Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद सुर्खियों में है, जिसमें राजद नेता तेज प्रताप यादव और पीएचईडी मंत्री संजय कुमार सिंह आमने-सामने आ गए हैं। मामला अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे कानूनी नोटिस तक जा पहुंचा है। संजय सिंह की ओर से तेज प्रताप को 50 करोड़ रुपये के मानहानि का नोटिस थमा दिया गया है, और इसके जवाब में तेज प्रताप ने साफ कह दिया है कि वह किसी से डरने वाले नहीं हैं। आखिर यह पूरा विवाद शुरू कहां से हुआ और अब आगे क्या होने वाला है, यह जानना जरूरी हो जाता है।
दरअसल यह पूरा मामला एक कथित होटल कांड से जुड़ा है, जिसे लेकर तेज प्रताप ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप लगाए थे। मंत्री के वकील सुशील कुमार ने 30 अगस्त 2026 को यह मानहानि नोटिस जारी किया, जिसमें तेज प्रताप के आरोपों को पूरी तरह झूठा और आधारहीन बताया गया है।
Bihar Politics: कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद, महिला कर्मचारी से जुड़ा आरोप
विवाद की जड़ में तेज प्रताप यादव का वह सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि दिल्ली दौरे के दौरान एक बड़े होटल में मंत्री संजय कुमार सिंह ने एक महिला कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने आरोप में यह भी कहा था कि मंत्री ने महिला का शोषण करने की कोशिश की। तेज प्रताप ने इसे गंभीर मामला बताते हुए सरकार और प्रशासन से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। हालांकि यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र सूत्र से पुष्टि नहीं हो पाई है, और संजय सिंह ने शुरू से ही इन्हें सिरे से खारिज किया है।
25 लाख के लेन-देन का दावा, विवाद को मिली नई हवा
इसी बीच तेज प्रताप ने एक और चौंकाने वाला दावा भी किया, जिसने पूरे मामले को और उलझा दिया। उनका आरोप था कि इस मामले को दबाने और रफा-दफा करने की कोशिश में कथित तौर पर 25 लाख रुपये का लेन-देन हुआ। यह दावा सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। तेज प्रताप ने कहा कि वह पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने लाकर रहेंगे, वहीं मंत्री की तरफ से भेजे गए नोटिस में इस आरोप को भी पूरी तरह झूठा बताया गया है।
संजय सिंह की चुनौती और तेज प्रताप का पलटवार
आरोपों के बाद संजय कुमार सिंह ने भी चुप बैठने के बजाय सीधा पलटवार किया। उन्होंने कहा था कि अगर तेज प्रताप के पास कोई सबूत है तो वह उसे सामने रख दें, वह उसी दिन राजनीति से संन्यास ले लेंगे। मंत्री की इस चुनौती के बाद विवाद और गहरा गया। इसके जवाब में तेज प्रताप ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और मंत्री के बयान पर करारा जवाब दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेज प्रताप का अंदाज बिल्कुल अलग रहा। उन्होंने कहा कि वह किसी से डरने वाले नहीं हैं और खुद को ‘शेर का बेटा’ बताया। उनका कहना था कि हर इंसान ‘माई का लाल’ होता है, और अगर मंत्री साहब में हिम्मत है तो घर आकर बात कर लें। तेज प्रताप ने साफ लहजे में कहा कि वह इस मामले की सच्चाई सामने लाकर ही दम लेंगे।
अब आया 50 करोड़ का मानहानि नोटिस
तेज प्रताप के इस तीखे बयान के बाद संजय सिंह की तरफ से चुप बैठने के बजाय सीधे कानूनी रास्ता अपनाया गया। अधिवक्ता सुशील कुमार के जरिए भेजे गए नोटिस में तेज प्रताप के सोशल मीडिया आरोपों को पूरी तरह आधारहीन करार दिया गया है। नोटिस में साफ मांग की गई है कि तेज प्रताप सात दिनों के भीतर संबंधित पोस्ट हटाएं, सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगें और भविष्य में इस तरह की टिप्पणी न करने का लिखित आश्वासन दें।
नोटिस में और भी कई नामों का जिक्र, यहीं से आया ट्विस्ट
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प मोड़ भी है। संजय सिंह के नोटिस में सिर्फ होटल विवाद तक बात सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें तेज प्रताप से जुड़े कुछ और निजी और राजनीतिक विवादों का भी जिक्र किया गया है। नोटिस में ऐश्वर्या, अनुष्का, निशु और मोनिका जैसे नामों का उल्लेख करते हुए तेज प्रताप से सवाल पूछे गए हैं कि इन मामलों को लेकर उनकी क्या सफाई है। साथ ही नोटिस में उन महिलाओं के लिए न्याय की मांग भी की गई है, जो कथित तौर पर इन प्रकरणों में इंसाफ चाहती हैं। यहां भी स्पष्ट कर देना जरूरी है कि ये सिर्फ नोटिस में उठाए गए आरोप और सवाल हैं, इनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
नोटिस में तेज प्रताप को सीधे निशाना बनाते हुए एक तीखी टिप्पणी भी की गई है, जिसका मतलब यही है कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले खुद अपने ऊपर लगे सवालों का जवाब देना चाहिए। जानकार मानते हैं कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर तेज प्रताप की उन गतिविधियों की तरफ इशारा करती है, जिन्हें लेकर वह पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं।
Bihar Politics: सात दिन की मोहलत, नहीं माने तो क्या होगा
कानूनी नोटिस में तेज प्रताप को साफ तौर पर सात दिन का समय दिया गया है। इस दौरान उनसे पोस्ट हटाने, माफी मांगने और आगे ऐसी टिप्पणी न करने का लिखित आश्वासन मांगा गया है। अगर तय समय में यह मांगें पूरी नहीं होतीं, तो संजय सिंह की तरफ से आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, जिसमें 50 करोड़ रुपये के मानहानि दावे का मामला भी शामिल रहेगा।
बिहार की राजनीति में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी नोटिस आम आदमी के लिए भी दिलचस्पी का विषय बन जाते हैं, क्योंकि इनसे जुड़े नेता सीधे जनता से जुड़े मुद्दों पर काम करने का दावा करते हैं। ऐसे में जब सत्ता और विपक्ष के बीच व्यक्तिगत आरोपों की लड़ाई अदालत तक पहुंचती है, तो लोगों की नजर इस पर जरूर टिकती है कि आखिर सच्चाई किसके पक्ष में है।
फिलहाल यह पूरा मामला आरोप, पलटवार और कानूनी नोटिस के बीच अटका हुआ है। एक तरफ तेज प्रताप यादव अपने आरोपों पर कायम हैं और सच्चाई सामने लाने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ संजय सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए 50 करोड़ रुपये के मानहानि दावे का नोटिस भेज दिया है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि तेज प्रताप की तरफ से इस नोटिस का क्या जवाब आता है, और क्या यह विवाद अदालत की चौखट तक पहुंचता है। मामले की आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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