Jharkhand News: झारखंड के लातेहार जिले में पुलिस को नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। जेजेएमपी संगठन के दो प्रमुख उग्रवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें गुमला जिले का निवासी 5 लाख रुपये का इनामी सब जोनल कमांडर ब्रजेश यादव और लातेहार के हेरहंज का रहने वाला एरिया कमांडर अवधेश लोहरा शामिल हैं। यह सरेंडर बुधवार को हुआ, जिसे पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की सफलता बताया। झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति उग्रवादियों को मुख्यधारा में लाने का प्रभावी माध्यम है। लातेहार एसपी कुमार गौरव ने दावा किया कि जिले में अब मात्र 4-5 नक्सली बचे हैं और मार्च 2026 तक लातेहार को पूरी तरह नक्सल मुक्त बना दिया जाएगा।
लातेहार सरेंडर मामला: सरेंडर की पूरी कहानी
लातेहार जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को नई ताकत मिली है। जेजेएमपी संगठन के दो कुख्यात उग्रवादियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। ब्रजेश यादव, जो 5 लाख रुपये का इनामी था, गुमला जिले का निवासी है। वह सब जोनल कमांडर के रूप में सक्रिय था और कई घटनाओं में शामिल रहा। वहीं, अवधेश लोहरा लातेहार के हेरहंज थाना क्षेत्र का रहने वाला है और एरिया कमांडर था। दोनों ने बुधवार को लातेहार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। सरेंडर समारोह में पलामू आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने दोनों का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति काफी बेहतर है। इसका लाभ उठाकर उग्रवादी अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।”
सरेंडर के बाद पुलिस का बयान
पलामू आईजी शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि लातेहार जिले में वर्ष 2025 में अब तक 21 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है, जिनमें कई इनामी भी शामिल हैं। यह बड़ी उपलब्धि है। लातेहार एसपी कुमार गौरव ने कहा, “लातेहार जिले में अब मात्र 4 से 5 उग्रवादी ही बचे हैं। बचे उग्रवादियों के पास मार्च 2026 तक का समय है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उग्रवादी या तो आत्मसमर्पण करेंगे या फिर मारे जाएंगे। इस मौके पर सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट राजेश सिंह, सीआरपीएफ के कमांडेंट यादराम बुनकर समेत अन्य उपस्थित थे।
पुनर्वास नीति: मुख्यधारा में लौटने का मौका
झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत सरेंडर करने वाले उग्रवादियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिलता है। नीति में वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार का प्रावधान है। सरेंडर करने वालों को 2.5 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। इसके अलावा, परिवार को सुरक्षा और शिक्षा की सुविधा मिलती है। इस नीति ने 2025 में 21 सरेंडर कराए हैं। आईजी ने कहा कि यह नीति उग्रवादियों को हिंसा से दूर कर सामान्य जीवन जीने का मौका देती है।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान: लातेहार को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य
लातेहार जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। एसपी कुमार गौरव ने कहा कि मार्च 2026 तक जिले को पूरी तरह नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य है। बचे उग्रवादियों को आत्मसमर्पण का मौका दिया जा रहा है। पुलिस ने सशस्त्र बलों के साथ संयुक्त अभियान तेज कर दिया है। इस सफलता से स्थानीय लोग उत्साहित हैं। एक ग्रामीण ने कहा, “सरेंडर से गांव में शांति आएगी।” यह घटना झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को मजबूत करती है।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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