Sant Premanand Maharaj: वृंदावन के श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम में साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के आठ दिन बाद संत प्रेमानंद महाराज की ओर से आधिकारिक चुप्पी टूटी है। श्रीहित राधा केलि कुंज ट्रस्ट ने पत्र जारी कर 25 सितंबर की घटना पर गहरा दुख जताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। ट्रस्ट ने साफ कहा कि महाराज श्री और उनका पूरा परिकर इस घटना से बेहद दुखी और आहत हैं। साथ ही निष्पक्ष जांच में पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग करने की बात कही गई है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि जांच पूरी होने तक अफवाहों और अपुष्ट बातों पर ध्यान न दें।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मौत का कारण हेमरेजिक शॉक यानी अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया है। यह मृत्यु से पहले शरीर पर लगी गंभीर चोटों और चौथी मंजिल से नीचे गिरने से जुड़ा है। घटना के बाद सोशल मीडिया और कुछ चैनलों पर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए थे। आश्रम का यह पहला औपचारिक बयान उन्हीं सवालों के बीच आया है।
आश्रम ने रसिक दुलारी की मौत पर क्या कहा?
ट्रस्ट के पत्र में लिखा गया है कि 25 सितंबर को हुई दुखद घटना से पूज्य महाराज श्री और उनका पूरा परिकर अत्यंत दुखी और आहत हैं। साधक के पीड़ित परिवार के प्रति पूर्ण संवेदना और सहानुभूति जताई गई है। ट्रस्ट ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच के लिए पुलिस का पूरा सहयोग किया जा रहा है। भक्तों और आमजन से विनम्र अनुरोध किया गया है कि जब तक जांच पूरी न हो, किसी अपुष्ट जानकारी, अफवाह या अनुमान के आधार पर महाराज जी और आश्रम की छवि धूमिल करने वाला दुष्प्रचार न करें। रसिक दुलारी शरण का मूल नाम दीपक लोधी बताया गया है। वे आश्रम के दीक्षित साधक थे। आश्रम की ओर से यह स्पष्ट संदेश उन खबरों के जवाब में है, जो पिछले कई दिनों से बिना पुष्टि के चल रही थीं।
अनिरुद्ध आचार्य ने प्रेमानंद महाराज के समर्थन में क्या कहा?
विवाद बढ़ने के बीच कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य संत प्रेमानंद महाराज के समर्थन में आए। उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया पर उन लोगों पर निशाना साधा, जो उनके अनुसार केवल व्यूज और टीआरपी के लिए बिना विषय समझे फैसला सुनाने लगते हैं। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि आजकल कुछ लोग खुद को जज बना लेते हैं। प्रेमानंद महाराज के प्रति सम्मान जताते हुए उन्होंने याद दिलाया कि महाराज ने करोड़ों भटके युवाओं को भक्ति मार्ग पर लाकर सही दिशा दिखाई है। अनिरुद्ध आचार्य के बयान को आश्रम समर्थकों ने राहत के रूप में देखा, जबकि आलोचक इसे बचाव की कोशिश बता रहे हैं। इससे पहले 2 अक्टूबर को ब्रज संत महिमा की ओर से भी एक पत्र आया था, जिसमें चंद पैसे और टीआरपी के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स और न्यूज एंकरों को चेतावनी दी गई थी।
बाल संरक्षण आयोग से क्या मांग की गई है?
समर्थन के बीच एक और मोर्चा खुला है। मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा है। पत्र में चिंता जताई गई है कि अध्यात्म के नाम पर कई नाबालिग बालक-बालिकाएं घर छोड़कर आश्रम में रह जाते हैं और परिजन उन्हें खोजते हुए आश्रम के चक्कर काटते रहते हैं। कुछ मामले संदिग्ध लगते हैं। उन्होंने ऐसे लापता बच्चों की उच्च स्तरीय जांच कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। फलाहारी महाराज ने यह सवाल भी उठाया कि यदि नाबालिगों के साथ आश्रम परिसर में कोई अनहोनी हो जाए तो जवाबदेही किसकी होगी। यह पत्र रसिक दुलारी की मौत से सीधे नहीं जुड़ा है, लेकिन आश्रम पर चल रही बहस को नया आयाम दे रहा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण क्या बताया गया?
चिकित्सकीय रिपोर्ट के अनुसार रसिक दुलारी की मौत हेमरेजिक शॉक से हुई। यह स्थिति शरीर से भारी रक्तस्राव होने पर बनती है। रिपोर्ट में मृत्यु से पहले गंभीर चोटें और चौथी मंजिल से गिरने का जिक्र है। पुलिस इन दोनों बातों की अलग-अलग जांच कर रही है कि चोटें गिरने से पहले लगीं या गिरने के दौरान। आश्रम का कहना है कि वह तथ्यों पर आधारित जांच में सहयोग दे रहा है। परिवार की ओर से अब तक सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय प्रशासन ने मामले को संवेदनशील बताते हुए अफवाहों पर अंकुश लगाने की बात कही है।
आश्रम ने भक्तों से क्या अपील की है?
ट्रस्ट ने सभी श्रद्धालुओं से कहा है कि जांच पूरी होने तक सोशल मीडिया पर चल रही बिना पुष्टि की क्लिप्स और दावों पर यकीन न करें। आश्रम का रुख है कि एक साधक की मौत को लेकर पूरे संस्थान को बदनाम करना उचित नहीं। वहीं आलोचक पूछ रहे हैं कि आठ दिन तक चुप्पी क्यों रही और घटना की पहली जानकारी परिवार तक कैसे पहुंची। प्रेमानंद महाराज वृंदावन में युवाओं के बीच भक्ति प्रवचन के लिए जाने जाते हैं। उनके आश्रम में देशभर से साधक आते हैं। इस घटना ने आश्रम की आंतरिक व्यवस्था, साधकों की सुरक्षा और नाबालिगों की मौजूदगी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच के नतीजे आने तक दोनों पक्ष अपने-अपने बयानों पर अड़े हुए हैं।
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Sanjana Gupta
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