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Tips for Cataract: धुंधली नजर हो गई है? हो सकते हैं मोतियाबिंद के शुरुआती संकेत, जानें डॉक्टर क्या कहते हैं?

मुख्य बातें

  • मोतियाबिंद कितनी बड़ी समस्या है? आंकड़े क्या कहते हैं
  • मोतियाबिंद क्या है और इसके प्रकार
  • मोतियाबिंद के कारण और जोखिम
  • शुरुआती लक्षण: इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
22 अगस्त 2025
Tips for Cataract
Tips for Cataract

Tips for Cataract: आंखों की रोशनी कम होना या धुंधला दिखना मोतियाबिंद (Cataract) की शुरुआत का संकेत हो सकता है। समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह बीमारी धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है और आखिरकार अंधेपन तक पहुंचा सकती है। मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर के ऑप्थल्मोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. तरुण कपूर कहते हैं कि लक्षणों को पहचानकर समय पर इलाज कराया जाए तो यह आसान होता है। यह जानकारी खासकर बुजुर्गों और कमजोर नजर वाले लोगों के लिए जरूरी है।

मोतियाबिंद कितनी बड़ी समस्या है? आंकड़े क्या कहते हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की दृष्टिहीनता और दृष्टि दोष पर फैक्ट शीट के अनुसार दुनिया में कम से कम 2.2 अरब लोगों को पास या दूर की नजर से जुड़ी कोई न कोई समस्या है। दुनिया भर में दृष्टि दोष और अंधेपन के प्रमुख कारणों में मोतियाबिंद शामिल है, जिससे लगभग 9.4 करोड़ लोग प्रभावित हैं।

भारत में भी स्थिति गंभीर है। राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टि दोष सर्वेक्षण 2015–19 के नतीजे PLOS One में प्रकाशित हुए। इनके मुताबिक 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में अंधेपन की दर 1.99% पाई गई और इसका सबसे बड़ा कारण बिना ऑपरेशन वाला मोतियाबिंद (लगभग 66.2%) था। यानी 50 साल से ऊपर के लगभग हर तीन में से दो दृष्टिहीन लोगों का अंधापन ऐसे मोतियाबिंद से है जिसका इलाज ऑपरेशन से संभव था।

मोतियाबिंद क्या है और इसके प्रकार

हमारी आंख में एक पारदर्शी लेंस होता है, जो रोशनी को रेटिना पर केंद्रित करता है। जब यह लेंस धुंधला होने लगता है, तो उसे मोतियाबिंद कहते हैं। अमेरिका के नेशनल आई इंस्टीट्यूट (NEI) के अनुसार ज्यादातर मोतियाबिंद उम्र बढ़ने के साथ लेंस के प्रोटीन में होने वाले सामान्य बदलाव से बनते हैं, और यह प्रक्रिया आमतौर पर 40 वर्ष की उम्र के आसपास शुरू हो जाती है।

  • उम्र से जुड़ा (Age-related) मोतियाबिंद: सबसे आम प्रकार, जो धीरे-धीरे बढ़ता है।
  • ट्रॉमेटिक मोतियाबिंद: आंख में चोट लगने के बाद, कभी-कभी सालों बाद भी बन सकता है।
  • कॉम्प्लिकेटेड या सेकेंडरी मोतियाबिंद: आंख की दूसरी बीमारियों, डायबिटीज या लंबे समय तक स्टेरॉयड जैसी दवाएं लेने से।
  • जन्मजात (Congenital) मोतियाबिंद: कुछ बच्चों में जन्म से या बचपन में ही होता है, जिसकी एक वजह अनुवांशिक भी हो सकती है।

मोतियाबिंद के कारण और जोखिम

NEI के अनुसार उम्र के अलावा कुछ बातें मोतियाबिंद का खतरा बढ़ाती हैं: डायबिटीज, धूम्रपान, ज्यादा शराब पीना, धूप (अल्ट्रावायलेट किरणों) में बिना सुरक्षा के लंबे समय तक रहना, स्टेरॉयड दवाओं का लंबा उपयोग, आंख की चोट या पहले हुई आंख की सर्जरी, और परिवार में मोतियाबिंद का इतिहास।

