Saranda Forest IED Blast: झारखंड के घने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान जारी है, लेकिन इस बीच नक्सलियों ने एक बार फिर अपनी खतरनाक चाल चली। पश्चिम सिंहभूम जिले के सरांडा जंगल में सोमवार को नक्सल विरोधी ऑपरेशन के दौरान एक IED यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस में जोरदार विस्फोट हो गया। इस धमाके में CRPF की कोबरा बटालियन का एक जवान घायल हो गया। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और नक्सलियों की तलाश में बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज कर दिया गया है।
सरांडा जंगल में चल रहा था संयुक्त सर्च ऑपरेशन
पश्चिम सिंहभूम जिले का सरांडा जंगल लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है। इस घने जंगल में नक्सली छिपकर अपनी गतिविधियां चलाते हैं और सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहते हैं। इसी को देखते हुए सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम सोमवार को चाईबासा के छोटे नगर थाना क्षेत्र में सरांडा जंगल के अंदर सर्च ऑपरेशन चला रही थी।
यह टीम जंगल के उन हिस्सों में जा रही थी जहां नक्सलियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिली थी। इसी दौरान नक्सलियों द्वारा पहले से जमीन में दबाकर रखा गया एक IED अचानक फट गया। विस्फोट इतना जोरदार था कि उसकी चपेट में कोबरा बटालियन के जवान मनोज कुमार आ गए और वे घायल हो गए।
घायल जवान की हालत स्थिर, अस्पताल में इलाज जारी

विस्फोट होते ही साथी जवानों ने तुरंत मनोज कुमार को प्राथमिक उपचार दिया और उन्हें जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों के मुताबिक जवान को मामूली चोटें आई हैं और फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम उनकी देखभाल कर रही है और उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी भी सक्रिय हो गए। जिले के पुलिस अधीक्षक अमित रेनु ने खुद मोर्चा संभाला और पूरी घटना की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि जवान की हालत खतरे से बाहर है और सुरक्षा बल पूरी ताकत के साथ नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में लगे हुए हैं।
IED क्या होता है और क्यों है यह इतना खतरनाक?
IED यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस नक्सलियों और आतंकवादियों का सबसे पसंदीदा हथियार है। यह एक ऐसा बम होता है जिसे देशी तरीके से बनाया जाता है और जमीन में दबाकर रख दिया जाता है। जब कोई सुरक्षाकर्मी उस रास्ते से गुजरता है तो यह अपने आप फट जाता है। इसे पहचानना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि यह जमीन के अंदर छिपा होता है।
नक्सली आमतौर पर उन रास्तों पर IED लगाते हैं जहां से सुरक्षा बलों के गुजरने की संभावना होती है। यही वजह है कि सुरक्षा बलों को जंगल में ऑपरेशन के दौरान बेहद सावधानी से आगे बढ़ना पड़ता है। IED विस्फोट सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ा खतरा है और इसमें जान-माल का नुकसान होने का बड़ा डर रहता है।
एक करोड़ के इनामी नक्सली नेता को पकड़ने का मिशन
सूत्रों के मुताबिक इस पूरे ऑपरेशन का एक बड़ा मकसद कुख्यात नक्सली नेता मिसिर बेसरा और उसके दस्ते को पकड़ना है। मिसिर बेसरा पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। वह काफी समय से सुरक्षा बलों की आंखों में आंखें डालकर सरांडा जंगल और उसके आसपास के इलाकों में छिपकर घूम रहा है।
