UP Politics: बरेली। आंवला के पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप की नाराजगी सोशल मीडिया पर खुलकर दिखने के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है। राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने पार्टी में सम्मान न मिलने की बात कही है। प्रोफाइल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटाए जाने और ‘टाटा-बाय-बाय’ लिखे जाने की खबरों ने उनके अगले कदम को लेकर चर्चा तेज कर दी है। समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें भी लग रही हैं, हालांकि अभी किसी दल में जाने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
कश्यप लंबे समय से भाजपा में सक्रिय रहे हैं और आंवला लोकसभा सीट से पार्टी के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। 2019 में भी टिकट को लेकर उनका नाम चर्चा में रहा था। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान समर्थकों को उम्मीद थी कि उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। राज्यसभा में मौका न मिलने के बाद वही असंतोष अब सार्वजनिक हो गया है।
टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने क्या कहा?
धर्मेंद्र कश्यप का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक भाजपा के लिए काम किया, पर राज्यसभा के लिए उन्हें अवसर नहीं दिया गया। उनके अनुसार पार्टी ने कई लोगों को मौका दिया, जबकि पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई। सम्मान न मिलने की यही शिकायत उनकी नाराजगी का केंद्र है।
उन्होंने संगठन के भीतर भाई-भतीजावाद हावी होने का आरोप भी लगाया है। कहना है कि मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को अपेक्षित जगह नहीं मिल रही। एक और आरोप यह है कि कश्यप समाज के किसी बड़े नेता को आगे बढ़ाने को लेकर पार्टी के कुछ लोगों में आपत्ति है। ये बयान अभी उनके हवाले से चर्चा में हैं। पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक सफाई सामने नहीं आई है।
‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट और तस्वीर हटने का क्या मतलब है?
सोशल मीडिया पर ‘टाटा-बाय-बाय’ लिखे जाने के बाद उनके भाजपा छोड़ने की बात जोर पकड़ गई। साथ ही प्रोफाइल से प्रधानमंत्री की तस्वीर हटाए जाने की सूचना भी सामने आई। राजनीतिक हलकों में ऐसे संकेत अक्सर दूरी या असंतोष के रूप में पढ़े जाते हैं, पर अकेले पोस्ट से इस्तीफा या निष्कासन साबित नहीं होता।
अभी उनके राजनीतिक भविष्य पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। न उन्होंने भाजपा छोड़ने का पत्र सार्वजनिक किया है, न किसी दूसरी पार्टी की सदस्यता ली है। पोस्ट और प्रोफाइल बदलाव को संकेत माना जा रहा है, फैसला नहीं।
क्या वे समाजवादी पार्टी में जा रहे हैं?
सपा में शामिल होने की अटकलें इसलिए जोर पकड़ रही हैं, क्योंकि दावा किया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से उनकी बातचीत हुई है और वे जल्द पार्टी में आ सकते हैं। इस दावे की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न सपा ने बयान जारी किया है, न कश्यप ने शामिल होने की तारीख बताई है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे बदलाव अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं। आंवला और आसपास के क्षेत्र में उनकी पुरानी पहुंच को विपक्षी दल के लिए उपयोगी माना जा सकता है, पर तब तक यह अनुमान ही है, जब तक मंच पर घोषणा न हो।
आंवला और टिकट की पुरानी चर्चा क्या रही है?
धर्मेंद्र कश्यप आंवला लोकसभा से भाजपा सांसद रह चुके हैं। 2019 के चुनाव में टिकट को लेकर उनका नाम चर्चा में था। 2024 में भी समर्थक बड़ी जिम्मेदारी की उम्मीद लगाए बैठे थे। राज्यसभा का टिकट न मिलना उसी क्रम की ताजा कड़ी है।
लोकसभा और राज्यसभा की दावेदारी अलग होती है। राज्यसभा में सीटें सीमित हैं और पार्टी संगठन, समीकरण और वरिष्ठता के आधार पर नाम तय करती है। कश्यप का तर्क है कि जमीनी काम के मुकाबले दूसरों को तरजीह दी गई। पार्टी के अंदर इस तर्क पर सहमति है या नहीं, यह सार्वजनिक नहीं हुआ।
अब अगला राजनीतिक कदम क्या हो सकता है?
फिलहाल भाजपा छोड़ने या किसी दूसरे दल में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। आने वाले दिनों में तीन रास्ते चर्चा में रहेंगे—पार्टी में रहकर असंतोष जताना, औपचारिक दूरी बनाना, या सपा सहित किसी विपक्षी दल में जाना। तीसरा विकल्प अभी अटकल है।
जब तक सदस्यता या इस्तीफे की पुष्टि न हो, खबर बयान, पोस्ट और अटकलों तक सीमित है। पवन तोमर की रिपोर्ट पर आधारित इन गतिविधियों के बाद निगाहें कश्यप के अगले सार्वजनिक कदम पर टिकी हैं। राज्यसभा टिकट की नाराजगी सियासी संकेत बन चुकी है, पर पाला बदलने की मुहर अभी नहीं लगी है।
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