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CG Politics: छत्तीसगढ़ में गुरु और गोवंश से तय हो रही सियासत, कांग्रेस ने हारे नेताओं पर चलाया नया दांव

CG Politics: छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों विकास के एजेंडे से ज्यादा गुरु और गोवंश के समीकरणों से चलती दिख रही है। भाजपा सरकार में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। नवा रायपुर के मंत्री बंगलों के आसपास गोवंश पिटाई का वीडियो वायरल होने से विपक्ष हमलावर हुआ है। कांग्रेस ने पिछले चुनाव में हारे दिग्गजों को नगरीय निकायों की जिम्मेदारी सौंपकर नया दांव चला है। 2028 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछने लगी है।

CG Politics: गुरु परिवार से सतनामी वोट बैंक साधने की कोशिश

गुरु खुशवंत साहेब भाजपा सरकार में मंत्री हैं। उनके बड़े भाई गुरु ढालदास साहेब ने कांग्रेस में घर वापसी कर ली है। पहले एक भाई ने भाजपा का साथ दिया था। अब दूसरे भाई के कांग्रेस में आने से दोनों दल सतनामी समाज के वोटों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं। एक परिवार के दो सदस्य दो अलग दलों में हैं। इससे सियासी गणित और उलझ गया है।

नवा रायपुर में गोवंश पिटाई वीडियो से सियासत

नवा रायपुर के मंत्रियों के बंगलों के आसपास गोवंश को पीटते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहा है। कांग्रेस इसे बड़े पैमाने पर शेयर कर रही है। विपक्ष सरकार को गौ संरक्षण के मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रहा है। इस वीडियो ने सत्ता पक्ष के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। गोवंश के मुद्दे पर संवेदनशीलता फिर चर्चा में आ गई है।

CG Politics: मक्का बीज ठेके को लेकर चर्चा गरमाई

राजनीतिक गलियारों में मक्के के हाइब्रिड बीजों के 15 करोड़ रुपये के ठेके की चर्चा जोरों पर है। गुजरात के आधार कार्ड वाले एक व्यक्ति को यह ठेका देने की तैयारी बताई जा रही है। दिल्ली के किसी खास दरबार से फंड आने की अफवाहें भी फैल रही हैं। पहले हल्दी बीज के मामले की याद ताजा हो रही है। फाइलों में खेल होने की बात कही जा रही है।

जांच एजेंसियों की तलाश वाले लोग दफ्तरों में दिखे

सीबीआई और ईडी जिन लोगों की तलाश में छापे मार रही हैं, वे मंत्रालय और संचालनालय के कमरों में दिख रहे हैं। यह बात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। भ्रष्टाचार की फसल तेजी से उगने का आरोप लग रहा है। आम जनता इन मामलों को लेकर सवाल उठा रही है। पारदर्शिता की मांग बढ़ रही है।

CG Politics: नेता अस्सी के दशक की शैली में लौटे

कुछ नेता अस्सी के दशक वाली पुरानी राजनीति की तरफ लौटते दिख रहे हैं। उनकी शैली पुराने नारों और लाउडस्पीकर वाले भाषण जैसी लग रही है। डिजिटल युग की नई चुनौतियों से वे कटे हुए प्रतीत होते हैं। जनता रोजगार, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं चाहती है। नेता अतीत के अध्यायों को दोहरा रहे हैं।

कांग्रेस ने हारे दिग्गजों को सौंपी जिम्मेदारी

कांग्रेस ने पिछले विधानसभा चुनाव में हारे नेताओं को पंद्रह नगरीय निकायों की निगरानी सौंपी है। जो अपनी सीट नहीं बचा सके उन्हें अब नगर निगमों का पर्यवेक्षक बनाया गया है। बीरगांव में शिवकुमार डहरिया और भिलाई में धनेंद्र साहू को यह जिम्मेदारी दी गई है। रिसाली में मोहन मरकाम को भी पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।

विकास उपाध्याय समेत अन्य पर दांव

पूर्व विधायक विकास उपाध्याय पर भी कांग्रेस ने भरोसा जताया है। सत्ता पक्ष कह रहा है कि कांग्रेस के पास अब सिर्फ पराजित नेता ही बचे हैं। जो अपनी विधानसभा नहीं संभाल सके वे नगरीय चुनाव में कितना असर डाल पाएंगे यह सवाल उठ रहा है। कांग्रेस का यह प्रयोग चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन में नए चेहरों की कमी का आरोप लग रहा है।

CG Politics: 2028 चुनाव की तैयारी अभी से शुरू

दोनों खेमे 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर कदम उठा रहे हैं। गुरु और गोवंश के मुद्दे चुनावी रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। सत्ता पक्ष को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। विपक्ष हर मौके का फायदा उठाने की कोशिश में है। राज्य की राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

छत्तीसगढ़ की सियासत इस समय विकास से ज्यादा प्रतीकात्मक मुद्दों और सामाजिक समीकरणों पर टिकी दिख रही है। गुरु परिवार के बंटे हुए रुख और गोवंश वीडियो ने माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस का हारे नेताओं पर दांव प्रयोगात्मक माना जा रहा है। मक्का बीज ठेके जैसी चर्चाएं पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही हैं।

जनता बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रही है जबकि नेता पुरानी शैली में सक्रिय हैं। 2028 के चुनाव तक ये समीकरण कैसे बदलते हैं यह देखना बाकी है। दोनों दल अपने वोट बैंक को साधने में जुटे हुए हैं।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

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