Tips for Cataract: आंखों की रोशनी कम होना या धुंधला दिखना मोतियाबिंद की शुरुआत का संकेत हो सकता है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह बीमारी गंभीर हो सकती है। डॉ. तरुण कपूर, मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी सेंटर के ऑप्थल्मोलॉजी विभाग के प्रमुख, कहते हैं कि लक्षणों को पहचानकर इलाज कराना आसान होता है। यह खबर आंखों की देखभाल के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर बुजुर्गों और कमजोर नजर वालों के लिए।
मोतियाबिंद क्या है और इसके प्रकार
मोतियाबिंद आंख के लेंस पर धुंधला हिस्सा बनने की बीमारी है। यह ज्यादातर उम्र बढ़ने से होता है। इसके अलावा, चोट लगने से (ट्रॉमेटिक), आंख की अन्य बीमारियों से (कॉम्प्लिकेटेड) या लंबे समय तक दवाएं लेने से भी हो सकता है। अगर यह अनुवांशिक है, तो कम उम्र में भी आ सकता है। डॉक्टर कहते हैं कि यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए शुरुआत में ध्यान देना जरूरी है।
मोतियाबिंद के कारण और शुरुआती लक्षण
इस बीमारी का मुख्य कारण आंख के लेंस में प्रोटीन का टूटना है। कुछ मामलों में जन्म से ही होता है। लक्षणों में धुंधला दिखना, रंगों का फीका लगना, तेज रोशनी से परेशानी, रोशनी के आसपास घेरे दिखना, रात में देखने में दिक्कत, चश्मे का नंबर तेजी से बदलना, पढ़ने में मुश्किल, और एक चीज दो दिखना शामिल है। अगर ये संकेत नजर आएं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
Tips for Cataract: क्या है इलाज और सही सलाह?
जब मोतियाबिंद रोजाना के काम में रुकावट डाले, तो सर्जरी की सलाह दी जाती है। इसमें धुंधला लेंस निकालकर नया साफ लेंस लगाया जाता है। डॉक्टर कहते हैं कि नियमित जांच से इसे रोका जा सकता है। धूप में चश्मा पहनें, स्वस्थ खानपान रखें और दवाओं का सही इस्तेमाल करें। यह बीमारी नजरअंदाज न करें, वरना पूरी रोशनी खो सकती है।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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