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आरओ का टीडीएस 25 से कम हो तो क्या मतलब है, पीने के पानी की सीमा क्या मानी जाती है?

Ideal TDS Level: घर में आरओ लगा हो, तो मीटर पर 20, 50 या 100 जैसी रीडिंग देखकर सवाल उठता है कि पीने के पानी का सही टीडीएस कितना है। कम आंकड़ा देखकर कुछ लोग पानी को ज्यादा साफ मान लेते हैं। कुछ को लगता है कि जरूरी खनिज कम हो गए। सिर्फ संख्या से फैसला करना काफी नहीं है। टीडीएस घुले ठोस पदार्थों की कुल मात्रा बताता है, पानी की पूरी सुरक्षा नहीं।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सीमाएं स्वाद और स्वीकार्यता से जुड़ी हैं। बैक्टीरिया या हानिकारक रसायन की जांच अलग होती है। आरओ का टीडीएस 25 से कम हो, तो उसे बहुत कम खनिज वाला पानी माना जाता है। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने पर भोजन में कैल्शियम और मैग्नीशियम का ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

टीडीएस आखिर मापता क्या है?

टीडीएस यानी टोटल डिजॉल्वड सॉलिड्स पानी में घुले ठोस पदार्थों की कुल मात्रा है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम और कई खनिज लवण शामिल हो सकते हैं। रीडिंग यह नहीं बताती कि कौन सा पदार्थ कितनी मात्रा में है। बैक्टीरिया, दूसरे सूक्ष्मजीव या कुछ हानिकारक रसायन हैं या नहीं, यह जानने के लिए अलग जांच चाहिए।

इसलिए कम टीडीएस का मतलब अपने आप सुरक्षित पानी नहीं है। ज्यादा टीडीएस का मतलब भी हर बार हानिकारक प्रदूषण नहीं होता। स्रोत और लैब रिपोर्ट दोनों देखने पड़ते हैं।

पीने के पानी में कितना टीडीएस स्वीकार्य माना जाता है?

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के अनुसार भारत में पीने के पानी की गुणवत्ता के लिए टीडीएस की स्वीकार्य सीमा 500 मिलीग्राम प्रति लीटर है। किसी जगह दूसरा विकल्प न हो, तो 2000 मिलीग्राम प्रति लीटर तक की सीमा परमिसिबल मानी गई है। इसका मतलब यह नहीं कि 2000 वाला पानी रोज पीने के लिए आदर्श है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 600 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम टीडीएस वाला पानी आमतौर पर स्वाद के लिहाज से अच्छा माना जाता है। 1000 से ऊपर जाने पर स्वाद कम पसंद आ सकता है। कम खनिज वाला पानी लंबे समय तक लेने पर खनिज संतुलन पर असर पड़ सकता है और पानी से मिलने वाले कैल्शियम-मैग्नीशियम की मात्रा कम हो सकती है। ये सामान्य मार्गदर्शन हैं, व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह नहीं।

25 से कम टीडीएस वाले आरओ पानी पर डॉक्टर ने क्या कहा?

आरओ से निकलने वाले पानी का टीडीएस 25 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम हो, तो यह रीडिंग काफी कम मानी जाती है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में आईएसआईसी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के डॉ. उदित गुप्ता ने कहा कि इतना कम टीडीएस वाला पानी बहुत कम खनिज वाला हो सकता है। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने वाले व्यक्ति को भोजन में कैल्शियम और मैग्नीशियम की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करनी चाहिए। जब खान-पान से भी ये खनिज काफी मात्रा में न मिल रहे हों, तब यह चिंता की बात हो सकती है।

आरओ खनिज घटाता है, इसलिए कुछ मॉडलों में मिनरल कार्ट्रिज लगाया जाता है। कार्ट्रिज लगा है या नहीं और टीडीएस कितना आ रहा है, यह सर्विस के समय देखा जा सकता है। पानी अकेला कैल्शियम का स्रोत नहीं होता।

ज्यादा टीडीएस होने पर स्वाद और पाइप पर क्या असर पड़ता है?

पानी में टीडीएस बहुत ज्यादा होने पर स्वाद बदल सकता है। खारापन या अलग तरह का स्वाद महसूस हो सकता है। ज्यादा टीडीएस के कारण पाइप, हीटर और दूसरे घरेलू उपकरणों में खनिजों की परत जमने की समस्या भी बढ़ सकती है। यह परत सफाई और मेंटेनेंस बढ़ाती है। स्वास्थ्य का फैसला फिर भी अकेले टीडीएस से नहीं होता।

घर पर टीडीएस कैसे चेक करें और सुरक्षा कैसे तय करें?

डिजिटल टीडीएस मीटर से घर पर रीडिंग ली जा सकती है। साफ गिलास में पानी भरें। मीटर पानी में डालें। कुछ सेकंड रुककर स्क्रीन देखें। रीडिंग आमतौर पर पीपीएम या मिलीग्राम प्रति लीटर में आती है। अलग सैंपल नापते समय मीटर साफ रखें, वरना पुरानी रीडिंग मिल सकती है।

टीडीएस बहुत ज्यादा या बहुत कम हो, तो सिर्फ उसी नंबर पर फैसला न लें। माइक्रोबायोलॉजिकल और केमिकल जांच भी जरूरी हो सकती है। पानी बोरवेल, हैंडपंप या स्थानीय स्रोत से आता हो, तो समय-समय पर लैब टेस्ट बेहतर रहता है। आरओ वालों को फिल्टर की सर्विसिंग और स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। मीटर की रीडिंग शुरुआती संकेत है, पूरी रिपोर्ट नहीं।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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