Train Rule Booking Rule: 15 अक्टूबर 2026 से दो हजार रुपये से ज्यादा की ट्रेन टिकट अगर यूपीआई से बुक की गई तो मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर से जुड़ा नया नियम लागू होगा। फोनपे, गूगल पे और पेटीएम जैसे यूपीआई ऐप से भुगतान करने वाले यात्रियों के लिए यह बदलाव अहम है।
वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण के अनुसार यह पांच रुपये का एमडीआर रेलवे या आईआरसीटीसी की तरफ से चुकाया जाएगा। यात्री की जेब पर एक रुपये का भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। बैंक या मर्चेंट यह शुल्क यात्री से नहीं वसूल सकते।
नियम समझने से भ्रम कम होता है। टिकट की कीमत जितनी दिखेगी उतनी ही देनी होगी। विशेष श्रेणी के कारण रेलवे पर फ्लैट पांच रुपये का शुल्क लगेगा, प्रतिशत वाला सामान्य मर्चेंट नियम नहीं।
नया एमडीआर नियम क्या है और कब से लागू होगा?
नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। दो हजार रुपये से अधिक के रेल टिकट का भुगतान यूपीआई से होने पर पांच रुपये का फ्लैट एमडीआर लगेगा। टिकट तीन हजार का हो या दस हजार का, रेलवे पर यही तय शुल्क रहेगा।
आम मर्चेंट लेन देन जैसे दुकान या अन्य सेवा पर दो हजार रुपये से ऊपर 0.4 प्रतिशत शुल्क तय किया गया है। अधिकतम सीमा तीन सौ रुपये बताई गई है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल को विशेष श्रेणी में रखा गया है। इसलिए प्रतिशत वाला फॉर्मूला टिकट बुकिंग पर नहीं चलेगा।
यूपीआई से व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी2पी ट्रांसफर किसी भी राशि पर पूरी तरह फ्री रहेगा। छोटे मर्चेंट पेमेंट दो हजार रुपये तक भी फ्री रहेंगे। सामान्य मर्चेंट पेमेंट दो हजार से अधिक पर 0.4 प्रतिशत लगेगा। रेल टिकट दो हजार से अधिक पर पांच रुपये फ्लैट रहेगा।
क्या यात्रियों को टिकट के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे?
नहीं। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि पांच रुपये का एमडीआर मर्चेंट यानी रेलवे या आईआरसीटीसी चुकाएगा। कोई अतिरिक्त चार्ज यात्री से नहीं लिया जा सकता।
उदाहरण से समझें। तीन हजार रुपये का टिकट बुक करने पर यात्री को तीन हजार रुपये ही देने होंगे, तीन हजार पांच नहीं। दस हजार रुपये के टिकट पर भी यात्री वही राशि चुकाएगा जो टिकट की कीमत है।
अगर सामान्य 0.4 प्रतिशत नियम रेलवे पर लगता तो दस हजार रुपये के टिकट पर चालीस रुपये एमडीआर बनता। विशेष श्रेणी में होने के कारण मर्चेंट साइड पर सिर्फ पांच रुपये ही लगेंगे। यात्री के लिए कीमत वही रहेगी।
यूपीआई से ट्रेन टिकट बुक करने वालों पर क्या असर पड़ेगा?
ऑनलाइन ट्रेन टिकट बार बार बुक करने वाले यात्रियों को भुगतान का तरीका बदलने की जरूरत नहीं है। फोनपे, गूगल पे या पेटीएम से भुगतान जारी रह सकता है। दो हजार रुपये से कम के टिकट पर यह फ्लैट शुल्क लागू नहीं होगा।
दो हजार से ऊपर की बुकिंग में भी स्क्रीन पर दिखने वाली टिकट कीमत ही देय रहेगी। नियम मर्चेंट और बैंक के बीच के शुल्क से जुड़ा है, यात्री बिल से नहीं। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं बताई गई है।
विशेष श्रेणी इसलिए बनाई गई है कि बड़ी राशि वाली जरूरी सेवाओं पर प्रतिशत शुल्क यात्री तक न पहुंचे। रेलवे जैसी सेवा में फ्लैट पांच रुपये मर्चेंट पर सीमित रखने से यात्री प्रभावित नहीं होगा।
आम यूपीआई पेमेंट और रेलवे बुकिंग में क्या फर्क है?
व्यक्ति से व्यक्ति ट्रांसफर पूरी तरह फ्री है। दुकान पर दो हजार तक का भुगतान भी फ्री है। दो हजार से ऊपर सामान्य व्यापारिक भुगतान पर 0.4 प्रतिशत लगता है जिसकी ऊपरी सीमा तीन सौ रुपये है।
रेल टिकट बुकिंग अलग श्रेणी में है। दो हजार से अधिक राशि पर केवल पांच रुपये फ्लैट मर्चेंट पर लगेगा। टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल भी इसी खास कैटेगरी में रखे गए हैं।
यह फर्क इसलिए जरूरी है कि यात्री सामान्य दुकान वाले नियम को टिकट पर न जोड़ ले। प्रतिशत वाला हिसाब रेलवे टिकट पर लागू नहीं होगा। कीमत वही रहेगी जो बुकिंग के समय दिखेगी।
यात्रियों को 15 अक्टूबर से क्या ध्यान रखना चाहिए?
15 अक्टूबर 2026 के बाद भी यूपीआई से टिकट बुक करते समय कुल राशि चेक कर लें। वित्त मंत्रालय के अनुसार अतिरिक्त पांच रुपये यात्री से नहीं जोड़े जा सकते। अगर कोई प्लेटफॉर्म अतिरिक्त वसूली करे तो वह नियम के विरुद्ध होगा।
दो हजार रुपये तक की टिकट पर यह फ्लैट एमडीआर लागू नहीं है। उससे ऊपर की टिकट पर भी यात्री भुगतान टिकट मूल्य के बराबर ही रहेगा। बैंक या मर्चेंट शुल्क यात्री पर नहीं डाल सकते।
नियम का उद्देश्य शुल्क व्यवस्था साफ करना है, टिकट महंगी करना नहीं। विशेष श्रेणी के कारण रेलवे पर बोझ सीमित रखा गया है। यात्री के लिए सबसे साफ बात यही है कि दिखने वाली कीमत ही देय कीमत रहेगी।
ऑनलाइन बुकिंग करने वाले यात्रियों को ऐप बदलने की जरूरत नहीं। यूपीआई का उपयोग पहले जैसा रह सकता है। बदलाव बैकएंड मर्चेंट शुल्क से जुड़ा है। यात्री अनुभव में अतिरिक्त रुपया नहीं जुड़ेगा, ऐसा स्पष्ट किया गया है।
दो हजार से ऊपर हर टिकट पर पांच रुपये मर्चेंट साइड पर तय हैं चाहे टिकट तीन हजार हो या दस हजार। प्रतिशत हिसाब नहीं चलेगा। इसीलिए सामान्य मर्चेंट वाले 0.4 प्रतिशत से तुलना करने पर रेलवे पर शुल्क बहुत कम रह जाता है।
यात्रियों के लिए व्यावहारिक संदेश सरल है। 15 अक्टूबर के बाद भी टिकट की कीमत वही चुकाएं जो बुक करते समय दिखे। पांच रुपये का एमडीआर रेलवे या आईआरसीटीसी वहन करेगा। बैंक या ऐप इसे यात्री से नहीं ले सकते।
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