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Siliguri News: सिलीगुड़ी जेल से उठी नागरिकता की गुहार, 60 बांग्लादेशी हिंदुओं ने CAA के तहत मांगा भारत का दर्जा

Siliguri News: सिलीगुड़ी की जेल की सलाखों के पीछे बैठे 60 लोगों ने कुछ ऐसा मांगा है, जिसे पाने के लिए उन्होंने अपना घर-बार तक पीछे छोड़ दिया था। यह सभी बांग्लादेशी हिंदू हैं और अब नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA के तहत भारत की नागरिकता के लिए अर्जी दे चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से छह लोगों को कलकत्ता हाई कोर्ट से जमानत भी मिल गई है, लेकिन बांग्लादेश वापस जाने का नाम सुनते ही यह लोग सिहर उठते हैं। आखिर जेल की चारदीवारी से नागरिकता की यह मांग कैसे शुरू हुई और इसके पीछे की पूरी कहानी क्या है, यह जानना जरूरी है।

दरअसल पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के अंतर्गत आने वाली सिलीगुड़ी जेल में इन दिनों एक अलग ही हलचल देखी जा रही है। पिछले तीन-चार महीनों में जेल में बंद 60 बांग्लादेशी घुसपैठियों ने CAA कानून के तहत भारतीय नागरिकता देने की अर्जी दाखिल की है। इन सभी की पहचान हिंदू समुदाय से जुड़े लोगों के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न से तंग आकर भारत की ओर रुख कर चुके थे।

Siliguri News: CAA के तहत क्यों मांगी जा सकती है नागरिकता

नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA का प्रावधान है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक आधार पर उत्पीड़न झेलकर भारत आए अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता दी जा सकती है। सिलीगुड़ी जेल में बंद यह सभी 60 लोग इसी दायरे में खुद को फिट मानते हुए आवेदन कर चुके हैं। जानकार बताते हैं कि यह आवेदन प्रक्रिया जेल से ही शुरू हुई, जो अपने आप में एक असामान्य स्थिति है। आमतौर पर नागरिकता के लिए अर्जी बाहर से दाखिल होती है, मगर यहां मामला उलट है और सलाखों के पीछे से ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

बता दें कि इन आवेदकों में से छह लोगों को कलकत्ता हाई कोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है। जमानत मिलने के बावजूद यह लोग बांग्लादेश लौटने को तैयार नहीं हैं। इसकी वजह साफ है, इन्हें डर है कि वापस जाने पर उन्हें फिर से उसी उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा, जिससे बचने के लिए वह भारत आए थे।

सबूज दास का मामला बना चर्चा की वजह

इस पूरे मसले में सबूज दास नाम के एक बांग्लादेशी नागरिक का केस खासा चर्चा में है। सिलीगुड़ी कोर्ट के अधिवक्ता ऋषभ केसरी के मुताबिक, सबूज दास वर्ष 2017 में अपने परिवार के साथ भारत आया था। यानी करीब आठ साल पहले ही यह परिवार अपने वतन को छोड़कर यहां बस गया था। मामला तब गंभीर मोड़ पर पहुंचा जब अगस्त 2025 में बागडोगरा थाना पुलिस ने इन्हें घुसपैठिया करार देते हुए परिवार के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद परिवार लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ता रहा। आखिरकार 11 अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट ने इन सभी छह लोगों को जमानत दे दी। जमानत मिलने के बाद भी यह परिवार बांग्लादेश जाने को राजी नहीं हुआ। फिलहाल यह लोग हिंदू संगठनों की मदद से बागडोगरा इलाके में ही रह रहे हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

एक कैदी की मुलाकात से शुरू हुई मुहिम

अब बात करते हैं उस मोड़ की, जहां से यह पूरा मामला सुर्खियों में आया। बजरंग दल की दार्जिलिंग जिला कमेटी के सह-संयोजक मिथलेश गोहर ने इस बारे में दिलचस्प जानकारी साझा की। उनके मुताबिक वह गौ रक्षा से जुड़े एक मामले में खुद जेल गए थे। उसी दौरान जेल के भीतर उनकी मुलाकात सबूज दास से हुई, जो भारत में घुसपैठ के आरोप में बंद था।

यहीं से यह मामला एक अलग दिशा में मुड़ गया। जेल से बाहर आने के बाद मिथलेश गोहर ने इस पूरे मसले की जानकारी वरिष्ठ अधिवक्ता बिराज बिस्वास को दी। उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और सिलीगुड़ी कोर्ट में चार से पांच सुनवाइयों के दौरान खुद पैरवी की। यह बात सामने रखने लायक है कि विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद जब व्यस्तता बढ़ी, तो बिराज बिस्वास ने अपने जूनियर अधिवक्ता ऋषभ केसरी को इस केस की जिम्मेदारी सौंप दी।

Siliguri News: राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बदले हालात

यह मामला एक और वजह से भी दिलचस्प हो जाता है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बिराज बिस्वास अब राज्य के कानून मंत्री बन चुके हैं। यानी जिस वकील ने कभी जेल में बंद सबूज दास और उसके परिवार के लिए अदालत में पैरवी की थी, वह आज कानून मंत्रालय की कुर्सी संभाल रहे हैं। यह इत्तेफाक इस मामले को और भी चर्चा में ला दिया है।

देखने पर लगता है कि यह सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया भर नहीं है, बल्कि उन 60 परिवारों की जिंदगी से जुड़ी एक बड़ी उम्मीद है, जो बरसों से अपनी पहचान और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जेल की चारदीवारी से उठी यह मांग अब कानूनी गलियारों में गूंज रही है, और इसका असर आने वाले दिनों में सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले ऐसे ही कई और परिवारों पर भी पड़ सकता है।

स्थानीय स्तर पर देखा जाए तो सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में यह मामला आम चर्चा का विषय बन चुका है। हिंदू संगठन इन परिवारों की मदद के लिए आगे आए हैं, वहीं प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर भी इस पर नजर बनी हुई है। मामला जितना संवेदनशील है, उतना ही यह उन लाखों लोगों की भावनाओं से भी जुड़ा है जो धार्मिक उत्पीड़न झेलकर पड़ोसी देशों से भारत में शरण लेने पहुंचे हैं।

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Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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