Petrol-Diesel Price 21 Sep 2026: भारत में सोमवार को पेट्रोल और डीजल की ताजा कीमतें जारी हो गई हैं। देश के अलग अलग शहरों और राज्यों में ईंधन के रेट अलग अलग हैं। हैदराबाद में पेट्रोल 115.71 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है जबकि आंध्र प्रदेश में राज्य स्तर पर कीमत 117.61 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है।
ये दरें आमतौर पर रोज सुबह 6 बजे संशोधित होती हैं। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, रिलायंस और आईजीएल जैसी कंपनियों के स्टेशन इन दरों पर ईंधन बेचते हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और लखनऊ में 101.86 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।
कीमतों में यह अंतर कच्चे तेल की लागत, तेल कंपनियों के खर्च, राज्य कर और डीलर कमीशन पर निर्भर करता है। उपभोक्ताओं के लिए यह जानना जरूरी है कि उनके शहर में आज क्या दर लागू है।
आज प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमत कितनी है?
प्रमुख शहरों की सूची में हैदराबाद सबसे महंगा शहर दिख रहा है जहां पेट्रोल 115.71 रुपये प्रति लीटर है। पुणे में यह 112.41 रुपये, मुंबई में 111.18 रुपये और बैंगलोर में 110.93 रुपये प्रति लीटर है।
चेन्नई में पेट्रोल 107.76 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में दर 113.51 रुपये और जयपुर में 113.19 रुपये प्रति लीटर है। इन शहरों में कीमतें अपेक्षाकृत ऊंची बनी हुई हैं।
दूसरी ओर कुछ शहरों में दरें कम हैं। अहमदाबाद में पेट्रोल 102.15 रुपये, गुरुग्राम में 102.75 रुपये, नई दिल्ली में 102.12 रुपये, नोएडा में 101.89 रुपये और लखनऊ में 101.86 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है। इन आंकड़ों से साफ है कि उत्तर भारत के कई शहरों में ईंधन अपेक्षाकृत सस्ता है।
ये शहर स्तर की कीमतें उपभोक्ताओं को सीधे प्रभावित करती हैं क्योंकि रोजमर्रा की आवाजाही और परिवहन लागत इन्हीं दरों से जुड़ी होती है।
राज्यवार पेट्रोल की कीमतें क्या चल रही हैं?
राज्य स्तर पर आंध्र प्रदेश में पेट्रोल सबसे महंगा है जहां कीमत 117.61 रुपये प्रति लीटर है। तेलंगाना में यह 117.11 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। बिहार में 115.07 रुपये और मध्य प्रदेश में 115.53 रुपये प्रति लीटर की दर है।
केरल में पेट्रोल 114.19 रुपये, पश्चिम बंगाल में 113.37 रुपये और राजस्थान में 112.31 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। महाराष्ट्र में राज्य स्तर पर कीमत 111.78 रुपये और कर्नाटक में 111.01 रुपये प्रति लीटर है।
कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दरें काफी कम हैं। दमन और दीव में 99.44 रुपये, दादरा और नगर हवेली में 99.63 रुपये तथा अरुणाचल प्रदेश में 99.69 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल मिल रहा है। चंडीगढ़ और उत्तर प्रदेश दोनों जगह कीमत 101.54 रुपये प्रति लीटर है।
दिल्ली में 102.12 रुपये, गुजरात में 102.15 रुपये, हिमाचल प्रदेश में 102.1 रुपये और उत्तराखंड में 101.66 रुपये प्रति लीटर की दर लागू है। ये राज्यवार आंकड़े दिखाते हैं कि कर ढांचे के कारण एक ही दिन में देश के विभिन्न हिस्सों में ईंधन की कीमत में बड़ा अंतर हो सकता है।
ईंधन की कीमत कैसे तय होती है?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत मुख्य रूप से आयातित कच्चे तेल की लागत पर निर्भर करती है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से कच्चा तेल मंगवाता है इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल सीधे घरेलू दरों पर असर डालती है।
तेल विपणन कंपनियां इस कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल या डीजल बनाती हैं और फिर विभिन्न राज्यों के डीलरों को बेचती हैं। इस प्रक्रिया में कंपनियों का अपना खर्च भी कीमत में जुड़ जाता है।
इसके अलावा मूल्य वर्धित कर यानी वैट राज्य सरकारें अलग अलग दर पर लगाती हैं। यही कारण है कि एक राज्य में ईंधन सस्ता और दूसरे में महंगा दिखता है। उत्पाद शुल्क पूरे देश में एक समान रहता है।
डीलर कमीशन भी अंतिम कीमत का हिस्सा होता है और यह डीलर के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। इन सभी घटकों को जोड़कर रोज की दर तय होती है।
राज्यों में ईंधन कीमतें अलग अलग क्यों होती हैं?
राज्यों में पेट्रोल डीजल की कीमत में अंतर मुख्य रूप से राज्य करों की वजह से आता है। हर राज्य सरकार ईंधन पर अपना वैट अलग दर से वसूलती है जिससे अंतिम कीमत बदल जाती है।
परिवहन लागत भी भूमिका निभाती है। कुछ राज्यों तक ईंधन पहुंचाने में ज्यादा खर्च आता है तो वहां दर बढ़ जाती है। स्थानीय नियम और प्रशासनिक व्यवस्था भी कीमत निर्धारण को प्रभावित करते हैं।
इसी वजह से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में दरें ऊंची दिख रही हैं जबकि कुछ पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं। उपभोक्ता जब एक राज्य से दूसरे राज्य जाते हैं तो उन्हें यही अंतर साफ दिखाई देता है।
ये अंतर सिर्फ कागजी नहीं होते बल्कि आम आदमी की मासिक ईंधन बिल और महंगाई पर सीधा असर डालते हैं।
ईंधन कीमतों में बदलाव किन वजहों से होता है?
वैश्विक कच्चे तेल की कीमत सबसे बड़ा कारक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा या सस्ता होने पर भारत में भी दरें प्रभावित होती हैं। मुद्रा विनिमय दर यानी रुपये की स्थिति भी मायने रखती है क्योंकि आयात डॉलर में होता है।
भू राजनीतिक घटनाएं आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती हैं जिससे कीमतों में उतार चढ़ाव आता है। सरकार की कर नीति भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्पाद शुल्क और राज्य वैट में कोई बदलाव सीधे उपभोक्ता तक पहुंचता है।
ये सभी तत्व मिलकर रोज सुबह संशोधित होने वाली दरों को आकार देते हैं। इसलिए एक दिन की कीमत अगले दिन बदल सकती है भले ही स्थानीय स्तर पर कोई नया फैसला न हुआ हो।
देश भर के उपभोक्ताओं के लिए इन दरों पर नजर रखना जरूरी हो गया है क्योंकि परिवहन, कृषि और छोटे व्यवसाय सभी ईंधन लागत से जुड़े हैं। शहर और राज्य दोनों स्तर की ताजा सूची से लोग अपने इलाके की सटीक जानकारी ले सकते हैं।
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