डेस्क:सर्दियों का मौसम कई लोगों के लिए राहत का समय होता है, लेकिन जिन लोगों को पहले कभी फ्रैक्चर, मांसपेशियों में खिंचाव, लिगामेंट इंजरी या जोड़ों की बीमारी रही हो, उनके लिए यह मौसम दर्द को बढ़ाने वाला बन जाता है। पुराने घाव और चोटें ठंड में अचानक क्यों दर्द करने लगती हैं, यह एक आम सवाल है। डॉक्टरों के अनुसार इसके पीछे कई वैज्ञानिक और शारीरिक कारण जिम्मेदार हैं जो शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया से जुड़े हैं।
ठंड में रक्त प्रवाह कम होना
जैसे ही मौसम का तापमान गिरता है, शरीर की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। इसे वेसोकंस्ट्रिक्शन कहा जाता है। इसके कारण खून का प्रवाह प्रभावित हिस्सों तक कम पहुंच पाता है। पुरानी चोट वाले हिस्सों में ऊतक पहले से कमजोर होते हैं, ऐसे में खून का कम पहुंचना दर्द, जकड़न और असहजता को बढ़ा देता है। यही वजह है कि कई लोग सर्दियों में फ्रैक्चर या सर्जरी वाले भाग में अधिक दर्द महसूस करते हैं।
जॉइंट फ्लूइड का गाढ़ा होना
हमारे जोड़ों में मौजूद साइनोवियल फ्लूइड हड्डियों को आसानी से हिलने-डुलने में सहायता करता है। डॉक्टर बताते हैं कि ठंड में यह फ्लूइड गाढ़ा हो जाता है। जब यह मोटा हो जाता है, तो जोड़ों की गतिशीलता कम हो जाती है और दर्द बढ़ जाता है। जिन लोगों को घुटने, कंधे या रीढ़ की हड्डी में चोट लगी हो, वे सर्दियों में इस समस्या से अधिक परेशान होते हैं।
पुराने ऊतकों की संवेदनशीलता बढ़ना
पुरानी चोटों के आसपास के मांसपेशी और नरम ऊतक पूरी तरह पहले जैसे मजबूत नहीं बन पाते। यही कारण है कि तापमान का छोटा सा बदलाव भी इन हिस्सों को प्रभावित करता है। ठंड इन ऊतकों को और कठोर बना देती है जिससे दर्द और खिंचाव महसूस होता है। यही कारण है कि किसी भी पुरानी चोट वाले व्यक्ति को मौसम बदलते ही दर्द बढ़ने लगता है।
हवा के दबाव में बदलाव
सर्दियों में अक्सर वायुदाब कम हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार कम वायुदाब में शरीर के ऊतक हल्के से फूल जाते हैं। यह सूजन पुराने घायल हिस्सों पर दबाव डालती है, जिसके कारण दर्द बढ़ जाता है। गठिया और पुरानी हड्डी की चोट वाले मरीजों में यह समस्या ठंड के मौसम में अधिक दिखाई देती है।
मांसपेशियों का टाइट होना
ठंड के कारण शरीर की मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं और यह टाइटनेस चोट वाले हिस्सों में अधिक होती है। कमजोर मसल्स जब सख्त होने लगती हैं तो दर्द और जकड़न बढ़ जाती है। ऐसे में मूवमेंट करना मुश्किल होने लगता है और हलचल से भी दर्द महसूस होता है। इसलिए सर्दियों में वार्म-अप और स्ट्रेचिंग का महत्व और बढ़ जाता है।
कौन लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं?
डॉक्टर्स के अनुसार सर्दियों में वो लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं जिनकी पहले सर्जरी, फ्रैक्चर, लिगामेंट इंजरी, मसल पुल या जोड़ों की बीमारी रही हो। इसके अलावा जिन्हें ऑस्टियोआर्थराइटिस या रुमेटोइड आर्थराइटिस है, वे भी इस मौसम में अधिक दर्द महसूस करते हैं। इन मरीजों में मौसम की ठंडक उनके जोड़ों और मांसपेशियों के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा करती है।
दर्द से राहत कैसे मिले? डॉक्टर की सलाह
सर्दियों में पुराने दर्द को नियंत्रित करने के लिए शरीर को गर्म रखना बेहद जरूरी है। थर्मल वियर पहनना, गर्म मोजे, कैप, स्कार्फ और हीट पैक का इस्तेमाल पुरानी चोटों में राहत देता है। नियमित स्ट्रेचिंग और हल्का व्यायाम मांसपेशियों को गर्म रखता है और रक्त प्रवाह बढ़ाता है, जिससे दर्द कम होता है। हल्की गर्म सिंकाई करने से भी काफी राहत मिलती है क्योंकि इससे खून का प्रवाह बढ़ता है और जकड़न कम होती है।
इसके अलावा डॉक्टर विटामिन D और कैल्शियम की कमी की जांच कराने की सलाह देते हैं, क्योंकि इनकी कमी भी दर्द को बढ़ाती है। एंटी-इंफ्लेमेटरी खाद्य पदार्थ जैसे हल्दी, अदरक, अखरोट और अलसी दर्द को कम करने में मददगार होते हैं।
निष्कर्ष:
सर्दियों में पुरानी चोटों का दर्द बढ़ना एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है, जिसका संबंध तापमान, रक्त संचार, जोड़ों की गतिशीलता और वायुदाब से है। हालांकि यह दर्द परेशान कर सकता है, लेकिन सही देखभाल, नियमित व्यायाम, गर्माहट और डॉक्टर की सलाह से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि दर्द लगातार बढ़ रहा हो या सूजन ज्यादा हो जाए, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। ठंड में शरीर को सक्रिय और गर्म रखकर आप सर्दियों के दौरान इस दर्द से काफी हद तक बच सकते हैं।