मिसिर बेसरा के दस्ते पर कई हमलों और हिंसक घटनाओं में शामिल होने का आरोप है। सुरक्षा बल लंबे समय से उसकी तलाश में हैं और इस बार बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे ऑपरेशन में उसे पकड़ने की कोशिश हो रही है। इस IED विस्फोट से यह भी साफ होता है कि नक्सलियों को सुरक्षा बलों के आने की भनक लग गई थी और उन्होंने पहले से जाल बिछा रखा था।
सुरक्षा बलों ने तेज किया कॉम्बिंग ऑपरेशन
IED ब्लास्ट के बाद सुरक्षा बलों ने हार नहीं मानी बल्कि और ज्यादा जोश के साथ ऑपरेशन को आगे बढ़ाया। पूरे सरांडा जंगल में व्यापक कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। जंगल के कोने-कोने की तलाशी ली जा रही है ताकि छिपे हुए नक्सलियों को पकड़ा जा सके।
अधिकारियों के मुताबिक इलाके की लगातार हवाई और जमीनी निगरानी की जा रही है। सुरक्षा बलों की कई टुकड़ियां जंगल के अलग-अलग हिस्सों में तैनात हैं और हर संदिग्ध जगह पर नजर रखी जा रही है। एसपी अमित रेनु ने कहा कि इस घटना से सुरक्षा बलों का हौसला टूटने वाला नहीं है और नक्सलियों को जल्द ही उनके किए की सजा मिलेगी।
सरांडा: नक्सलवाद का पुराना गढ़
सरांडा जंगल झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में फैला हुआ एशिया के सबसे बड़े साल के जंगलों में से एक है। यह जंगल अपनी घनी हरियाली और दुर्गम रास्तों की वजह से नक्सलियों के लिए हमेशा से एक सुरक्षित पनाहगाह रहा है। यहां के जंगलों में नक्सली न सिर्फ छिपते हैं बल्कि अपने नए सदस्यों को ट्रेनिंग भी देते हैं और हथियार जमा करते हैं।
पिछले कई सालों में सुरक्षा बलों ने इस इलाके में कई बड़े ऑपरेशन चलाए हैं और काफी हद तक नक्सलियों की ताकत को कम किया है। लेकिन नक्सली अभी भी यहां सक्रिय हैं और समय-समय पर इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। सरकार और सुरक्षा बलों का लक्ष्य इस पूरे जिले को नक्सल मुक्त करना है और इसके लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की बड़ी मुहिम
झारखंड सरकार और केंद्र सरकार मिलकर राज्य को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए काम कर रही हैं। इसके लिए न सिर्फ सुरक्षा बलों के ऑपरेशन बल्कि विकास कार्यों पर भी जोर दिया जा रहा है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़कें, स्कूल, अस्पताल और रोजगार के मौके बढ़ाए जा रहे हैं ताकि स्थानीय लोग नक्सलियों के बहकावे में न आएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नक्सलवाद को सिर्फ बंदूक से नहीं बल्कि विकास और रोजगार से भी खत्म किया जा सकता है। जब तक जंगल में रहने वाले आदिवासी और गरीब लोगों को उनके हक मिलते रहेंगे और उनका जीवन स्तर सुधरता रहेगा, तब तक नक्सलवाद की जड़ें कमजोर होती रहेंगी।
जवान के साहस को सलाम
इस पूरी घटना में सबसे अहम बात यह है कि घायल होने के बावजूद कोबरा बटालियन के जवान मनोज कुमार ने अपना हौसला नहीं खोया। देश की सुरक्षा के लिए घने जंगलों में जाकर नक्सलियों से लड़ना और जान की परवाह किए बिना अपना फर्ज निभाना, यही इन जवानों की असली पहचान है।
सरांडा के जंगलों में दुश्मन के बिछाए जाल में घायल होने के बाद भी सुरक्षा बलों का ऑपरेशन जारी रहना इस बात का सबूत है कि देश के ये वीर जवान किसी भी चुनौती से पीछे नहीं हटते। पूरा देश इन जवानों के साहस और समर्पण को सलाम करता है।
Read More Here:-
हंटरगंज पुलिस की बड़ी कार्रवाई: चोरी की अपाचे बाइक के साथ युवक गिरफ्तार, साथी फरार
केरल में चुनाव से पहले हिंसा, BJP कार्यकर्ता के घर पर बम हमला, कन्नूर में दहशत



