नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट इन दिनों नशा तस्करों के लिए पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। कस्टम विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि यहां से हर महीने करोड़ों रुपये के ड्रग्स पकड़े जा रहे हैं। खासकर बैंकॉक से आने वाली फ्लाइट्स में तस्करी के मामले सबसे ज्यादा हैं। पिछले एक साल में यहां से करीब 133 करोड़ रुपये की कीमत के नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है और दिखाता है कि तस्कर कितने शातिर हो गए हैं।
बढ़ते ड्रग्स तस्करी के मामले
IGI एयरपोर्ट पर ड्रग्स की तस्करी तेजी से बढ़ रही है। कस्टम अधिकारियों की सतर्कता के बावजूद तस्कर नए-नए तरीके अपनाते हैं। बैग में छिपाकर, कपड़ों में या कभी-कभी शरीर के अंदर कैप्सूल निगलकर ड्रग्स लाए जा रहे हैं। ज्यादातर मामलों में गांजा, मारिजुआना और कोकीन पकड़ी जा रही है। अधिकारी बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय गिरोह इन तस्करों को इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय यात्री भी इसमें शामिल हो रहे हैं, जो विदेश से सस्ते में ड्रग्स लाकर यहां ऊंचे दाम पर बेचते हैं।
बैंकॉक रूट क्यों है सबसे खतरनाक?
बैंकॉक से दिल्ली आने वाली फ्लाइट्स तस्करों का सबसे पसंदीदा रूट बन गई हैं। थाईलैंड में हाई क्वालिटी का गांजा और हाइड्रोपोनिक वीड आसानी से मिल जाता है। वहां से यात्री इसे छिपाकर लाते हैं। हाल के महीनों में कई बड़ी बरामदगियां इसी रूट से हुई हैं। उदाहरण के लिए, दिसंबर 2025 में ही बैंकॉक से आए छह भारतीय यात्रियों से 48 करोड़ रुपये का गांजा पकड़ा गया। इससे पहले अक्टूबर और नवंबर में भी कई मामले सामने आए, जहां 7 करोड़ से 10 करोड़ तक के ड्रग्स जब्त हुए। अधिकारी कहते हैं कि बैंकॉक रूट पर निगरानी बढ़ाई गई है, लेकिन तस्करों की संख्या कम नहीं हो रही।
हाल की बड़ी बरामदगियां
पिछले एक साल में IGI एयरपोर्ट पर कई बड़ी कार्रवाइयां हुई हैं। दिसंबर 2025 में 48 करोड़ का गांजा, उसके पहले 13 करोड़ का मारिजुआना और 4 करोड़ का नशीला पदार्थ पकड़ा गया। फरवरी 2025 में विदेशी नागरिकों से 40 करोड़ की कोकीन बरामद हुई। इन मामलों में ज्यादातर यात्री बैंकॉक, अफ्रीका या अन्य देशों से आ रहे थे। कस्टम की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) ने स्पॉट प्रोफाइलिंग और स्कैनिंग की मदद से इन तस्करों को पकड़ा। गिरफ्तार लोगों में भारतीय और विदेशी दोनों शामिल हैं। NDPS एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई हो रही है।
तस्करों के नए-नए तरीके
तस्कर अब पुराने तरीकों से हटकर नए पैंतरे आजमा रहे हैं। कभी ट्रॉली बैग में पॉलीथीन पैकेट्स छिपाते हैं, तो कभी इलेक्ट्रिक केतली या फ्रूट्स के अंदर ड्रग्स रखते हैं। कुछ यात्री कैप्सूल निगलकर कोकीन लाते हैं, जिसे अस्पताल में निकाला जाता है। हाइड्रोपोनिक गांजा, जो लैब में उगाया जाता है, सबसे महंगा बिकता है। इसकी कीमत साधारण गांजे से कई गुना ज्यादा होती है। कस्टम अधिकारी डॉग स्क्वॉड, एक्स-रे मशीन और इंटेलिजेंस की मदद ले रहे हैं, लेकिन तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रही।
कस्टम विभाग की चुनौतियां
IGI एयरपोर्ट भारत का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है। यहां रोज हजारों यात्री आते-जाते हैं। इतनी भीड़ में हर बैग की पूरी जांच मुश्किल है। फिर भी कस्टम विभाग ने तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सहयोग लिया जा रहा है। डीआरआई (डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस) भी सक्रिय है। अधिकारी बताते हैं कि ज्यादातर तस्करी अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट चलाते हैं, जो गरीब या लालची लोगों को मुर्गा बनाते हैं।
निष्कर्ष :
IGI एयरपोर्ट पर ड्रग्स तस्करी की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय हैं। एक साल में 133 करोड़ के ड्रग्स जब्त होना दिखाता है कि समस्या कितनी गंभीर है। बैंकॉक रूट पर विशेष निगरानी जरूरी है। सरकार और कस्टम विभाग को और सख्त कदम उठाने चाहिए, जैसे ज्यादा स्टाफ, नई मशीनें और जागरूकता अभियान। युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह देनी चाहिए, क्योंकि ड्रग्स न सिर्फ स्वास्थ्य बिगाड़ते हैं, बल्कि समाज को भी खोखला करते हैं। अगर हम सब मिलकर सतर्क रहें, तो इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। नशा मुक्त भारत बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम होगा।



