
Vastu-Shastra: घर के लिए वास्तु शास्त्र क्या है?वास्तु शास्त्री उदय तिवारी से जानते हैं कि किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए: एक पारंपरिक भारतीय वास्तुकला प्रणाली है जो प्रकृति के पांच तत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और अंतरिक्ष – को दिशाओं (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और उनके संयोजन) के साथ संरेखित करती है ताकि भवन में ऊर्जा का सामंजस्यपूर्ण प्रवाह सुनिश्चित हो सके।
घरों के लिए, वास्तु का उद्देश्य ऐसा वातावरण बनाना है जो मानसिक शांति, वित्तीय कल्याण और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दे। यह इन पर ध्यान केंद्रित करता है:
- कमरों का दिशात्मक संरेखण
- प्रवेश और निकास स्थान
- वेंटिलेशन और सूरज की रोशनी
- अव्यवस्था मुक्त रहने की जगह
- रंग और फर्नीचर प्लेसमेंट जैसे आंतरिक सजावट तत्व
मुख्य प्रवेश द्वार के लिए आदर्श दिशा
वास्तु शास्त्र में मुख्य प्रवेश द्वार को “ऊर्जा का मुख” माना जाता है। यह वह जगह है जहाँ से ऊर्जा आपके घर में प्रवेश करती है और प्रवाहित होती है।
अनुशंसित दिशाएँ:
- उत्तर
- पूर्व
- उत्तर-पूर्व
इन दिशाओं को अत्यधिक शुभ माना जाता है क्योंकि ये सकारात्मक ब्रह्मांडीय ऊर्जा लाती हैं। प्रवेश द्वार घर का सबसे बड़ा दरवाज़ा होना चाहिए और घड़ी की सुई की दिशा में खुलना चाहिए।
सुझाव:
सुनिश्चित करें कि प्रवेश द्वार अच्छी तरह से प्रकाशित और साफ हो।
प्रवेश द्वार के ठीक बाहर कूड़ेदान, टूटे हुए फर्नीचर या जूते रखने से बचें।
सकारात्मकता को आमंत्रित करने के लिए प्रवेश द्वार के पास नामपट्टिका और ओम या स्वास्तिक जैसे शुभ चिह्न रखे जा सकते हैं।
Ideal direction for main entrance
The main entrance is considered the “mouth of energy” in Vastu Shastra. It is from where energy enters and flows into your home.
Recommended directions:
- North
- East
- North-east
These directions are considered highly auspicious as they bring positive cosmic energy. The entrance should be the largest door in the house and should open in a clockwise direction.