पटना-बिहार शिक्षा विभाग में मिड डे मील (एमडीएम) योजना से जुड़े ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) के ट्रांसफर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आई है। विभागीय जांच में पता चला है कि कई बीआरपी का स्थानांतरण बिना नियमों के पालन के किया गया। कुछ मामलों में पैसे लेकर मनचाही जगह पर पोस्टिंग दी गई। यह खुलासा एक शिकायत के बाद शुरू हुई जांच से हुआ है। अब विभाग ने दोषी अधिकारियों और कर्मियों पर सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है।
एमडीएम योजना क्या है और बीआरपी की भूमिका
मिड डे मील योजना सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। बिहार में इसे प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के नाम से भी जाना जाता है। इस योजना की निगरानी के लिए हर ब्लॉक में ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) तैनात किए जाते हैं।बीआरपी का मुख्य काम स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता जांचना, रसोइयों की मौजूदगी देखना और योजना के पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना होता है। ये बीआरपी अक्सर आउटसोर्सिंग से बहाल किए जाते हैं। उनकी पोस्टिंग और ट्रांसफर ब्लॉक या जिला स्तर पर होते हैं। लेकिन अच्छी पोस्टिंग वाली जगहों पर जाने के लिए कई बार गड़बड़ी की शिकायतें आती रही हैं।
ट्रांसफर में कैसे हुई गड़बड़ी
हाल की जांच में पता चला कि कई जिलों में एमडीएम बीआरपी के ट्रांसफर में नियमों की अनदेखी की गई। कुछ बीआरपी ने ऊपरी अधिकारियों को पैसे देकर अपनी पसंद की जगह पर ट्रांसफर करवाया। जबकि कुछ मामलों में योग्यता पूरी न होने के बावजूद ट्रांसफर दे दिया गया।
उदाहरण के लिए, एक जिले में 18 बीआरपी का एक साथ ट्रांसफर किया गया, लेकिन जांच में कई की योग्यता संदिग्ध पाई गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ट्रांसफर लिस्ट बनाने में पारदर्शिता नहीं बरती गई। कुछ बीआरपी लंबे समय से एक ही जगह पर जमे थे, जबकि नियम के मुताबिक समय-समय पर बदलाव जरूरी है। जांच टीम ने पाया कि ट्रांसफर ऑर्डर जारी करने में जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक स्तर के कर्मियों की मिलीभगत थी।
जांच कैसे शुरू हुई और क्या मिला
यह मामला तब सामने आया जब कुछ ईमानदार बीआरपी और शिक्षक संघों ने शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि ट्रांसफर में पैसे का लेन-देन हुआ है। विभाग के अपर मुख्य सचिव ने तुरंत एक टीम गठित कर जांच करवाई।जांच में कई जिलों जैसे सीतामढ़ी, समस्तीपुर और नवादा से रिपोर्ट मंगाई गई। रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के सबूत मिले। कुछ बीआरपी ने तो ट्रांसफर के बदले हजारों रुपये दिए जाने की बात कबूल की। जांच में यह भी पता चला कि कुछ ट्रांसफर बिना विभागीय आदेश के लोकल स्तर पर कर दिए गए। अब तक 50 से ज्यादा बीआरपी के ट्रांसफर संदिग्ध पाए गए हैं।
विभाग की ओर से क्या कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। दोषी पाए गए बीआरपी का ट्रांसफर रद्द कर दिया जाएगा। कुछ पर विभागीय जांच चल रही है, जबकि कुछ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी है। जिला शिक्षा अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि आगे से ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होगी।विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि एमडीएम बीआरपी के ट्रांसफर के लिए नई गाइडलाइन बनाई जाए। अब ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य होगा और मेरिट के आधार पर फैसला लिया जाएगा। पैसे लेकर ट्रांसफर देने वालों पर सख्त सजा का प्रावधान किया जा रहा है।
इससे योजना पर क्या असर
एमडीएम योजना बच्चों के पोषण के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन बीआरपी के ट्रांसफर में गड़बड़ी से योजना की निगरानी कमजोर हो रही थी। कई स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतें आईं। अब जांच से उम्मीद है कि योजना बेहतर चलेगी। बच्चे अच्छा भोजन पाएंगे और स्कूल आने की दर बढ़ेगी।शिक्षक संघों ने इस जांच की सराहना की है। उनका कहना है कि ऐसी गड़बड़ियां लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन अब रोक लगेगी।
निष्कर्ष :
एमडीएम बीआरपी के ट्रांसफर में हुई यह गड़बड़ी शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ा सबक है। जांच से भंडाफोड़ होने से सिस्टम में सुधार आएगा। सरकार को चाहिए कि सभी ट्रांसफर प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाए और निगरानी बढ़ाए। इससे न सिर्फ भ्रष्टाचार रुकेगा, बल्कि बच्चों तक योजना का पूरा लाभ पहुंचेगा। बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ऐसी पारदर्शिता जरूरी है। उम्मीद है कि आगे ऐसे मामले नहीं आएंगे और योजना का पैसा सही जगह इस्तेमाल होगा।


