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पाकुड़ के जवाहर नवोदय विद्यालय में 10 छात्रों का फर्जी एडमिशन, कैसे हुआ खुलासा?

पाकुड़-हिरणपुर प्रखंड के बागशीशा गांव स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) में फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है. विद्यालय में कक्षा 6 के नामांकन में 10 छात्रों के कागजात फर्जी पाये गये हैं. जुलाई-अगस्त 2024 में हुए नामांकन के बाद मामला तब सामने आया जब छात्र आनंद कुमार की तबीयत खराब होने पर उसे घर भेजने की तैयारी की गयी. बच्चे के पते की जांच के दौरान पता चला कि हिरणपुर प्रखंड में उसका कोई स्थायी पता है ही नहीं. इसके बाद प्राचार्य अवधेश कुमार ने कागजात की जांच शुरू की. जिस स्कूल का प्रमाण-पत्र दिया गया था, वहां पता चला कि उस नाम का कोई बच्चा कभी नामांकित था ही नहीं. इस खुलासे के बाद जब अन्य छात्रों के कागजात खंगाले गये, तो पता चला कि 10 बच्चों ने फर्जी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण-पत्र और निवासी प्रमाण-पत्र के सहारे विद्यालय में प्रवेश लिया था. यहां तक कि जिला शिक्षा पदाधिकारी के हस्ताक्षर भी फर्जी पाये गये.

आधार कार्ड से लेकर एसएलसी भी फर्जी, नामांकन रैकेट का खेल

नामांकन के लिए जरूरी सभी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट, और डीइओ के हस्ताक्षर सभी फर्जी पाये गये. 22 अक्टूबर 2024 को जेएनवी के प्राचार्य ने इस मामले की लिखित शिकायत डीइओ पाकुड़ से की. इसके बाद 19 दिसंबर 2024 को डीइओ अनीता पूर्ति ने जांच के लिए तीन बीइइओ की टीम गठित की. जांच में पाया गया कि जिन स्कूलों के नाम से टीसी (स्थानांतरण प्रमाण-पत्र) जारी किये गये थे, वहां बच्चे कभी नामांकित ही नहीं थे. जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है. इस मामले में चिह्नित 10 बच्चों में से कोई भी पाकुड़ जिले का निवासी नहीं है. जांच में आशंका जतायी गयी है कि इसके पीछे एक रैकेट सक्रिय है, जो मोटी रकम लेकर सरकारी कागजातों को फर्जी तरीके से तैयार करता है और बच्चों का नामांकन कराता है.

छुट्टी के बाद गायब हुए छात्र

जब विद्यालय प्रबंधन ने जांच शुरू की, तो यह खबर बच्चों और उनके अभिभावकों तक भी पहुंच गयी. दुर्गापूजा की छुट्टी के बाद नौ नवंबर को विद्यालय खुला, लेकिन चिह्नित 10 बच्चे लौटकर नहीं आये. उनके अभिभावकों ने फर्जी कागजातों की जांच के डर से बच्चों को स्कूल भेजने से इनकार कर दिया.

फर्जीवाड़े की चौंकाने वाली तीन दिलचस्प केस स्टडी

केस स्टडी 01: हिरणपुर का ‘अनजान छात्र’
राहुल राज नाम के एक छात्र ने अपना नामांकन कराने के लिए हिरणपुर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय दलदली का प्रमाण-पत्र दिया. हैरानी कि बात यह है कि न तो राहुल ने कभी इस स्कूल में पढ़ाई की और न ही वह स्थानीय बच्चा है. दरअसल, वह पाकुड़ जिले का निवासी भी नहीं है. इसके अलावा, उसने जो टीसी प्रमाण-पत्र संख्या 45/2024 प्रस्तुत किया, वह पूरी तरह से संदिग्ध है क्योंकि इस विद्यालय ने टीसी प्रमाण-पत्र जारी करना ही संख्या 63/2024 से शुरू किया था.
केस स्टडी 02: अमड़ापाड़ा में ‘गायब छात्र’
सारंग मुंडा ने अपना नामांकन अमड़ापाड़ा प्रखंड के मध्य विद्यालय कोलखीपाड़ा के प्रमाण-पत्र के आधार पर कराया. लेकिन एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ जब यह सामने आया कि सारंग ने इस स्कूल में कभी पढ़ाई नहीं की. इतना ही नहीं, विद्यालय के रिकॉर्ड में न तो इस नाम का कोई छात्र मिला और न ही स्कूल ने कभी इस नाम के किसी छात्र को टीसी जारी किया. यह साफ तौर पर एक फर्जीवाड़ा है.
केस स्टडी 03: नामांकन संख्या का झोल
तीसरी घटना अमड़ापाड़ा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय कोलटोला की है, जहां आशीष कुमार और लक्ष्मी कुमारी का फर्जी कागजात के सहारे नामांकन कराया गया. आशीष ने प्रवेश संख्या 23/2019 और लक्ष्मी ने 17/2019 का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया. लेकिन हकीकत यह है कि इस विद्यालय में कुल मिलाकर केवल 13 नामांकन हुए थे. इसका मतलब, उनके कागजात फर्जी थे और गहराई से जांच की जरूरत है.

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद होगी कार्रवाई
डीईओ अनिता पूर्ति ने कहा कि जीएनवी बागशीशा से मिले पत्र पर जांच करायी गयी है. जांच प्रतिवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है.

जेएनवी बागशीशा के प्रिंसिपल अवधेश कुमार ने कहा कि जेएनवी में कुछ बच्चों के नामांकन में फर्जी कागजात उपलब्ध कराने का शक हुआ था. इसे लेकर विद्यालय स्तर से जांच की गयी तो पाया गया कि कुल 10 छात्र-छात्राओं के कागजात संदिग्ध हैं. डीईओ को पत्र दिया गया है. उनका पत्र मिलने के बाद सभी 10 छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी और सीबीएसई को सूचित किया जायेगा.

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Author: newsmedia kiran.com

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