Jharkhand News: झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य के सभी 263 प्रखंडों में कुल 7,890 नए चापाकल लगाने का निर्णय लिया है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की इस योजना पर 96 करोड़ 54 लाख 70 हजार 810 रुपये का खर्च निर्धारित किया गया है। हर प्रखंड में 30-30 चापाकल लगाए जाएंगे, जिससे उन ग्रामीण इलाकों को राहत मिलने की उम्मीद है जहां नियमित नल से जलापूर्ति की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है। यह फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया और इसे पेयजल संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
झारखंड में नई चापाकल योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना और गर्मी के मौसम में होने वाली पानी की किल्लत को कम करना है। कई इलाकों में पुराने चापाकल खराब होने या जलस्तर गिरने के कारण लोगों को लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ता है। नए चापाकल लगाकर अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग का मानना है कि इससे घरेलू जरूरतों के लिए पानी आसानी से मिल सकेगा, खासकर उन गांवों में जहां पाइपलाइन आधारित जलापूर्ति योजना अभी पूरी तरह लागू नहीं हुई है। योजना का क्रियान्वयन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के माध्यम से किया जाएगा।
राज्य में कितने चापाकल चालू हैं और कितने खराब पड़े हैं?
विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 3 लाख 12 हजार 971 चापाकल स्थापित हैं। इनमें से लगभग 2 लाख 19 हजार 915 चापाकल चालू स्थिति में हैं, जबकि करीब 92 हजार 950 चापाकल खराब पड़े हैं। खराब चापाकलों की बड़ी संख्या के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या बनी हुई है। नए चापाकल लगाने से अतिरिक्त स्रोत तो मिलेंगे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खराब चापाकलों की मरम्मत और रखरखाव भी उतना ही जरूरी है। बिना मरम्मत के सिर्फ नए चापाकल लगाने से लंबे समय की समस्या का समाधान अधूरा रह सकता है।
जल जीवन मिशन की वर्तमान स्थिति क्या है और चापाकल क्यों जरूरी हैं?
जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य है। राज्य के लगभग 62.51 लाख घरों में से करीब 34.97 लाख घरों (लगभग 56 प्रतिशत) तक ही अब तक नल से जल की सुविधा पहुंची है। बाकी करीब 44 प्रतिशत घर अभी भी चापाकल, कुओं या अन्य प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर हैं। कई इलाकों में पाइपलाइन योजनाएं धीमी गति से चल रही हैं या तकनीकी कारणों से बाधित हैं। ऐसे में चापाकल ग्रामीण आबादी के लिए तत्काल उपलब्ध पेयजल का भरोसेमंद विकल्प बने रहते हैं। नई योजना से उन क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलने की संभावना है जहां नल-जल कवरेज कम है और गर्मी में जलस्रोत सूख जाते हैं।
इससे पहले कितनी चापाकल योजनाएं लागू हो चुकी हैं?
वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने 463 करोड़ रुपये की लागत से 4,351 ग्राम पंचायतों में 10-10 चापाकल लगाने की योजना पर काम किया था। उस योजना से भी कई इलाकों में राहत मिली थी, लेकिन बढ़ती आबादी, जलस्तर में गिरावट और पुराने चापाकलों के खराब होने के कारण अतिरिक्त चापाकल की जरूरत बनी रही। वर्तमान योजना प्रखंड स्तर पर समान वितरण पर आधारित है, जिससे हर प्रखंड के गांवों को बराबर लाभ मिलने की कोशिश की गई है। विभाग का कहना है कि पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार क्रियान्वयन की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जाएगा।
योजना से किन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
सबसे ज्यादा लाभ उन ग्रामीण इलाकों को मिलने की उम्मीद है जहां नियमित नल जलापूर्ति नहीं है या पुराने चापाकल काम नहीं कर रहे। पहाड़ी और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गर्मियों में पानी की समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। महिलाओं और बच्चों को पानी भरने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नए चापाकल लगने से घरेलू उपयोग के लिए पानी निकट उपलब्ध होगा, जिससे समय और मेहनत की बचत होगी। साथ ही पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था आसान हो सकती है। योजना का प्रभाव उन प्रखंडों में ज्यादा दिखेगा जहां जल जीवन मिशन की प्रगति धीमी रही है।
कैबिनेट में इस योजना के साथ और कौन से निर्णय लिए गए?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 62 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। चापाकल योजना के अलावा आदिवासी बहुल अविद्युतीकृत टोलों के विद्युतीकरण, गोड्डा में पशु आहार कारखाना, चांडिल क्षेत्र में सिंचाई योजना और अन्य विकास कार्यों के लिए भी राशि स्वीकृत की गई। पेयजल योजना को ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से गांवों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी।
योजना के सफल क्रियान्वयन में क्या चुनौतियां हो सकती हैं?
बड़ी संख्या में चापाकल लगाने की योजनाओं में अक्सर रखरखाव की समस्या सामने आती है। कई पुराने चापाकल इसलिए खराब पड़े हैं क्योंकि समय पर मरम्मत नहीं हुई। नए चापाकलों की गुणवत्ता, सही स्थान का चयन और नियमित निगरानी जरूरी होगी। जलस्तर गिरने वाले इलाकों में चापाकल का पानी लंबे समय तक उपलब्ध रहे, इसकी भी जांच करनी होगी। विभाग को स्थानीय स्तर पर समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी, ताकि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद गांवों तक पहुंचे।
इस योजना से झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, लंबे समय के समाधान के लिए जल जीवन मिशन को गति देने के साथ-साथ मौजूदा चापाकलों की मरम्मत पर भी ध्यान देना होगा। विभाग जल्द ही क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।
Read More Here:-
Bihar MLC Result: अनंत सिंह ने मानी हार, बोले- ‘जनता मालिक है’, जानें चुनाव का पूरा हाल
सर्दियों में क्यों बढ़ता है वजन? जानें वैज्ञानिक कारण और बचाव के उपाय
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

