Jharkhand Cabinet: झारखंड सरकार ने खनिजों पर नया सेस लगाने का बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट बैठक में कोयला समेत अन्य खनिजों पर यह टैक्स मंजूर हो गया। इससे राज्य की कमाई बढ़ेगी और महिलाओं के लिए माईया सम्मान योजना का फंड मजबूत होगा। यह कदम राज्य की आर्थिक ताकत को मजबूत करेगा। खनन क्षेत्र से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा अब महिलाओं के कल्याण पर लगेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में यह निर्णय आया, जो चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में है। सेस से मिलने वाले पैसे से योजना को और मजबूत बनाया जाएगा।
सेस का क्या है मतलब? कोयला पर कितना लगेगा?
झारखंड खनिजों का खजाना है, और कोयला यहां की कमाई का मुख्य स्रोत है। कैबिनेट ने कोयला, बॉक्साइट, लौह अयस्क जैसे खनिजों पर 10 से 15 फीसदी तक सेस लगाने को हरी झंडी दे दी। यह सेस खनन कंपनियों से वसूला जाएगा। पहले से चल रहे रॉयल्टी के अलावा यह नया टैक्स होगा। सरकार का अनुमान है कि सालाना 2000 से 3000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है। यह पैसे सीधे राज्य कोष में जाएंगे। मुख्य सचिव ने कहा, “यह कदम खनन से होने वाले फायदे को आम लोगों तक पहुंचाने का है। सेस लगाने से कंपनियों पर बोझ पड़ेगा, लेकिन राज्य विकास के लिए जरूरी है। इससे बुनियादी ढांचे और कल्याण योजनाओं को बल मिलेगा। खनन माफिया पर भी नकेल कसेगी यह व्यवस्था। कुल मिलाकर, सेस झारखंड की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देगा।
माईया फंड कैसे बनेगा मजबूत? महिलाओं को क्या फायदा?
माईया सम्मान योजना झारखंड की महिलाओं के लिए गेम चेंजर है। इसमें 21 साल से ऊपर की महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये मिलते हैं। लेकिन फंड की कमी से भुगतान में देरी हो रही थी। अब सेस से मिलने वाले पैसे से यह फंड भरपूर हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “सेस की कमाई से माईया योजना को और मजबूत करेंगे, ताकि हर महिला समय पर पैसे पा सके। योजना के तहत अब तक 50 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। सेस से सालाना 1000 करोड़ रुपये योजना के लिए अलग रखे जा सकते हैं। इससे न सिर्फ भुगतान नियमित होगा, बल्कि योजना का दायरा भी बढ़ेगा। ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। यह फैसला आगामी चुनावों से पहले महिलाओं को खुश करने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य का सामाजिक विकास तेज होगा। महिलाएं अब आर्थिक रूप से स्वतंत्र महसूस करेंगी।



