभी लंबित बताई जा रही है।

गुजरात उच्च न्यायालय की ओर से वारंट की वैधता को लेकर विस्तृत आदेश 30 सितंबर को आने की उम्मीद है। इस फैसले पर न सिर्फ रवि नायर बल्कि पूरे पत्रकारिता जगत की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह फैसला आगे इस तरह के मामलों में एक नजीर बन सकता है। तब तक नायर को अहमदाबाद सेंट्रल जेल में ही रहना होगा, और मीडिया संगठन इस पूरे प्रकरण पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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