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Tata Power Struggle में Venu Srinivasan की बढ़ी भूमिका: TVS के दिग्गज से ट्रस्ट और Tata Sons की खींचतान तक

Mumbai: देश के प्रमुख कारोबारी समूहों में शामिल टाटा समूह में इन दिनों कॉरपोरेट गवर्नेंस, ट्रस्ट की भूमिका और Tata Sons के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। इस पूरे विवाद के केंद्र में एक ऐसा नाम उभरकर आया है, जिसने करीब पांच दशक तक TVS समूह को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई—वेनु श्रीनिवासन।

73 वर्षीय श्रीनिवासन TVS परिवार की तीसरी पीढ़ी से आते हैं और Tata Trusts के नामित निदेशकों में शामिल हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की 27 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, Tata Sons के 17 सितंबर को हुए बोर्ड बैठक के बाद श्रीनिवासन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। रिपोर्ट में उनके और Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा के बीच Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल और कंपनी की संभावित लिस्टिंग जैसे मुद्दों पर अलग-अलग रुख का उल्लेख किया गया है।

TVS को नई पहचान देने वाले श्रीनिवासन

वेनु श्रीनिवासन ने 1979 में महज 27 वर्ष की उम्र में Sundaram-Clayton की जिम्मेदारी संभाली थी। उन्होंने कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, गिंडी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में Purdue University से मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की। शुरुआती दौर में उन्होंने अपने परिवार के कारोबार में मैकेनिक के तौर पर भी काम किया।

1980 और 1990 के दशक में TVS Motor को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। होसुर संयंत्र में श्रमिक असंतोष और आर्थिक कठिनाइयों के बीच 1990 में संयंत्र को तीन महीने के लिए बंद करने का फैसला लिया गया। इसके बाद दीर्घकालिक वेतन समझौते और औद्योगिक संबंधों का नया ढांचा तैयार हुआ।

TVS और Suzuki का संयुक्त उपक्रम भी 1990 के दशक के अंत में समाप्त हुआ, जिसके बाद TVS को अपनी तकनीकी क्षमताओं को विकसित करना पड़ा। आज TVS Motor की कमान श्रीनिवासन के बेटे सुदर्शन वेणु के पास है, जबकि उनकी बेटी लक्ष्मी वेणु Sundaram-Clayton से जुड़ी रही हैं।

Tata समूह में कैसे बढ़ी भूमिका?

श्रीनिवासन की Tata समूह में एंट्री 2016 में हुई, जब Tata Sons ने उन्हें गैर-कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया। यह नियुक्ति उस समय हुई जब समूह के भीतर साइरस मिस्त्री के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद नेतृत्व परिवर्तन का दौर चल रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीनिवासन उस समिति का हिस्सा थे जिसने उत्तराधिकारी की पहचान में भूमिका निभाई।

बाद में रतन टाटा ने उन्हें Tata Trusts में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। श्रीनिवासन और पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह प्रमुख Tata Trusts के वाइस चेयरमैन बने। रिपोर्ट के अनुसार, Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इसलिए ट्रस्ट से जुड़े पदों ने श्रीनिवासन को समूह के संस्थागत ढांचे में महत्वपूर्ण स्थान दिया।

Ratan Tata

रतन टाटा के बाद बदला समीकरण

रतन टाटा के अक्टूबर 2024 में निधन के बाद नोएल टाटा ने Tata Trusts की कमान संभाली। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद ट्रस्ट के भीतर कई मुद्दों पर मतभेद अधिक स्पष्ट हुए। अक्टूबर 2025 में Mehli Mistry को ट्रस्टी बनाए रखने के मुद्दे पर श्रीनिवासन ने नोएल टाटा और विजय सिंह के साथ अलग रुख अपनाया था। इसके बाद श्रीनिवासन को Tata Trusts का आजीवन ट्रस्टी फिर से नियुक्त किया गया और नवंबर 2025 में उन्हें Sir Dorabji Tata Trust का ट्रस्टी तथा वाइस चेयरमैन बनाया गया।

एक अन्य मामले में Mehli Mistry ने कुछ ट्रस्ट पदों के लिए श्रीनिवासन और विजय सिंह की पात्रता पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि ट्रस्ट कंपनियों से भुगतान और कमीशन को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच की मांग की गई थी, लेकिन इससे श्रीनिवासन के खिलाफ किसी गलत काम का निष्कर्ष स्थापित नहीं हुआ।

Tata Sons की लिस्टिंग और चंद्रशेखरन के कार्यकाल पर मतभेद

टाटा समूह के मौजूदा घटनाक्रम में सबसे अहम मोड़ 17 सितंबर 2026 की Tata Sons बोर्ड बैठक को बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीनिवासन ने एन. चंद्रशेखरन के पांच वर्ष के नए कार्यकाल का समर्थन किया, जबकि नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। बोर्ड में प्रस्ताव बहुमत से आगे बढ़ा।

इसी बैठक में Tata Sons की लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव पर भी श्रीनिवासन ने समर्थन किया, जबकि रिपोर्ट के अनुसार नोएल टाटा इसके पक्ष में नहीं थे। बोर्ड ने दोनों प्रस्तावों को बहुमत से मंजूरी दी।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि श्रीनिवासन Tata Sons में केवल एक सामान्य निदेशक नहीं हैं। वे Tata Trusts से जुड़े ट्रस्टी और Tata Sons बोर्ड में ट्रस्ट के संयुक्त नामित निदेशक हैं। इसलिए उनके बोर्ड वोट का महत्व समूह के स्वामित्व और गवर्नेंस संरचना के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

TVS में भी सामने आए थे गवर्नेंस से जुड़े मतभेद

श्रीनिवासन के करियर में कॉरपोरेट विवाद नया नहीं है। TVS Motor और Bajaj Auto के बीच 125cc Flame मोटरसाइकिल की तकनीक को लेकर कानूनी विवाद हुआ था। Bajaj ने पेटेंट उल्लंघन का आरोप लगाया था और मामला अदालत तक पहुंचा था। बाद में TVS को मोटरसाइकिल में इस्तेमाल तकनीक में बदलाव करना पड़ा।

2026 में Sundaram-Clayton में भी प्रमोटर परिवार के भीतर गवर्नेंस से जुड़े मतभेद सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन से जुड़े कई बदलावों के बाद श्रीनिवासन मार्च 2026 में फिर से कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बने।

अब आगे क्या?

Tata Sons से जुड़े मौजूदा घटनाक्रम का अगला चरण शेयरधारकों की बैठक और कानूनी एवं नियामकीय प्रक्रियाओं में दिखाई दे सकता है। यहां मुख्य सवाल केवल चंद्रशेखरन के कार्यकाल या Tata Sons की लिस्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि Tata Trusts के नामित निदेशकों की भूमिका और ट्रस्ट के नेतृत्व के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया किस तरह काम करेगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने वेनु श्रीनिवासन को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। TVS समूह को आगे बढ़ाने वाले औद्योगिक दिग्गज की भूमिका अब Tata Trusts और Tata Sons के बीच चल रही गवर्नेंस बहस में भी महत्वपूर्ण दिखाई दे रही है। हालांकि, इस विवाद से जुड़े कई मुद्दे अभी बोर्ड, शेयरधारकों और संबंधित नियामकीय या कानूनी प्रक्रियाओं के स्तर पर आगे बढ़ने बाकी हैं।

Manpreet Singh
Author: Manpreet Singh

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