Top 5 This Week

Related Posts

Sultanganj Karma Puja Accident: पोखर में नहाने गए छह बच्चों की डूबकर मौत, एक को बचाने गए सभी समाए

Sultanganj Karma Puja Accident: भागलपुर जिले के सुलतानगंज थाना क्षेत्र में करमा-धरमा पर्व की सुबह मातम में बदल गई। उधाडीह पंचायत के तरैटा बहियार स्थित पोखर में स्नान करने गए छह बच्चों की डूबकर मौत हो गई। तीन लड़के और तीन लड़कियां इस हादसे का शिकार बने। उनकी उम्र करीब दस से बारह वर्ष बताई जा रही है। घटना सोमवार सुबह हुई, जब बच्चे पर्व के अवसर पर नहाने गए थे। एक बच्चा गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसे निकालने की कोशिश में बाकी बच्चे भी पानी में उतर गए। देखते-देखते सभी छह बच्चे गहरे हिस्से में समा गए। खबर फैलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने मशक्कत के बाद शव बाहर निकाले और सुलतानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। पांच बच्चे विष्णुटोला, नगर परिषद सुलतानगंज के वार्ड 27 के रहने वाले थे। एक बच्ची रजंदीपुर, सबौर की निवासी थी। शव पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर भेज दिए गए। पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। पर्व के गीतों की जगह चीख-पुकार गूंजने लगी।

घटना का क्रम और मौके का हाल

हादसा तरैटा बहियार के पोखर में सुबह के समय हुआ। करमा-धरमा के दिन बच्चे पारंपरिक स्नान के लिए वहां गए थे। पानी का स्तर सामान्य से अधिक था। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में जलजमाव की स्थिति बनी हुई थी। एक बच्चा अचानक गहरे हिस्से में पहुंच गया। वह हाथ-पैर मारने लगा। साथ गए बच्चों ने उसे बचाने का फैसला किया। वे भी पानी में कूद गए। गहराई और दलदल जैसी स्थिति के कारण कोई भी किनारे तक नहीं लौट पाया। कुछ ही क्षणों में छहों बच्चे दृष्टि से ओझल हो गए। आसपास खेत-खलिहान और बहियार का इलाका है। मदद के लिए तुरंत कोई बड़ा समूह नहीं था। जब देर होने लगी तो घर वालों को चिंता हुई। लोग दौड़ते हुए पोखर की ओर पहुंचे।

ग्रामीणों ने रस्सी, बांस और हाथों से पानी में उतरकर बच्चों को बाहर निकाला। सभी बेहोश अवस्था में थे। उन्हें तुरंत वाहनों में बिठाकर सुलतानगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद एक-एक कर मृत घोषित किया। अस्पताल परिसर में परिजनों की चीखें गूंजने लगीं। कई महिलाएं बेहोश होने की स्थिति में पहुंच गईं। पुरुष सिर पीटते नजर आए। मौके पर जमा भीड़ में सन्नाटा और रोने की आवाज एक साथ थी।

मृतक बच्चों की पहचान और परिवार

मृतकों की पहचान ज्योति कुमारी, पिता धनंजय मंडल, निवासी रजंदीपुर सबौर; मीनाक्षी कुमारी, पिता वाल्मीकि मंडल; आयुष कुमार, पिता विनोद मंडल; राहुल कुमार, पिता पूरब मंडल; पूजा कुमारी, पिता पूरन मंडल और विकास कुमार, पिता रंजन कुमार के रूप में हुई। छह में से पांच बच्चे विष्णुटोला के एक ही इलाके से थे। ज्योति कुमारी सबौर क्षेत्र से आई थीं। सभी बच्चे पड़ोस या रिश्तेदारी के दायरे में जुड़े बताए गए। सुबह घर से निकलते समय परिवारों में पर्व का उत्साह था। माताएं पूजा की तैयारी कर रही थीं। पिता काम पर जाने या घर के काम में व्यस्त थे। बच्चों के लौटने का इंतजार था। अचानक खबर आई तो घरों में मातम पसर गया।

परिजनों का कहना है कि बच्चे हर वर्ष इस मौके पर साथ नहाने जाते थे। इस बार पानी की स्थिति अलग थी। गहरे गड्ढे या बाढ़ के जमाव की जानकारी बच्चों को पूरी तरह नहीं थी। परिवार आर्थिक रूप से सामान्य पृष्ठभूमि के हैं। कई घरों में स्कूल जाने वाले ये बच्चे परिवार की उम्मीद थे। अस्पताल में शव देखते ही माताएं छाती पीटने लगीं। दादा-दादी भी रोते दिखे। पड़ोसी महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश करती रहीं।

