*पटना, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ में मुख्यमंत्री राहत कोष न्यासी पर्षद की 23वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राहत कोष से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई और मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
राहत कोष की भूमिका
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में लोगों की मदद करना है। इसके साथ ही, यह विभिन्न कार्यों में भी लोगों की सहायता करता है, जिससे प्रभावित व्यक्तियों को काफी लाभ होता है। उन्होंने इस कोष की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

बाढ़ आश्रय स्थलों का निर्माण
बैठक के दौरान, आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्री अनुपम कुमार ने बताया कि 10 बाढ़ प्रभावित जिलों में 100 बाढ़ आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए अब तक 99 करोड़ 43 लाख 91 हजार 35 रुपये की राशि निर्गत की जा चुकी है। इनमें से 77 बाढ़ आश्रय स्थलों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष बचे आश्रय स्थलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने शेष बाढ़ आश्रय स्थलों का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
अनुग्रह अनुदान सहायता
बैठक में राज्य के बाहर विभिन्न दुर्घटनाओं में बिहार के 139 मृतकों के आश्रितों और 61 गंभीर रूप से घायलों को तथा राज्य के अंदर विभिन्न आपदाओं में हुई 156 व्यक्तियों की मृत्यु के कारण मृतकों के परिजनों को अनुग्रह अनुदान सहायता राशि के रूप में कुल 9 करोड़ 32 लाख रुपये के व्यय की स्वीकृति दी गई।
उपस्थित सदस्य
इस बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री संतोष कुमार सुमन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा, पुलिस महानिदेशक श्री आलोक राज, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इस प्रकार, मुख्यमंत्री राहत कोष न्यासी पर्षद की यह बैठक आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को प्रभावी बनाने हेतु महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

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