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Vastu Tips: शाम को घर का मुख्य दरवाजा क्यों खुला रखने को वास्तु में शुभ माना जाता है?

Vastu Tips: ऑफिस से लौटते ही कई घरों में कुंडी अंदर से लग जाती है। अंधेरा होने से पहले गेट बंद करना सुरक्षा लगती है। वास्तु शास्त्र मुख्य द्वार को सिर्फ लकड़ी का पल्ला नहीं मानता। इसे घर में ऊर्जा आने का रास्ता कहा गया है। मान्यता है कि शाम शुभता के आगमन का समय है। इसी घड़ी द्वार लंबे समय तक बंद रहे तो समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा अटक सकती है। सवाल यह है कि पूरी रात किवाड़ खुले रखने की बात है या सूर्यास्त के आसपास थोड़ी देर की व्यवस्था।

लोक आस्था में मां लक्ष्मी के आने का समय संध्या से जोड़ा जाता है। वास्तु उसी भाव को द्वार से बांधता है। गंदगी, अंधेरा और अव्यवस्था को ऊर्जा के विरुद्ध बताया गया है। ये बातें धार्मिक-वास्तु मान्यताएं हैं, प्रयोगशाला का प्रमाण नहीं। फिर भी घर-घर दीपक जलाने की रीति इन्हीं वाक्यों से चलती है।

Vastu Tips: शाम का द्वार बंद रखना क्यों अशुभ कहा गया

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शाम का समय शुभ माना जाता है। इसी समय लक्ष्मी के घर आने की कथा कही जाती है। मुख्य द्वार बंद हो तो समृद्धि और शुभ ऊर्जा के प्रवेश में बाधा बताई गई है। वास्तु की भाषा में लंबे समय तक शाम को द्वार बंद रखने से नकारात्मकता बढ़ सकती है। आर्थिक दिक्कतों से भी इसे जोड़ा गया है।

लंबे समय वाली शर्त ध्यान देने लायक है। मतलब सुबह से रात तक ताला नहीं, संध्या की उस घड़ी का जिक्र है जब घर लौटते हैं और दीपक जलता है। शहर में अपराध का डर अलग विषय है। स्रोत सुरक्षा गाइड नहीं, वास्तु मान्यता है। कई परिवार जाली वाला दरवाजा या ग्रिल खुला रखकर अंदर का पल्ला कुछ देर खोलते हैं। यह व्यवहार स्रोत में नहीं गिनाया गया, मान्यता सिर्फ बंद न रखने पर टिकी है।

सूर्यास्त पर ऊर्जा बदलने की बात क्या है

वास्तु शास्त्र कहता है कि सूर्यास्त के समय वातावरण की ऊर्जा बदलती है। मुख्य द्वार कुछ समय के लिए खुला रखने से सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती मानी गई है। इससे घर शांत और खुशहाल रहने का विश्वास जुड़ा है। ‘कुछ समय’ शब्द यहां संतुलन देता है। रात भर आंगन खुला छोड़ने का आदेश इस विवरण में नहीं है।

देखने पर लगता है संध्या आरती और द्वार खोलने की रीति एक ही भाव से निकली। प्रकाश अंदर आए, हवा चले, घर जागा रहे। वास्तु इसे बरकत कहता है। वैज्ञानिक नाम नहीं देता। जो आस्था रखते हैं, वे सूरज डूबते ही किवाड़ बंद करके सो नहीं जाते। थोड़ी देर आंगन-बरामदा जगा रहता है।

मुख्य द्वार पर दीपक और जल का छिड़काव

शाम को मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा पुरानी है। मान्यता है कि दीये की रोशनी से घर में शुभता आती है। अंधेरा द्वार नकारात्मकता खींचता बताया गया है। इसलिए संध्या दीपक सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं रहता, देहरी तक पहुंचता है।

गंगाजल या साफ जल का छिड़काव भी शुभ माना गया है। इससे नेगेटिविटी हटने और माहौल सकारात्मक रहने की बात कही गई है। महंगे अनुष्ठान की जरूरत इस सूची में नहीं। एक दीया और स्वच्छ जल ही उपाय बताए गए हैं। मामला कुछ इस तरह से सरल रखा गया है कि रोजाना निभ सके।

छोटा ट्विस्ट यही है। लोग वास्तु के नाम पर पीतल के बड़े कलश और नक्काशीदार पटिया खरीदते हैं। दी गई सलाह दीपक, जल और सफाई तक सिमटी है। दिखावा सूची में नहीं आया।

Vastu Tips: गंदगी और अंधेरा द्वार पर क्यों न रखें

मुख्य द्वार पर कचरा, बिखरे जूते की अव्यवस्था और अंधेरा नहीं रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार साफ और रोशन द्वार शुभ ऊर्जा खींचता है। इसलिए इस स्थान को हमेशा व्यवस्थित रखने की सलाह है। शाम के इन नियमों को परिवार की बरकत और खुशहाली से जोड़ा गया है।

गली में कूड़ा हो या देहरी पर टूटा गमला पड़ा हो, पहली छाप वहीं बनती है। आस्था वाले इसे लक्ष्मी का रास्ता कहते हैं। व्यावहारिक भाषा में मेहमान और घर वाले दोनों उसी फ्रेम से अंदर आते हैं। रोशनी हो तो ठोकर भी कम लगती है। मान्यता और रोजमर्रा यहां मिल जाते हैं।

जानकार बताते हैं कि द्वार घर का चेहरा माना गया है। चेहरा मैला हो तो बाकी कमरे चाहे सजे हों, पहली ऊर्जा गंदी ही पढ़ी जाती है। वास्तु उसी पहली ऊर्जा की बात करता है।

वास्तु शास्त्र मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार मानता है। शाम लक्ष्मी आगमन का समय कही गई है। लंबे समय तक द्वार बंद रखने से शुभता और समृद्धि अटकने की मान्यता है। सूर्यास्त पर कुछ देर द्वार खुला रखने, दीपक जलाने और गंगाजल या साफ जल छिड़कने को सकारात्मक बताया गया है। गंदगी, अव्यवस्था और अंधेरा वर्जित है। ये बातें आस्था और लोक रीति पर टिकी हैं। वैज्ञानिक दावा नहीं किया गया। जो मानते हैं, वे संध्या की घड़ी में देहरी साफ और रोशन रखते हैं। कितनी देर किवाड़ खुला रहे, यह परिवार की सुविधा और सुरक्षा के हिसाब से तय होता है। मान्यता का सार बंद अंधेरे द्वार से बचने का है।

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Author: Sanjna Gupta

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