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Bihar Politics: बिहार में ‘ऑपरेशन लोटस’ फेल होने का दावा, निर्दलीय MLC के बदले रुख से सियासी हलचल तेज

1 घंटे पहले
Bihar Politics

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में हाल के दिनों में एक नया घटनाक्रम चर्चा का विषय बना। एमएलसी चुनाव के बाद निर्दलीय जीते दो सदस्यों राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के बीजेपी में शामिल होने की खबर आई। इसे राजनीतिक गलियारों में ‘ऑपरेशन लोटस’ कहा जाने लगा। हालांकि यह कोशिश फिलहाल रुक गई है। दोनों एमएलसी ने अपना रुख बदलते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ समर्थन दिया है, सदस्यता नहीं ली। इस पूरे मामले से जेडीयू नाराज हुई और राजद तथा जन सुराज ने सदस्यता रद्द करने की मांग कर दी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हस्तक्षेप के बाद स्थिति कुछ शांत हुई, लेकिन एनडीए में खटास साफ दिख रही है।

ऑपरेशन लोटस क्या था और कैसे शुरू हुआ?

हाल में संपन्न हुए बिहार विधान परिषद के चुनावों में आठ सीटों पर मतदान हुआ। इनमें सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राहुल राज और तिरहुत स्नातक क्षेत्र से बंशीधर ब्रजवासी निर्दलीय जीते। दोनों ने जेडीयू के उम्मीदवारों को हराया। राहुल राज ने सारण में जेडीयू के आनंद पुष्कर को और बंशीधर ब्रजवासी ने तिरहुत में अभिषेक झा को पराजित किया। चुनाव के कुछ दिनों बाद दोनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बीजेपी बिहार अध्यक्ष संजय सरावगी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने बीजेपी की सदस्यता लेने की बात कही। राहुल राज पहले बीजेपी से कुछ समय के लिए निष्कासित भी हो चुके थे। इस घटना को पंजाब में बीजेपी द्वारा कुछ विधायकों को अपने पाले में लाने वाले ऑपरेशन लोटस से जोड़ा गया। बिहार में भी विधान परिषद में अपनी संख्या बढ़ाने की कोशिश मानी गई।

जेडीयू क्यों नाराज हुई और प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों टली?

जेडीयू के कई नेताओं ने इसे भितरघात और पार्टी को कमजोर करने की कोशिश बताया। खासकर अभिषेक झा, जो तिरहुत सीट पर हारे थे, प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे। वे इशारों में बीजेपी पर आरोप लगा रहे थे। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने सम्राट चौधरी से जेडीयू की नाराजगी दूर करने को कहा। चौधरी दिल्ली दौरे पर गए थे, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात हुई। लौटकर उन्होंने खुद फोन किया और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं संजय झा तथा उमेश कुशवाहा से भी बात करवाई। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस टल गई। जेडीयू बिहार अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि बीजेपी का आंतरिक मामला है कि वह किसे शामिल करे, लेकिन बागी नेताओं को वापस लाना और सम्मान देना सवाल खड़े करता है। उन्होंने एनडीए की एकता पर भी जोर दिया।

दोनों एमएलसी ने अपना रुख क्यों बदला?

राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी अब कह रहे हैं कि उन्होंने बीजेपी की सदस्यता नहीं ली, सिर्फ बाहर से समर्थन दिया है। पहले वे शिक्षकों और अपने क्षेत्र के मुद्दों के लिए पार्टी में आने की बात कर रहे थे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि निर्दलीय चुने गए सदस्य अगर चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होते हैं तो संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द हो सकती है। ऐसे में बीजेपी को कोई सीधा फायदा नहीं होता और दोनों एमएलसी भी जोखिम में पड़ सकते थे। इसी वजह से उन्होंने अपना बयान बदल दिया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि दोनों को एहसास हो गया कि गलती हो गई है।

विपक्ष ने क्या मांग की?

राजद के तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी ने दोनों एमएलसी की सदस्यता रद्द करने की मांग की। जन सुराज के नेता किशोर कुमार मुन्ना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल विधान परिषद के सभापति रामवचन राय से मिला। उन्होंने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव जीतने के कुछ ही दिनों में पार्टी बदलना दलबदल कानून का उल्लंघन है। तेजस्वी यादव ने भी इसे संविधान की मजाक बताया। विपक्ष का कहना है कि अगर निर्दलीय सदस्य पार्टी जॉइन करते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का उदाहरण भी दिया जा रहा है, जो कांग्रेस के मंचों पर जाते हैं लेकिन औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुए हैं ताकि सदस्यता बची रहे।

बीजेपी-जेडीयू रिश्तों पर क्या असर पड़ा और आगे क्या?

इस घटनाक्रम से एनडीए सहयोगियों के बीच खटास बढ़ी। जेडीयू की तरफ से संकेत दिया गया कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। बीजेपी की तरफ से इसे विधान परिषद में अपनी संख्या बढ़ाने की रणनीति बताया जा रहा है। हाल में पार्टी को कुछ चुनावी झटके भी लगे थे, जिसमें नितिन नवीन की बांकीपुर सीट शामिल है। पटना की एक पुरानी सीट भी हाथ से निकल गई थी। फिलहाल ऑपरेशन लोटस पर ब्रेक लग गया है। आगे बीजेपी और जेडीयू के बीच तल्खी कितनी जल्दी खत्म होती है और दोनों एमएलसी का असली रुख क्या रहता है, यह देखने वाली बात होगी। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि एनडीए की एकता बनाए रखना दोनों दलों के लिए जरूरी है, खासकर जब विधान परिषद में संख्या का गणित महत्वपूर्ण हो।

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Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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