Top 5 This Week

Related Posts

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी कब है, जानिए पूजा विधि, नियम, क्या करें-क्या न करें और महत्व

Shattila Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। साल 2026 में यह एकादशी 14 जनवरी (सोमवार) को है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। नाम “षटतिला” इसलिए पड़ा क्योंकि इस एकादशी पर तिल का छह तरह से उपयोग किया जाता है। यह व्रत पाप नाशक और मोक्षदायी माना जाता है। जो लोग इस व्रत को श्रद्धा से करते हैं, उन्हें सभी सुख और अंत में वैकुंठ प्राप्ति होती है।

षटतिला एकादशी 2026 की तिथि और समय

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 जनवरी 2026, शाम 5:42 बजे से
  • एकादशी तिथि समाप्त: 14 जनवरी 2026, दोपहर 3:12 बजे तक
  • व्रत पारण समय: 15 जनवरी सुबह 7:15 से 9:30 बजे तक

व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा। पारण अगले दिन द्वादशी को होगा।

पूजा विधि और नियम

  • सुबह स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • विष्णु पूजा: घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पीले वस्त्र पहनाएं, तुलसी दल चढ़ाएं।
  • तिल का उपयोग: षटतिला का विशेष महत्व है। छह तरह से तिल का प्रयोग करें:
    – स्नान में तिल मिलाएं।
    – तिल का उबटन लगाएं।
    – तिल का हवन करें।
    – तिल का दान करें।
    – तिल मिश्रित जल से तर्पण करें।
    – तिल युक्त भोजन (द्वादशी पर) ग्रहण करें।
  • मंत्र जप: “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • व्रत कथा: शाम को षटतिला एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें।
  • दान: तिल, कंबल, अनाज और कपड़े का दान करें।

क्या करें – क्या न करें

करें:

  • पूरा दिन व्रत रखें। फलाहार करें।
  • तिल का अधिकाधिक उपयोग करें।
  • ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
  • रात में जागरण करें, भजन-कीर्तन करें।
  • क्रोध और झूठ से दूर रहें।

न करें:

  • चावल, गेहूं या अनाज न खाएं।
  • नमक का त्याग करें (कुछ लोग करते हैं)।
  • तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज) न लें।
  • क्रोध, झूठ या किसी का अपमान न करें।
  • बाल या नाखून न काटें।

Shattila Ekadashi 2026: षटतिला एकादशी का महत्व

पद्म पुराण में वर्णित है कि इस व्रत से सभी पाप नष्ट होते हैं। दान पुण्य का विशेष फल मिलता है। जो व्यक्ति तिल दान करता है, उसे अक्षय पुण्य मिलता है। इस एकादशी पर किए गए दान का फल कोटि गुना होता है। महिलाएं संतान सुख और सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं।

सर्दियों में यह एकादशी स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी है। तिल शरीर को गर्म रखता है और पाचन सुधारता है।

षटतिला एकादशी पर श्रद्धा से व्रत रखें। तिल का उपयोग और दान जरूर करें। भगवान विष्णु की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। घर में सुख-शांति बनी रहेगी।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles