Bengaluru News: बेंगलुरु में एक कैब ड्राइवर को पनीर टिक्का रोल में छिपकली मिलने का मामला सामने आने के बाद शहरों में बिकने वाले खाने की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। तेज रफ्तार जिंदगी में लाखों लोग रोजाना बाहर का खाना खाते हैं लेकिन स्वच्छता और गुणवत्ता की अनदेखी से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहा है।
शहरों की भागती जिंदगी में बाहर का खाना मजबूरी बन चुका है लेकिन हालिया घटनाएं इस भरोसे को हिला रही हैं। बेंगलुरु के अगराहार दसराहल्ली निवासी 32 वर्षीय कैब ड्राइवर दीपू एनके ने मगदी मेन रोड स्थित एक बेकरी से खरीदे गए पनीर टिक्का रोल में छिपकली पाए जाने का आरोप लगाया। खाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है जबकि बेकरी आरोपों से इनकार कर रही है।
Bengaluru News: बेंगलुरु में पनीर टिक्का रोल में छिपकली का मामला क्या है?
दीपू ने बताया कि भूख लगने पर उन्होंने पहले हनी केक खाया और फिर पनीर टिक्का रोल लिया। कुछ हिस्सा खाने के बाद रोल में छिपकली दिखाई दी। जब उन्होंने शिकायत की तो बेकरी स्टाफ ने दुकान साफ होने का दावा किया। बहस बढ़ने पर दीपू की तबीयत बिगड़ी जिसमें उल्टी और दस्त के लक्षण दिखे।
मामला गोविंदराज नगर पुलिस स्टेशन पहुंचा जहां जांच चल रही है। इस घटना में कथित छिपकली की कोई तस्वीर या ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है जिससे विवाद और बढ़ गया है। बेकरी प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी दुकान मानकों के अनुसार चलती है।
यह घटना पहली नजर में स्थानीय लगती है लेकिन यह बड़े पैमाने पर शहरी खाद्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है जहां प्रतिस्पर्धा में स्वाद और मुनाफे को प्राथमिकता दी जाती है।
शहरों में खाद्य सुरक्षा की स्थिति कैसी है?
देश के महानगरों में बेकरी, फास्ट फूड सेंटर, रोल स्टॉल और क्लाउड किचन की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कामकाजी लोगों की व्यस्तता के कारण घर का खाना कम हो रहा है और बाहर का खाना रोजमर्रा की जरूरत बन गया है।
कई जगहों पर किचन संकरे और अस्वच्छ पाए जाते हैं। खाद्य सामग्री खुले में रखी जाती है और कभी कभी एक्सपायरी उत्पादों का इस्तेमाल भी होता है। कर्मचारियों को बुनियादी स्वच्छता प्रशिक्षण की कमी भी आम समस्या है।
खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियम मौजूद हैं लेकिन उनका प्रभावी पालन चुनौती बना हुआ है। निरीक्षण अक्सर कागजी कार्यवाही तक सीमित रह जाते हैं और अचानक जांच की संख्या कम होती है।
खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों का शहरी जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
ऐसी घटनाएं आम लोगों के स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करती हैं। खाने से जुड़ी बीमारियां जैसे उल्टी दस्त और फूड पॉइजनिंग के मामले बढ़ रहे हैं जिससे अस्पतालों पर बोझ बढ़ता है और कामकाजी लोगों की उत्पादकता प्रभावित होती है।
एफएसएसएआई के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग चार लाख खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इसमें 1.65 लाख से अधिक सैंपल जांचे गए जिनमें 17.16 प्रतिशत नॉन कन्फॉर्मिंग पाए गए। 23,580 निर्णय मामले निपटाए गए और 1,756 आपराधिक दोषसिद्धियां हुईं। कुल 154.87 करोड़ रुपये के वित्तीय जुर्माने लगाए गए।
इन आंकड़ों से साफ है कि उल्लंघन की समस्या व्यापक है। सड़क किनारे के ठेले से लेकर बड़े रेस्तरां तक में स्वच्छता की कमी से लाखों लोग रोजाना जोखिम उठा रहे हैं।
Bengaluru News: विशेषज्ञ खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर क्या कहते हैं?
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निरीक्षण तंत्र में और मजबूती की जरूरत है। एफएसएसएआई के प्रयासों के बावजूद राज्य स्तर पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कमी और संसाधनों की अपर्याप्तता बड़ी चुनौती बनी हुई है।
एक खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित और आकस्मिक निरीक्षण बढ़ाने के साथ साथ खाद्य व्यवसायियों को स्वच्छता प्रशिक्षण अनिवार्य करना चाहिए।
एफएसएसएआई ने स्ट्रीट फूड वेंडर्स को मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए हैं और 10 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को औपचारिक निगरानी में लाया गया है। फिर भी उच्च जोखिम वाले खाद्य श्रेणियों पर फोकस और शिकायतों का समयबद्ध निपटारा अभी भी सुधार की मांग करता है। शहरों में बढ़ती आबादी और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के विस्तार ने चुनौतियों को और जटिल बना दिया है।
Bengaluru News: आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं ताकि शहरों का खाना सुरक्षित बने?
सरकार और एफएसएसएआई को खाद्य निरीक्षण तंत्र की समीक्षा करनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संख्या बढ़ानी होगी और आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रियल टाइम मॉनिटरिंग लागू करनी चाहिए।
उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहना चाहिए। खाने से पहले दुकान की स्वच्छता देखें, फूड पैकिंग की स्थिति जांचें और किसी समस्या पर तुरंत शिकायत दर्ज करें। एफएसएसएआई हेल्पलाइन या ऐप का उपयोग उपयोगी साबित हो सकता है।
खाद्य व्यवसायियों के लिए स्वच्छता मानकों का पालन अनिवार्य बनाना और उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई जारी रखना जरूरी है। साथ ही जन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षित खानपान की आदतें सिखाई जा सकती हैं।
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