करमा-धरमा पर्व और स्थानीय परंपरा

करमा-धरमा बिहार के कई इलाकों में मनाया जाने वाला लोक पर्व है। खासकर आदिवासी और पिछड़ी जातियों के समाज में इसकी विशेष मान्यता है। करम पेड़ की पूजा, गीत-नृत्य और सामूहिक उत्साह इसका हिस्सा होता है। कई परिवार इस दिन पवित्र स्नान को भी महत्व देते हैं। सुलतानगंज अजगैबीनाथ धाम के निकट का क्षेत्र धार्मिक आस्था से जुड़ा है। बहियार और दियारा इलाकों में पानी के स्रोत आसानी से उपलब्ध रहते हैं। बच्चे अक्सर समूह में जाते हैं। बड़ों की निगरानी हर बार संभव नहीं हो पाती। इस बार पर्व की तैयारी के बीच यह हादसा हो गया। गीतों की जगह अब विलाप सुनाई दे रहा है। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि ऐसे मौकों पर पानी की गहराई का अंदाजा बच्चे नहीं लगा पाते।

क्षेत्र में बाढ़ या भारी बारिश के बाद खेतों और पोखरों में पानी का स्तर बढ़ जाता है। सतह शांत दिखती है, लेकिन नीचे गड्ढे होते हैं। बच्चे खेल-खेल में या रीति निभाने के लिए उतर जाते हैं। एक को बचाने की स्वाभाविक कोशिश में बाकी भी फंस जाते हैं। यह क्रम कई ग्रामीण हादसों में देखा गया है। सुलतानगंज में गंगा और आसपास के जलस्रोतों पर सुरक्षा की मांग पहले भी उठती रही है।

राहत कार्य और प्रशासनिक प्रतिक्रिया

शव निकालने के बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच की। Puls और सांस नहीं होने की पुष्टि के बाद मौत प्रमाणित की गई। इसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भागलपुर भेजा गया। पुलिस थाना प्रभारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बात की और घटना की प्रारंभिक जानकारी ली। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की गई। भीड़ को नियंत्रित किया गया। कोई मारपीट या तनाव की खबर नहीं आई। अधिकारी घटना को दुर्घटना बता रहे हैं। आगे की जांच पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी।

ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों को निकालने में काफी समय लगा। पानी गहरा और कीचड़ भरा था। कुछ युवा बार-बार डुबकी लगाकर शव तलाशते रहे। महिलाओं ने किनारे खड़े होकर रोते हुए इंतजार किया। पूरे उधाडीह पंचायत और आसपास के टोलों में खबर बिजली की तरह फैली। स्कूल और दुकानें भी प्रभावित दिखीं। लोग समूह बनाकर अस्पताल और घरों के बीच आ-जा रहे थे।

परिवारों पर पड़ा असर और गांव का माहौल

एक साथ छह बच्चों की मौत ने पूरे मोहल्ले को हिला दिया। विष्णुटोला के वार्ड 27 में कई घर सन्न हैं। पूजा की थाली सजी रह गई। करम डाली रखने की तैयारी अधूरी छूट गई। पड़ोस के बच्चे भी डरे-डरे घूम रहे हैं। बुजुर्ग कह रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में एक ही सुबह जान जाना पहले नहीं देखा। माता-पिता का बुरा हाल है। कुछ परिजन अस्पताल के गेट पर घंटों बैठे रहे। शव भागलपुर भेजे जाने के बाद घर लौटे तो और ज्यादा रोना शुरू हुआ। रिश्तेदार दूर-दूर से पहुंचने लगे। गांव में खाना-पीना ठप पड़ गया। शाम तक भी कई घरों में चूल्हा नहीं जला।

मीनाक्षी, पूजा और ज्योति जैसी बच्चियों के घरों में महिलाओं का समूह बैठा है। लड़कों आयुष, राहुल और विकास के पिता चुपचाप बैठे दिखे। कोई शब्द नहीं निकल रहा था। पड़ोसियों ने चाय-पानी का इंतजाम किया, लेकिन कोई हाथ नहीं बढ़ा रहा था। बच्चे स्कूल में पढ़ते थे। शिक्षक और सहपाठी भी सदमे में हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि पर्व के दिन ऐसी खबर किसी ने नहीं सोची थी। सुबह उत्साह था, दोपहर तक श्मशान का सा माहौल हो गया।

