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गांव के लाल का गौरव: शुभम शर्मा ने UPSC इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज में 39वीं रैंक से रोशन किया अलीगढ़ का नाम

डेस्क – अलीगढ़ जिले की इगलास तहसील के एक छोटे से गांव से निकले शुभम शर्मा ने कड़ी मेहनत और लगन से बड़ा मुकाम हासिल किया है। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (IES) परीक्षा में ऑल इंडिया 39वीं रैंक प्राप्त की है। यह सफलता न केवल उनके लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। शुभम की इस उपलब्धि ने दिखाया कि सपनों को पूरा करने के लिए बड़ा शहर या विशेष सुविधाएं जरूरी नहीं, बस दृढ़ इच्छाशक्ति काफी है।

शुभम शर्मा का शुरुआती जीवन और परिवार

शुभम शर्मा का जन्म और पालन-पोषण अलीगढ़ के इगलास तहसील के ग्राम मिश्रिया नगला में हुआ। यह एक साधारण ग्रामीण परिवार है, जहां कृषि और छोटे-मोटे कामों से घर चलता है। शुभम के पिता किसान हैं और परिवार में माता-पिता के अलावा भाई-बहन भी हैं। बचपन से ही शुभम पढ़ाई में होशियार थे। गांव की सीमित सुविधाओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और पढ़ाई पर जोर दिया। शुभम कहते हैं कि उनके माता-पिता की प्रेरणा और त्याग ने उन्हें यहां तक पहुंचाया। ग्रामीण परिवेश में रहकर भी उन्होंने बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने की ठान ली।

शिक्षा की मजबूत नींव

शुभम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने प्राथमिक और इंटरमीडिएट की शिक्षा मथुरा के कान्हा माखन पब्लिक स्कूल से हासिल की। यहां उन्होंने अच्छे अंकों से परीक्षाएं पास कीं। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने लखनऊ के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) चुना। वर्ष 2018 में उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। कॉलेज के दिनों में ही शुभम ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। वे जानते थे कि इंजीनियरिंग की डिग्री के साथ सरकारी सेवा में जाना उनका लक्ष्य है। उनकी मेहनत रंग लाई और ग्रेजुएशन के बाद वे दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) में मैनेजर (सिविल) के पद पर नियुक्त हो गए। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी IES की तैयारी जारी रखी।

IES परीक्षा की कठिन तैयारी

यूपीएससी की इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज परीक्षा देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक है। इसमें इंजीनियरिंग के चार ब्रांच – सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन – शामिल होते हैं। परीक्षा तीन चरणों में होती है: प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू। शुभम ने सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच चुनी। वे दिल्ली में नौकरी करते हुए रोजाना कई घंटे पढ़ाई करते थे। सुबह जल्दी उठकर स्टडी करना, वीकेंड पर पूरा समय देना – उनकी दिनचर्या बहुत अनुशासित थी। शुभम ने सेल्फ स्टडी पर ज्यादा जोर दिया। उन्होंने किताबें, ऑनलाइन कोर्स और पिछले सालों के पेपर से तैयारी की। मुश्किल विषयों को बार-बार रिवाइज करना और मॉक टेस्ट देना उनकी रणनीति का हिस्सा था। नौकरी की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने कभी तैयारी नहीं छोड़ी। उनकी लगन का नतीजा यह हुआ कि 2025 की IES परीक्षा में उन्होंने 39वीं रैंक हासिल की।

सफलता के बाद का सफरImage result for शुभम शर्मा यूपीएससी IES में दिलाई 39वीं रैंक

यह रैंक पाकर शुभम अब भारतीय इंजीनियरिंग सेवाओं में उच्च पद पर नियुक्त होंगे। IES अधिकारी रेलवे, सड़क, पुल-पुलिया, सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं। शुभम की यह सफलता इगलास और अलीगढ़ क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक है। इससे पहले यहां से इतनी ऊंची रैंक शायद ही किसी ने हासिल की हो। गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी सभी गर्व महसूस कर रहे हैं। शुभम वर्तमान में दिल्ली मेट्रो में काम कर रहे हैं, लेकिन जल्द ही वे IES में जॉइन करेंगे। उनकी सफलता ग्रामीण इलाकों के युवाओं को बताती है कि अगर सही दिशा में मेहनत करें तो कोई भी सपना पूरा हो सकता है।

युवाओं के लिए शुभम की सलाह

शुभम कहते हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित पढ़ाई, धैर्य और आत्मविश्वास जरूरी है। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि छोटी-छोटी असफलताओं से घबराएं नहीं। अपनी कमजोरियों पर काम करें और मजबूत पक्षों को और निखारें। साथ ही, परिवार और शिक्षकों का सहयोग लें। शुभम खुद उदाहरण हैं कि नौकरी करते हुए भी बड़ी परीक्षा पास की जा सकती है। वे कहते हैं, “सपने देखो, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करो।”

निष्कर्ष :

शुभम शर्मा की कहानी मेहनत और संघर्ष की मिसाल है। एक साधारण ग्रामीण परिवार से निकलकर उन्होंने यूपीएससी IES में 39वीं रैंक प्राप्त कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया। यह सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं की है जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं। शुभम जैसे युवा देश के भविष्य को मजबूत बनाते हैं। उनकी यह उपलब्धि हमें सिखाती है कि दृढ़ संकल्प से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। उम्मीद है कि शुभम की यह सफलता और भी कई युवाओं को प्रेरित करेगी और वे भी ऊंचाइयों को छुएंगे। शुभकामनाएं शुभम को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए!

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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