Tamil Nadu Gold Ring Scheme: तमिलनाडु सरकार ने नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी देने वाली ‘ताइमामन थंगा मोधिरम’ योजना के पात्रता नियमों में ढील दी है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने तय किया है कि जिन महिलाओं का जन्म तमिलनाडु में हुआ, लेकिन शादी के बाद वे दूसरे राज्यों में बस गईं, उन्हें भी योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना में राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले हर नवजात को एक ग्राम सोने की अंगूठी दी जाती है।
इसके लिए शर्त रखी गई है कि महिला के माता-पिता तमिलनाडु में स्थायी रूप से रहते हों और वे इसका वैध दस्तावेजी प्रमाण दें। संशोधित दिशा-निर्देश 22 जून 2026 से सरकारी अस्पतालों में जन्मे बच्चों पर पूर्व प्रभाव से लागू होंगे। यह बदलाव कर्नाटक में रहने वाली उमा महेश्वरी के मामले के बाद सामने आया, जिनके बच्चे को 7 अक्टूबर को अंगूठी सौंपी गई।
Tamil Nadu Gold Ring Scheme: योजना की शुरुआत और मूल शर्तें
यह योजना मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 28 सितंबर 2026 को शुरू की थी। इसके तहत तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात को एक ग्राम सोने की अंगूठी दी जाती है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के शुरुआती दिशा-निर्देशों के मुताबिक सिर्फ वही माताएं पात्र थीं, जो तमिलनाडु की स्थायी निवासी हों। इस शर्त के कारण वे महिलाएं बाहर रह गईं, जो प्रसव के लिए मायके लौटती हैं लेकिन दूसरे राज्य में बस चुकी हैं। योजना की कुल लागत या लाभार्थियों की संख्या की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
नियमों में क्या बदलाव हुआ
अब सरकार ने दायरा बढ़ाते हुए उन महिलाओं को भी पात्र माना है, जिनका जन्म तमिलनाडु में हुआ था और जो शादी के बाद दूसरे राज्य में रहने लगीं। यह लाभ तभी मिलेगा, जब उनके माता-पिता तमिलनाडु के स्थायी निवासी हों।
माता-पिता के निवास का वैध दस्तावेजी प्रमाण देना जरूरी होगा। किन दस्तावेजों को मान्य माना जाएगा, इसकी सूची उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है। इसके लिए संबंधित अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
पूर्व प्रभाव से लागू होंगे संशोधित नियम
सरकार ने साफ किया है कि संशोधित दिशा-निर्देश 22 जून 2026 से लागू माने जाएंगे। यानी इस तारीख के बाद तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में जन्मे पात्र बच्चों को भी योजना का फायदा मिलेगा।
इससे वे परिवार भी दायरे में आ सकते हैं, जो पहले नियमों की वजह से लाभ से वंचित रह गए थे। ऐसे कितने बच्चे पात्र बनेंगे, इसका आंकड़ा सामने नहीं आया है। पहले वंचित रहे परिवारों को सूचित करने की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
उमा महेश्वरी का मामला बना वजह
सरकार का यह फैसला उन मामलों को ध्यान में रखकर लिया गया बताया गया है, जिनमें दूसरे राज्य में रहने वाली महिलाएं प्रसव के लिए मायके लौटती हैं। ऐसा ही एक मामला उमा महेश्वरी का है, जो शादी के बाद कर्नाटक के मैसूर जिले के उदयगिरि में पति के साथ रहती हैं। उनके माता-पिता तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के कराईकुडी में रहते हैं।
उमा महेश्वरी ने 17 सितंबर 2026 को कराईकुडी सरकारी मुख्यालय अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन से बच्चे को जन्म दिया। वे तमिलनाडु की स्थायी निवासी नहीं थीं, इसलिए शुरुआत में लाभ नहीं ले सकीं।
7 अक्टूबर को सौंपी गई अंगूठी
नियम बदलने के बाद 7 अक्टूबर 2026 को कराईकुडी सरकारी मुख्यालय अस्पताल में ब्लॉक मेडिकल अधिकारी ने उनके बच्चे को योजना के तहत एक ग्राम सोने की अंगूठी दी। इस तरह बदले नियमों का पहला उदाहरण सामने आया।
यह मामला दिखाता है कि प्रशासन ने जमीनी स्थिति को देखकर नियमों में बदलाव किया। हालांकि क्या अन्य राज्यों में रहने वाली और महिलाओं के मामले भी इसी तरह निपटाए गए हैं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
Tamil Nadu Gold Ring Scheme: आगे क्या
संशोधित नियमों के बाद जिन परिवारों की स्थिति उमा महेश्वरी जैसी है, वे अब आवेदन कर सकते हैं। उन्हें माता-पिता के तमिलनाडु में स्थायी निवास का वैध प्रमाण साथ रखना होगा।
योजना में आगे और बदलाव होंगे या नहीं, इस बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इच्छुक परिवार जानकारी के लिए जन्म वाले सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
तमिलनाडु की ‘ताइमामन थंगा मोधिरम’ योजना में अब तमिलनाडु में जन्मी, लेकिन शादी के बाद दूसरे राज्य में बसी महिलाओं के नवजात भी पात्र होंगे, बशर्ते उनके माता-पिता राज्य के स्थायी निवासी हों और वैध प्रमाण दें। संशोधित नियम 22 जून 2026 से पूर्व प्रभाव से लागू होंगे। कर्नाटक में रहने वाली उमा महेश्वरी के बच्चे को 7 अक्टूबर को कराईकुडी अस्पताल में अंगूठी दी गई। योजना 28 सितंबर 2026 को शुरू हुई थी और इसमें सरकारी अस्पताल में जन्मे हर नवजात को एक ग्राम सोने की अंगूठी मिलती है।
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Sanjana Gupta
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