शुरुआती लक्षण: इन संकेतों को नजरअंदाज न करें

शुरुआत में मोतियाबिंद के लक्षण बहुत हल्के होते हैं और कई बार व्यक्ति को पता भी नहीं चलता। धीरे-धीरे ये संकेत दिखने लगते हैं:

  • धुंधला या धुंधला-सा दिखना, मानो किसी धुंधले शीशे से देख रहे हों
  • रंगों का फीका या पीला-सा दिखना
  • तेज रोशनी या धूप से चौंध और परेशानी
  • बल्ब या गाड़ियों की हेडलाइट के आसपास घेरे (हेलो) दिखना
  • रात में देखने में दिक्कत
  • चश्मे का नंबर बार-बार और तेजी से बदलना
  • पढ़ने में मुश्किल और एक आंख से एक चीज दो दिखना

अगर इनमें से कोई भी संकेत नजर आए, तो खुद से चश्मा बदलने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से आंखों की पूरी जांच कराएं।

Tips for Cataract: क्या है इलाज और सही सलाह?

शुरुआती अवस्था में नया चश्मा, बेहतर रोशनी और एंटी-ग्लेयर लेंस से कुछ समय राहत मिल सकती है। लेकिन NEI के अनुसार मोतियाबिंद को हटाने का एकमात्र प्रभावी तरीका सर्जरी है। जब मोतियाबिंद पढ़ने, गाड़ी चलाने या रोजमर्रा के काम में रुकावट डालने लगे, तब सर्जरी की सलाह दी जाती है। ऑपरेशन में धुंधले लेंस को निकालकर उसकी जगह कृत्रिम साफ लेंस (Intraocular Lens – IOL) लगाया जाता है। यह आमतौर पर कम समय की और सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है।

भारत में राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टि दोष नियंत्रण कार्यक्रम (NPCBVI) के तहत सरकारी अस्पतालों और अनुबंधित संस्थानों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन मुफ्त कराया जाता है। जिला अस्पताल या नजदीकी सरकारी नेत्र विभाग से इसकी जानकारी ली जा सकती है।

बचाव के उपाय

उम्र से जुड़े मोतियाबिंद को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसका जोखिम कम किया जा सकता है। धूप में यूवी-सुरक्षा वाला चश्मा पहनें, धूम्रपान छोड़ें, शराब सीमित करें, डायबिटीज को नियंत्रित रखें और हरी सब्जियों व फलों वाला संतुलित आहार लें। डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक स्टेरॉयड न लें। 40 वर्ष के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं। इस बीमारी को नजरअंदाज न करें, वरना रोशनी जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या मोतियाबिंद दवा या आई-ड्रॉप से ठीक हो सकता है?

नहीं। अभी तक मोतियाबिंद को दवा या ड्रॉप से ठीक करने का कोई प्रमाणित तरीका नहीं है। इसका प्रभावी इलाज सर्जरी ही है।

मोतियाबिंद का ऑपरेशन कब कराना चाहिए?

जब धुंधली नजर के कारण पढ़ना, गाड़ी चलाना या रोजमर्रा के काम मुश्किल होने लगें, तब नेत्र विशेषज्ञ ऑपरेशन की सलाह देते हैं। अंतिम निर्णय डॉक्टर की जांच के बाद ही लें।

क्या कम उम्र में भी मोतियाबिंद हो सकता है?

हां। चोट, डायबिटीज, स्टेरॉयड दवाओं या अनुवांशिक कारणों से कम उम्र में और बच्चों में जन्म से भी मोतियाबिंद हो सकता है।

क्या सरकारी अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन मुफ्त है?

हां। NPCBVI के तहत सरकारी अस्पतालों और कार्यक्रम से जुड़े संस्थानों में मोतियाबिंद सर्जरी निःशुल्क की जाती है।

भारत में अंधेपन का सबसे बड़ा कारण क्या है?

राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2015–19 के अनुसार 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अंधेपन का सबसे बड़ा कारण (लगभग 66.2%) बिना ऑपरेशन वाला मोतियाबिंद है।

(यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी लक्षण पर योग्य नेत्र चिकित्सक से सलाह लें।)

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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Sanjana GuptaHindi Content Writer | New Media KiranSanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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