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Russia Election 2026: रूस चुनाव में पुतिन की पार्टी की रिकॉर्ड जीत, 450 में से 355 सीटों पर कब्जा, जानें पूरा गणित

21 सितंबर 2026
Russia Election 2026
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Russia Election 2026: रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सत्ताधारी पार्टी यूनाइटेड रशिया ने अपने राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। रूस के चुनाव आयोग की प्रमुख एला पामफिलोवा द्वारा जारी शुरुआती नतीजों के मुताबिक पार्टी ने कुल 450 सीटों में से रिकॉर्ड 355 सीटें अपने नाम कर लीं। यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हुए हमले के बाद रूस में कराया गया पहला संसदीय चुनाव था। पुतिन ने इस चुनाव को यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के प्रति जनसमर्थन की एक बड़ी परीक्षा के तौर पर पेश किया था। पार्टी को इस बार करीब 57.8 प्रतिशत वोट हासिल हुए, जो वर्ष 2021 के पिछले चुनाव में मिले 49.8 प्रतिशत वोट शेयर से कहीं ज्यादा है। इस प्रचंड जीत के साथ यूनाइटेड रशिया ने संसद में एक मजबूत और निर्णायक बहुमत हासिल कर लिया है।

Russia Election 2026: चुनाव के मुख्य आंकड़ों पर एक नजर

रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा में कुल 450 सीटें हैं, और इस बार के चुनाव में यूनाइटेड रशिया पार्टी ने इनमें से 355 सीटों पर जीत दर्ज कर एक तरह की सुपर मेजॉरिटी हासिल कर ली है। पार्टी का वोट शेयर बढ़कर करीब 57.8 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि वोटिंग टर्नआउट की बात करें तो इस बार करीब 57 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यह आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि पार्टी ने न केवल सीटों के मामले में बल्कि वोट प्रतिशत के हिसाब से भी पिछले चुनावों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। इस जीत के साथ ही पार्टी ने वर्ष 2016 में बनाए गए अपने ही पुराने सबसे बड़ी सीटों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया, जिससे यह चुनाव यूनाइटेड रशिया के राजनीतिक सफर में एक नया मील का पत्थर बन गया है।

युद्धकाल में हुआ पहला बड़ा जनादेश

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यह चुनाव इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर सैन्य हमले के बाद यह रूस में हुआ पहला संसदीय चुनाव था। राष्ट्रपति पुतिन ने इस पूरे चुनावी अभियान को यूक्रेन में तैनात रूसी सैनिकों के प्रति देश की जनता के समर्थन की एक कसौटी के रूप में प्रस्तुत किया था। युद्ध के बीच हुए इस जनादेश को क्रेमलिन की तरफ से जनसमर्थन के एक बड़े प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी की भारी जीत ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि युद्ध के तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद रूसी जनता का बड़ा हिस्सा अब भी पुतिन प्रशासन और उसकी नीतियों के साथ खड़ा है, हालांकि आलोचक इस दावे पर सवाल भी उठाते रहे हैं।

विपक्ष की स्थिति और चुनाव पर उठे सवाल

इस चुनाव में दूसरे स्थान पर कम्युनिस्ट पार्टी रही, जिसे करीब 13.8 प्रतिशत वोट हासिल हुए। हालांकि आलोचकों का मानना है कि इस पूरी चुनावी प्रक्रिया में पुतिन की नीतियों का खुलकर और कड़ा विरोध करने वाले किसी भी प्रमुख विपक्षी दल या उम्मीदवार को वास्तविक रूप से हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई थी। इस वजह से पश्चिमी देशों और कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने इस चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब वास्तविक प्रतिस्पर्धा ही सीमित कर दी जाए, तो नतीजों को स्वतंत्र और निष्पक्ष जनादेश मानना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद क्रेमलिन की तरफ से इस चुनाव को पूरी तरह वैध और पारदर्शी बताया गया है।

विवादित क्षेत्रों में भी हुआ मतदान

इस चुनाव से जुड़ा एक और अहम और विवादास्पद पहलू यह रहा कि मतदान रूस के नियंत्रण वाले यूक्रेन के चार क्षेत्रों के साथ-साथ वर्ष 2014 में कब्जाए गए क्रीमिया में भी कराया गया। यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इस कदम का कड़ा विरोध जताया है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन क्षेत्रों को यूक्रेन का ही हिस्सा माना जाता है। यूक्रेन सरकार का कहना है कि इन इलाकों में कराया गया चुनाव अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन है और इसे किसी भी रूप में वैध नहीं माना जा सकता। हालांकि रूस की तरफ से इन क्षेत्रों को अपने संप्रभु हिस्से के रूप में पेश किया जाता रहा है, इसलिए वहां भी मतदान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

प्रचंड बहुमत से क्या बदलेगा संसद का समीकरण

यूनाइटेड रशिया पार्टी को मिली इस ऐतिहासिक जीत के बाद स्टेट ड्यूमा में पार्टी की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। इतनी बड़ी सुपर मेजॉरिटी के साथ पार्टी अब संसद में बिना किसी बड़ी रुकावट के महत्वपूर्ण संवैधानिक और नीतिगत बदलाव पारित करा सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रचंड जनादेश से राष्ट्रपति पुतिन की राजनीतिक पकड़ और भी मजबूत होगी, जिससे आने वाले समय में घरेलू नीतियों के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध से जुड़े फैसलों पर भी उनका नियंत्रण पहले से अधिक निर्णायक हो जाएगा। संसद में विपक्ष की सीमित मौजूदगी की वजह से किसी भी बड़े प्रस्ताव या कानून के खिलाफ प्रभावी विरोध दर्ज कराना भी अब कठिन हो सकता है।

कुल मिलाकर रूस के इस ताजा संसदीय चुनाव ने युद्धकाल के बीच पुतिन और उनकी पार्टी की मजबूत राजनीतिक पकड़ को एक बार फिर स्पष्ट रूप से दर्शाया है। 355 सीटों और 57.8 प्रतिशत वोट शेयर के साथ मिली यह ऐतिहासिक जीत यूनाइटेड रशिया के लिए एक नया कीर्तिमान साबित हुई है, हालांकि विपक्षी दलों की सीमित भागीदारी और विवादित क्षेत्रों में हुए मतदान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल बरकरार हैं। इस जनादेश के बाद रूस की घरेलू और वैश्विक नीतियों में पुतिन प्रशासन की भूमिका और अधिक निर्णायक होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसका असर आने वाले वर्षों में रूस-यूक्रेन संघर्ष सहित कई बड़े मुद्दों पर देखने को मिल सकता है।

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Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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