Jharkhand Law & Order: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, नशाखोरी के खिलाफ अभियान और पुलिस हिरासत में होने वाली घटनाओं पर लगाम लगाना रहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पुलिस बल को जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा और अधिकारियों को केवल दफ्तरों तक सीमित न रहकर सीधे जनता के बीच जाना होगा।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष रणनीति की जरूरत
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में महिलाओं और बच्चों के लापता होने के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे संवेदनशील मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी किसी बच्चे या महिला के गायब होने की सूचना मिले तो पुलिस को बिना समय गंवाए तत्काल कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सुझाव दिया कि इन मामलों की नियमित निगरानी के लिए एक विशेष सेल की सक्रियता बढ़ाई जाए और तकनीकी संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री का मानना है कि ऐसे मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और यदि पुलिस तत्परता दिखाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
नशा माफियाओं के सप्लाई चेन को ध्वस्त करने का आदेश

झारखंड में पैर पसार रहे नशा कारोबार पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री ने पुलिस को फ्री हैंड देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पुलिस को केवल पुड़िया बेचने वाले छोटे अपराधियों को पकड़कर संतोष नहीं कर लेना चाहिए। असली चुनौती उन बड़े नशा माफियाओं को पकड़ना है जो इस पूरी सप्लाई चेन को चला रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पुलिस को नशा कारोबार के पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच करनी चाहिए और इसके स्रोत तक पहुंचना चाहिए। विशेष रूप से खूंटी, चतरा और राजधानी रांची जैसे संवेदनशील जिलों में अफीम की खेती के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की बात कही गई। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि नशे की वजह से राज्य की युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है और इसे रोकने के लिए सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाने जरूरी हैं।
पुलिस अधिकारियों को गांवों का दौरा करने और जनता की सुनने की हिदायत
बैठक में मुख्यमंत्री ने पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए कई प्रशासनिक निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि अक्सर यह शिकायतें मिलती हैं कि जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जैसे एसपी और डीएसपी आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं होते। मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए कि सभी पुलिस अधिकारियों को एक निश्चित समय तय करना होगा जब वे अपने कार्यालयों में मौजूद रहकर जनता की समस्याएं सुनें। इसके अलावा उन्होंने पुलिस अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों का नियमित दौरा करने का निर्देश दिया ताकि गांवों में रहने वाले लोगों के भीतर सुरक्षा का भाव पैदा हो सके। जमीन विवाद के मामलों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी द्वारा भू-माफियाओं को संरक्षण देने की बात सामने आई तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हिरासत में प्रताड़ना और मौत पर जीरो टॉलरेंस की नीति
झारखंड में पिछले कुछ समय में पुलिस हिरासत में यातना और संदिग्ध मौतों के मामलों को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हिरासत में मौत किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को निर्देश दिया कि पुलिस थानों में मानवाधिकारों का उल्लंघन रोकने के लिए उचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिरासत में यातना की घटनाओं पर सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी। यदि ऐसी कोई भी घटना दोबारा होती है तो संबंधित थाना प्रभारी से लेकर जिले के बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। पुलिस को यह समझना होगा कि उनका काम अपराधियों में भय पैदा करना है न कि आम नागरिकों को प्रताड़ित करना।
पुलिस बल को संसाधन और संरक्षण देने का भरोसा
एक तरफ जहां मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाई वहीं दूसरी तरफ उन्होंने पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस को जिन संसाधनों की आवश्यकता है वह सरकार उपलब्ध कराएगी। नए वाहनों की खरीद, आधुनिक हथियारों और जांच के लिए नवीनतम तकनीकी उपकरणों की कमी को जल्द दूर किया जाएगा। उन्होंने पुलिस कर्मियों को भरोसा दिलाया कि जो अधिकारी ईमानदारी और निडरता से अपना काम करेंगे उन्हें सरकार का पूरा संरक्षण प्राप्त होगा। संगठित अपराध के खिलाफ अभियान चला रहे पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार विशेष पुरस्कार और सम्मान की योजना पर भी विचार कर रही है।
उच्चस्तरीय बैठक में मौजूद रहे प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के प्रशासनिक और पुलिस जगत के कई बड़े चेहरे शामिल हुए। मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने राज्य की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा पेश किया जबकि गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने कानून-व्यवस्था को लेकर विभाग द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि उनके निर्देशों का पालन धरातल पर सुनिश्चित किया जाएगा और अपराध नियंत्रण के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अंत में सभी अधिकारियों को एक टीम की तरह काम करने की सलाह दी ताकि झारखंड को एक अपराध मुक्त और सुरक्षित प्रदेश बनाया जा सके।
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