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Teen Drug Abuse Study: स्कूलों में बढ़ रहा नशे का खतरा, गुवाहाटी में 42.3% किशोर जोखिम में; मोबाइल-इंटरनेट भी कारण

New Delhi: स्कूल जाने की उम्र में किशोरों के बीच नशे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। छह शहरों के स्कूलों में किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि गुवाहाटी में 42.3 फीसदी किशोर मध्यम या ज्यादा नशा-जोखिम वाली श्रेणी में पाए गए।

इसके बाद देवघर में 41.3 फीसदी और गोरखपुर में 24.5 फीसदी किशोर इस श्रेणी में मिले। वहीं पुडुचेरी में यह आंकड़ा महज 0.1 फीसदी रहा।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन किशोरों को अपने आसपास नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध होने का अहसास था, उनमें नशे से जुड़े जोखिम की संभावना ज्यादा थी।

इसके अलावा मोबाइल और इंटरनेट समेत डिजिटल माध्यमों पर अधिक समय बिताने वाले किशोरों में भी जोखिम बढ़ा हुआ पाया गया।

हर चार में करीब एक किशोर खतरे में

छह शहरों के आंकड़ों को मिलाकर 21.4 फीसदी किशोर मध्यम या ज्यादा नशा-जोखिम वाली श्रेणी में पाए गए। शहरों के बीच आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिला।

छह शहरों में किशोरों का नशा-जोखिम

मध्यम या ज्यादा नशा-जोखिम वाली श्रेणी में मिले किशोरों का प्रतिशत।

city risk
गुवाहाटी 42.3
देवघर 41.3
गोरखपुर 24.5
राजकोट 13.5
नागपुर 7.1
पुडुचेरी 0.1

लड़कों की तुलना में लड़कियों पर ज्यादा खतरा

अध्ययन में लड़कों की तुलना में लड़कियों में नशे से जुड़े जोखिम की संभावना अधिक पाई गई। शोधकर्ताओं के अनुसार किशोरों के आसपास नशीले पदार्थों की उपलब्धता और डिजिटल माध्यमों से बढ़ता संपर्क इस जोखिम को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में शामिल हैं।

108 स्कूलों से जुटाया गया डाटा

शोधकर्ताओं ने अक्तूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच छह शहरों के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 10 से 19 वर्ष की उम्र के 6,168 किशोरों से संबंधित आंकड़े जुटाए।

अध्ययन में कुल 108 स्कूलों को शामिल किया गया। शोध में एम्स गोरखपुर, गुवाहाटी, नागपुर, राजकोट और देवघर तथा जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, पुडुचेरी के शोधकर्ता शामिल रहे।

Manpreet Singh
Author: Manpreet Singh

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