जलस्रोतों की सुरक्षा और स्थानीय चुनौती

सुलतानगंज और भागलपुर के दियारा-बहियार इलाकों में पानी से जुड़ी दुर्घटनाएं समय-समय पर होती रही हैं। पोखर, खेत में जमा पानी और गंगा के किनारे स्नान के दौरान सतर्कता कम पड़ जाती है। बच्चे तैरना जानते हों या न जानते हों, समूह में हिम्मत बढ़ जाती है। एक के फंसने पर बाकी बिना सोचे कूद पड़ते हैं। इस घटना में भी यही हुआ। स्थानीय स्तर पर लाइफगार्ड या चेतावनी बोर्ड जैसी व्यवस्था आमतौर पर छोटे पोखरों पर नहीं होती। पंचायत और नगर परिषद स्तर पर जलस्रोतों की निगरानी सीमित संसाधनों के कारण पूरी नहीं हो पाती।

बाढ़ के बाद खेतों में बने गड्ढे और गहरे हिस्से दिखते नहीं। मिट्टी कटने से अचानक गहराई बढ़ जाती है। बच्चे इसे सामान्य तालाब समझकर उतर जाते हैं। परिवार वाले काम में व्यस्त रहते हैं। बड़े भाई-बहन या पड़ोसी हमेशा साथ नहीं होते। पर्व के दिनों में यह जोखिम और बढ़ जाता है क्योंकि रीति निभाने का दबाव रहता है। प्रशासन बाद में जांच करता है, लेकिन रोकथाम के ठोस कदम गांव स्तर तक कम पहुंचते हैं।

शवों का अंतिम संस्कार और आगे की प्रक्रिया

पोस्टमार्टम के बाद शव परिवारों को सौंपे जाएंगे। अंतिम संस्कार की तैयारी गांव में शुरू हो गई है। कई परिवार एक साथ यह पीड़ा झेल रहे हैं इसलिए सामूहिक सहयोग दिख रहा है। लकड़ी, पूजन सामग्री और अन्य इंतजाम पड़ोसी कर रहे हैं। पुलिस ने परिजनों से बयान लिए हैं। घटनास्थल का मुआयना किया गया। पोखर के आसपास भीड़ को हटाया गया। अधिकारियों ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। मुआवजे या सहायता की कोई आधिकारिक घोषणा घटना के तुरंत बाद सार्वजनिक नहीं हुई। परिवार इंतजार कर रहे हैं।

इलाके के लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि बहियार और पोखर वाले इलाकों में चेतावनी लगाई जाए। बच्चों को अकेले न जाने देने की अपील भी हो रही है। स्कूलों में जल सुरक्षा की बातचीत शुरू करने की जरूरत बताई जा रही है। फिलहाल पूरा ध्यान शोक संतप्त परिवारों पर है।

सुलतानगंज का यह हादसा करमा-धरमा की खुशियों को एक झटके में तोड़ गया। छह मासूम जानें चली गईं। एक को बचाने की कोशिश में बाकी भी नहीं बचे। पोखर का शांत पानी सुबह परिवारों के लिए सबसे बड़ा दुख बन गया। विष्णुटोला और रजंदीपुर के घर अब खाली से लग रहे हैं। परिजन रो रहे हैं, गांव शोक में डूबा है और प्रशासन जांच कर रहा है। पर्व के गीत थम गए हैं। उनकी जगह अब केवल विलाप बाकी है। बच्चों की उम्र और एक साथ इतनी मौतें इलाके को लंबे समय तक याद रहेंगी। पानी के किनारे खेलने और स्नान करने की आदत पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिवारों को इस आघात से उबरने में काफी समय लगेगा।

Read More Here:- 

Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 2026 में मां दुर्गा हाथी पर आएंगी, घोड़े पर विदाई का क्या संकेत?

West Bengal News: पश्चिम बंगाल में बिना छात्रों वाले 4133 सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, PPP मॉडल से मिलेगी नई पहचान

JPSC-JSSC पेपर लीक पर सरकार का बड़ा फैसला! हाईकोर्ट में कहा- ‘बिकी’ परीक्षा से चयनितों को नहीं मिलेगी नौकरी

UP News: मुकेश सहनी का यूपी निषाद आरक्षण अभियान तेज, 50 लाख लोगों से संकल्प का लक्ष्य

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...
Sanjna Gupta
Sanjna Guptahttp://newsmediakiran.com
Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles