Jharkhand News: झारखंड के गढ़वा जिले में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। एक आपूर्तिकर्ता ने खुद और अपने 22 परिवार वालों को योजना का लाभ दिलाने के लिए फर्जी कागजात बनाए। असली सामान तो कहीं पहुंचा ही नहीं, लेकिन पैसे निकाल लिए गए। यह धांधली गव्य विकास विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हुई। जिले में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना घोटाला अब जांच के दायरे में है। गरीब किसानों के लिए बनी यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।
योजना में फर्जीवाड़ा: आपूर्तिकर्ता की चालाकी का खेल

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी स्कीम है। इसके तहत किसानों को गाय, चारा, मशीनें और बोरिंग जैसी सुविधाएं सस्ते में मिलती हैं। लेकिन गढ़वा के रामना प्रखंड के माधवनीया गांव के रहने वाले आपूर्तिकर्ता उपेंद्र यादव ने इसका दुरुपयोग किया। उन्होंने खुद और 22 रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी लाभार्थी बनाए। पैसे निकालने के बाद सामान की डिलीवरी का झूठा रिकॉर्ड बनाया। यह खेल 2019-20 से 2023-24 तक चला।
फर्जी लाभार्थियों की लिस्ट: परिवार ही परिवार
उपेंद्र यादव ने अपने पूरे परिवार को योजना का फायदा पहुंचाया। मुख्य नाम इस प्रकार हैं:
- उपेंद्र यादव: खुद के नाम पर 4 बार लाभ।
- पत्नी सुश्मा देवी: 5 बार।
- भाई महेंद्र यादव: 4 बार।
- भाई सुरेंद्र यादव: 3 बार।
- भाभी अनीता देवी: 2 बार।
- भाभी प्रमिला देवी: 2 बार।
- मां कौली कुँवर: 1 बार।
- रिश्तेदार विजय यादव की पत्नी प्रतिमा देवी: 1 बार।
सभी लाभार्थी माधवनीया गांव के ही हैं। उपेंद्र ने योजना के तहत गाय, चारा भंडार, बोरिंग, चारा काटने की मशीन, दूध निकालने की मशीन और वर्मीकम्पोस्ट यूनिट जैसी चीजों का फर्जी दावा किया। लेकिन जमीन पर कुछ नहीं पहुंचा। करोड़ों रुपये उनके खाते में चले गए।
घोटाले का तरीका: विभाग की मिलीभगत से आसान खेल
यह फर्जीवाड़ा गव्य विकास विभाग के जिला स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठ-गांठ से संभव हुआ। फर्जी कागजात बनाकर पैसे निकाले गए। सामान की सप्लाई का झूठा बिल पास कराया। योजना के कई उप-स्कीमों में धांधली हुई, जैसे 5 गायों की स्कीम (दो बार), 2 गायों की स्कीम, चारा गोदाम, दो डीप बोरिंग, गाय का गद्दा, पनीर-खोया यूनिट, ऑर्गेनिक खाद यूनिट, इलेक्ट्रिक चारा मशीन, हैंड चारा मशीन, मिल्किंग मशीन और वर्मीकम्पोस्ट यूनिट।
विभाग पर सवाल: पहले भी हुए घोटाले
गव्य विकास विभाग में पहले भी कई घोटाले उजागर हो चुके हैं। इस बार माधवनीया गांव के सभी नाम एक ही परिवार के होने से बात पकड़ में आई। जिला गव्य विकास अधिकारी गिरीश कुमार ने कहा, “मैं उस समय गढ़वा में तैनात नहीं था। अब बिहार चुनाव में हूं, लेकिन लौटकर पूरी जांच करूंगा। लिस्ट वेरिफाई करके दोषियों पर कार्रवाई होगी।” विभाग ने जांच टीम गठित की है।



