रांची: झारखंड में मार्च 2025 में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के बाद किसानों की फसलों को हुए नुकसान का आकलन शुरू हो गया है। राज्य की कृषि, पशुपालन और सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने फसल नुकसान के मुआवजे के भुगतान को लेकर आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी से बात की है। मंत्री के निर्देश पर मांडर विधानसभा क्षेत्र के सभी पांच प्रखंडों में अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है।
Crops destroyed by hail:ओलावृष्टि से नष्ट हुए फसल का मुआवजा देगी झारखंड सरकार: शिल्पी नेहा तिर्की
मुख्य बातें
- तीन दिन में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
- आपदा प्रबंधन मंत्री का आश्वासन
- बारिश और ओले से खेतों में भारी नुकसान
- किसान क्या करें

तीन दिन में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश
द फॉलोअप की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने अधिकारियों को फसल नुकसान वाले खेतों का स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। इसके बाद प्रखंड और अंचल के पदाधिकारियों को तीन दिनों के अंदर जिला मुख्यालय में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान जल्द से जल्द करने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया है।
शिल्पी नेहा तिर्की मांडर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। ईटीवी भारत ने भी कृषि मंत्री के इन निर्देशों की खबर दी।
आपदा प्रबंधन मंत्री का आश्वासन
आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी ने आश्वस्त किया है कि सरकार किसानों को मुआवजा देने के लिए जल्द ही उचित कदम उठाएगी। फसल नुकसान के मुआवजे का भुगतान आमतौर पर आपदा राहत के नियमों के तहत आकलन रिपोर्ट के आधार पर होता है, इसलिए खेतों का सही निरीक्षण और समय पर रिपोर्ट इस प्रक्रिया की पहली कड़ी है।
बारिश और ओले से खेतों में भारी नुकसान
रिपोर्टों के अनुसार, लगातार 24 घंटे तक हुई बारिश और ओलावृष्टि के बाद किसानों ने खेतों में खड़ी फसल को भारी नुकसान की शिकायत की। टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी राज्य में ओलावृष्टि से किसानों की फसलें बर्बाद होने की खबर दी। मार्च का महीना रबी फसलों की कटाई और सब्जियों की खेती के लिहाज से अहम होता है, इसलिए इस समय ओलावृष्टि किसानों के लिए दोहरी मार साबित होती है।
किसान क्या करें
फसल नुकसान की स्थिति में किसानों के लिए कुछ जरूरी कदम उपयोगी हो सकते हैं:
- नुकसान की जानकारी जल्द से जल्द प्रखंड कृषि कार्यालय या अंचल कार्यालय को दें।
- खेत में हुए नुकसान की तस्वीरें सुरक्षित रखें, ताकि आकलन के समय सबूत रहे।
- अगर फसल बीमा कराया है तो बीमा कंपनी या प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल/हेल्पलाइन पर तय समय के भीतर नुकसान की सूचना दें।
- जमीन के कागजात और बैंक खाते का विवरण तैयार रखें, ताकि मुआवजा मिलने में देरी न हो।
बोरेया के किसानों का दर्द
टाइम्स ऑफ इंडिया की टीम ने रांची के बाहरी इलाके बोरेया में खेतों का दौरा कर नुकसान देखा। यहां के लोग मुख्य रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। स्थानीय किसान दशमी देवी ने बताया कि ढाई महीने की मेहनत सिर्फ दो दिनों में बर्बाद हो गई। उनके अनुसार ओलावृष्टि से करीब एक क्विंटल टमाटर और सात से आठ क्विंटल पत्तागोभी को नुकसान पहुंचा।
करीब एक एकड़ जमीन पर भिंडी, पत्तागोभी और टमाटर उगाने वाले किसान गिरिधर महतो ने कहा कि वे अपनी उपज आसपास के बाजारों में बेचते हैं और इस बारिश ने उनके कारोबार को भारी चोट पहुंचाई है। रिपोर्ट के अनुसार कई किसानों ने समय पर और पर्याप्त मुआवजा मिलने को लेकर संदेह भी जताया, क्योंकि उनके मुताबिक पहले के आश्वासन पूरे नहीं हुए थे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
फसल नुकसान का आकलन कहां शुरू हुआ?
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के निर्देश पर मांडर विधानसभा क्षेत्र के सभी पांच प्रखंडों में फसल नुकसान का आकलन शुरू हुआ।
अधिकारियों को रिपोर्ट के लिए कितना समय दिया गया?
प्रखंड और अंचल के पदाधिकारियों को तीन दिनों के अंदर जिला मुख्यालय में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया।
मुआवजे पर सरकार ने क्या कहा?
आपदा प्रबंधन मंत्री इरफान अंसारी ने आश्वस्त किया कि सरकार किसानों को मुआवजा देने के लिए जल्द उचित कदम उठाएगी।
किसान नुकसान की सूचना कहां दें?
किसान प्रखंड कृषि कार्यालय या अंचल कार्यालय में सूचना दें। फसल बीमा कराने वाले किसान बीमा कंपनी या पीएमएफबीवाई पोर्टल पर भी तय समय में सूचना दें।

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