नई दिल्ली: भारत सरकार ने अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगने वाली सीमाओं पर बाड़बंदी का काम काफी आगे बढ़ चुका है। यह कदम घुसपैठ, तस्करी और आतंकवाद जैसी समस्याओं को रोकने के लिए उठाया गया है। गृह मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि पाकिस्तान सीमा पर 93 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से पर बाड़ लगा दी गई है, जबकि बांग्लादेश सीमा पर यह आंकड़ा 79 प्रतिशत है।
संसद में दी गई आधिकारिक जानकारी
16 दिसंबर 2025 को लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक लिखित जवाब में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 2,289.66 किलोमीटर है। इसमें से 2,135.13 किलोमीटर पर बाड़बंदी पूरी हो चुकी है, जो करीब 93.25 प्रतिशत है। केवल 154.52 किलोमीटर हिस्सा अभी बाकी है। यह बाकी हिस्सा मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के कुछ मुश्किल इलाकों में है, जहां ऊबड़-खाबड़ जमीन और अन्य चुनौतियां हैं।इसी तरह, भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई 4,096.70 किलोमीटर है। यहां 3,239.92 किलोमीटर पर बाड़ लग चुकी है, यानी लगभग 79.08 प्रतिशत। बाकी 856.78 किलोमीटर पर काम चल रहा है। यह सीमा पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे राज्यों से गुजरती है, जहां नदियां, दलदल और घने जंगल बाड़ लगाने में रुकावट पैदा करते हैं।
बाड़बंदी का उद्देश्य क्या है?
भारत की सीमाएं कई चुनौतियों का सामना करती हैं। पाकिस्तान सीमा पर आतंकवाद और ड्रग तस्करी की समस्या ज्यादा है, जबकि बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ और पशु तस्करी आम है। बाड़बंदी से इन समस्याओं पर लगाम लगाई जा सकती है। इसके अलावा, सीमा पर फ्लडलाइट्स, कैमरे, सेंसर और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकें भी लगाई जा रही हैं। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) दिन-रात गश्त करता है, जिससे निगरानी मजबूत होती है।सरकार का कहना है कि बाड़बंदी से न केवल घुसपैठ रुकेगी, बल्कि सीमा पार अपराध भी कम होंगे। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
पाकिस्तान सीमा पर प्रगति
भारत-पाकिस्तान सीमा जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक फैली हुई है। यहां कारगिल युद्ध के बाद से बाड़बंदी का काम तेज किया गया था। अब 93 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। बाकी हिस्सों में मुश्किल इलाकों जैसे पहाड़ और रेगिस्तान की वजह से देरी हो रही है, लेकिन सरकार इन पर भी जल्द काम पूरा करने की योजना बना रही है। इस सीमा पर बीएसएफ की सतर्कता से आतंकियों की घुसपैठ काफी कम हुई है।
बांग्लादेश सीमा की चुनौतियां
बांग्लादेश के साथ भारत की सबसे लंबी सीमा है। यहां नदियां और बाढ़ के मैदान ज्यादा हैं, इसलिए बाड़ लगाना आसान नहीं है। फिर भी, 1986 से शुरू हुए इस काम में अच्छी प्रगति हुई है। 2025 में जनवरी से नवंबर तक इस सीमा पर 1,100 से ज्यादा घुसपैठ के प्रयास हुए और 2,500 से अधिक लोग पकड़े गए। यह दिखाता है कि बाड़बंदी और निगरानी कितनी जरूरी है। सरकार बाकी हिस्सों में भी गैर-भौतिक बाड़ जैसे तकनीकी समाधान अपनाने की सोच रही है।
अन्य सीमाओं का जिक्र
गृह मंत्रालय ने म्यांमार सीमा का भी उल्लेख किया, जहां 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा पर अभी केवल 9 किलोमीटर पर ही बाड़ लगी है। नेपाल और भूटान जैसी सीमाएं खुली रखी गई हैं, क्योंकि वहां दोस्ताना संबंध हैं और मुक्त आवागमन की सुविधा है।
निष्कर्ष :
भारत सरकार की यह पहल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पाकिस्तान सीमा पर 93 प्रतिशत और बांग्लादेश सीमा पर 79 प्रतिशत बाड़बंदी पूरा होना एक बड़ी उपलब्धि है। इससे घुसपैठ, तस्करी और आतंकवाद जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण आएगा। हालांकि, बाकी हिस्सों पर काम तेज करने की जरूरत है, खासकर मुश्किल इलाकों में। आधुनिक तकनीक और बीएसएफ की मेहनत से भारत की सीमाएं और सुरक्षित होंगी। यह प्रयास देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में मदद करेंगे। आम नागरिकों को भी सीमा सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना चाहिए, ताकि हमारा देश और मजबूत बने।



