Rejinagar Bypoll Result: पश्चिम बंगाल के उपचुनाव नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को जश्न का मौका दे दिया है। रेजिनगर उपचुनाव में BJP उम्मीदवार शंखारभ सरकार ने 75 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। यह सीट इसलिए चर्चा में है, क्योंकि यहां करीब 70 फीसदी मतदाता मुस्लिम हैं। नंदीग्राम सीट पर भी भाजपा को जीत मिली है।
नतीजों के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि बंगाली मुसलमान अब भाजपा के समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को रेजिनगर में 60 प्रतिशत और नंदीग्राम में 80 प्रतिशत मुस्लिम वोट मिले। हालांकि ये आंकड़े मुख्यमंत्री के दावे हैं और उपलब्ध जानकारी में इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक इस जीत के पीछे विकास के मुद्दे और हुमायूं कबीर के घटते प्रभाव को वजह मान रहे हैं।
Rejinagar Bypoll Result: हुमायूं कबीर की सीट पर क्यों हुआ उपचुनाव
रेजिनगर में उपचुनाव की नौबत इसलिए आई, क्योंकि कुछ ही महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में यहां से आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर जीते थे। कबीर ने रेजिनगर और नउदा, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की। बाद में उन्होंने रेजिनगर सीट से इस्तीफा दे दिया।
हुमायूं कबीर बंगाल के बड़े मुस्लिम नेताओं में गिने जाते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा कर राज्य की सियासत में हलचल मचा दी थी। उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा।
75 हजार वोटों से जीते शंखारभ सरकार
उपचुनाव के नतीजों में भाजपा उम्मीदवार शंखारभ सरकार ने 75 हजार वोटों से जीत हासिल की। मतदाताओं की धार्मिक बनावट को देखते हुए पहले इस सीट पर भाजपा की जीत की संभावना पर सवाल उठ रहे थे। नतीजों ने यह धारणा पलट दी।
इस जीत के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या बंगाल के मुस्लिम मतदाता भी अब शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा जता रहे हैं। इस सवाल का ठोस जवाब उपलब्ध जानकारी में नहीं है। फिर भी नतीजे ने राज्य की राजनीति के कई बने-बनाए समीकरणों को चुनौती दी है।
विधानसभा चुनाव में क्या थी स्थिति
2026 के विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने रेजिनगर से 1,23,536 वोट पाकर जीत दर्ज की थी। चुनाव आयोग के नतीजों के मुताबिक भाजपा के बापन घोष को 64,660 वोट और तृणमूल कांग्रेस के अताउर रहमान को 41,718 वोट मिले थे। यानी भाजपा तब दूसरे स्थान पर रही, पर विजेता से उसका अंतर काफी बड़ा था।
उपचुनाव में हालात बदल गए। कबीर ने नउदा सीट अपने पास रखी और रेजिनगर छोड़ दी। आम जनता उन्नयन पार्टी ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया, लेकिन पार्टी सीट बचाने में कामयाब नहीं हुई।
कबीर के बेटे की लोकप्रियता पर सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गुलाम नबी आजाद की लोकप्रियता हुमायूं कबीर जितनी नहीं है। इतने बड़े मतदाता वर्ग में वे अपेक्षाकृत नए चेहरे हैं। इसी वजह से कबीर का प्रभाव उपचुनाव में कमजोर पड़ता दिखा।
विश्लेषकों के अनुसार मतदाताओं ने भाजपा उम्मीदवार पर भरोसा जताया, क्योंकि इस भरोसे के पीछे उन्हें शुभेंदु अधिकारी का चेहरा दिखा। यह आकलन राजनीतिक जानकारों का है। मतदाताओं के असल कारणों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
विकास और रोजगार पर रहा जोर
आजतक बांग्ला के विश्लेषण के मुताबिक भाजपा के प्रचार का सबसे अहम पहलू विकास और रोजगार रहा। अभियान के आखिरी चरण में बाबरी मस्जिद जैसे भावनात्मक मुद्दे की जगह पुल, अस्पताल, कॉलेज, औद्योगिक पार्क और रोजगार के अवसर प्रमुखता से उठे। कबीर की बाबरी मस्जिद वाली घोषणा को मुस्लिम मतदाताओं ने चुनावी प्लैंक माना।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में प्रचार किया। उन्होंने कहा कि आम लोगों को धार्मिक विवादों से ज्यादा विकास और रोजगार की जरूरत है। विश्लेषकों के मुताबिक इस रणनीति ने भाजपा को पारंपरिक समीकरणों से आगे बढ़कर मतदाताओं तक पहुंचने में मदद की।
शुभेंदु अधिकारी के वादे
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रेजिनगर में 200 बिस्तरों वाले अस्पताल, नए पुल, कॉलेज और औद्योगिक पार्क जैसी परियोजनाओं का वादा किया। प्रचार के दौरान प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने और रोजगार के अवसर पैदा करने का मुद्दा भी उठा। रिपोर्ट के अनुसार यह रेजिनगर में उनकी सबसे बड़ी सफलता साबित हुई।
उन्होंने मतदाताओं से भारी संख्या में वोट डालने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि वे विकास करेंगे और सबका साथ देंगे, बशर्ते वे चुनाव जीतें। इन वादों पर अमल कब और कैसे होगा, इसका ब्योरा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
मतदान के दिन कबीर की गिरफ्तारी और झड़प
6 अक्टूबर को मतदान के दिन हुमायूं कबीर की पुलिस से झड़प हुई और उन्हें गिरफ्तार किया गया। इससे रेजिनगर में चुनावी तनाव बढ़ गया। कबीर ने पुलिस पर मतदान प्रक्रिया में दखल देने का आरोप लगाया। विपक्ष ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
भाजपा और राज्य नेतृत्व ने मतदान में धांधली के आरोपों को खारिज किया। राजनीतिक हलकों का मानना है कि इस घटना का चुनाव प्रचार और मतदान के माहौल पर गहरा असर पड़ा। हालांकि इस असर को नतीजों से सीधे जोड़ने वाला कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
शुभेंदु के दावे और उम्मीदवार का संयमित रुख
नतीजों के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा को लेकर अल्पसंख्यकों में लंबे समय से डर और आशंका फैलाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह दुष्प्रचार भी हुआ कि भाजपा के सत्ता में आने पर मुसलमानों को बांग्लादेश भेज दिया जाएगा और नजरबंदी शिविरों में रखा जाएगा। उनके मुताबिक पिछले पांच महीनों में सरकार का काम देखकर यह धारणा बदली है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी को 60 प्रतिशत वोट मिलेंगे।
उम्मीदवार शंखारभ सरकार ने पूरे प्रचार में संभलकर बयान दिए। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक की बातों से थक चुके हैं और अब सिर्फ विकास, कॉलेज और उद्योग की मांग है। उनका कहना था कि अल्पसंख्यक समुदाय हर दौर में सत्ताधारी दल के साथ रहा है और अब विकास के हित में उसने भाजपा को वोट दिया।
पश्चिम बंगाल के रेजिनगर उपचुनाव में भाजपा के शंखारभ सरकार ने करीब 70 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं वाली सीट पर 75 हजार वोटों से जीत हासिल की। नंदीग्राम में भी पार्टी जीती। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे बंगाली मुसलमानों के बदले रुख का संकेत बताया, जबकि विश्लेषक विकास के एजेंडे और हुमायूं कबीर के कमजोर प्रभाव को वजह मान रहे हैं। मतदान के दिन कबीर की गिरफ्तारी पर विवाद भी रहा। मुस्लिम वोट के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
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Sanjana Gupta
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