West Bengal News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल सरकार के उस विधेयक को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है, जिसमें मुख्यमंत्री को राज्य विश्वविद्यालयों का चांसलर बनाने का प्रावधान था। यह फैसला केंद्र और राज्य के बीच नई तनातनी का कारण बन गया है। बंगाल सरकार ने 2022 में यह बिल पास किया था, जिसमें राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को चांसलर बनाने की बात थी। अब राष्ट्रपति ने इसे असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया। छोटे शहरों और गांवों के छात्र जो राज्य विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं, उनके लिए यह विवाद शिक्षा की स्वायत्तता पर सवाल खड़ा कर रहा है। ममता बनर्जी सरकार ने इसे केंद्र की दखलंदाजी बताया, जबकि भाजपा ने कहा कि राज्यपाल की भूमिका को कम करना गलत है। यह केंद्र vs राज्य की पुरानी लड़ाई का नया अध्याय है।
West Bengal News: मुख्यमंत्री को चांसलर बनाने का प्रावधान
बंगाल सरकार ने 2022 में ‘वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी लॉज (अमेंडमेंट) बिल’ पास किया था। इसमें 31 राज्य विश्वविद्यालयों में राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को चांसलर बनाने का प्रस्ताव था। राज्यपाल अभी चांसलर होते हैं और वाइस चांसलर की नियुक्ति में अहम भूमिका निभाते हैं। बिल में कहा गया था कि यह कदम विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बढ़ाएगा और प्रशासनिक दखल कम करेगा। लेकिन केंद्र सरकार ने इसे UGC गाइडलाइंस का उल्लंघन बताया। राष्ट्रपति ने राज्यपाल की सलाह पर बिल खारिज कर दिया।
केंद्र vs राज्य की लड़ाई: राज्यपाल की भूमिका पर विवाद
यह विवाद राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच अधिकारों की लड़ाई है। बंगाल में ममता बनर्जी और राज्यपाल सीवी आनंद बोस के बीच लंबे समय से तनाव है। राज्यपाल कई बिलों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे थे। केंद्र का कहना है कि विश्वविद्यालयों में राज्यपाल चांसलर होना संवैधानिक प्रावधान है। बंगाल सरकार ने इसे राजनीतिक दखल बताया। ममता ने कहा कि केंद्र राज्य के अधिकार छीन रहा है। यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है।
शिक्षा पर असर: विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सवाल
यह फैसला राज्य विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर असर डालेगा। छात्र संगठनों ने कहा कि राजनीतिक दखल से शिक्षा प्रभावित होती है। राज्यपाल या मुख्यमंत्री का चांसलर होना—दोनों में राजनीति आ जाती है। UGC ने सिफारिश की है कि एमिनेंट एकेडमिशियन को चांसलर बनाया जाए। बंगाल के छात्रों के लिए यह विवाद लंबित नियुक्तियों और विकास को रोक सकता है। सरकार अब नए बिल या कानूनी रास्ता तलाशेगी।



